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गजल सम्राट मेंहदी हसन अब नहीं रहे…

By   /  June 13, 2012  /  3 Comments

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गजल सम्राट मेंहदी हसन का आज दोपहर 12 बजे के करीब पाकिस्तान के करांची शहर में निधन हो गया। भारत में जन्में और पाकिस्तान में रहे मेंहदी हसन के भारत समेत दुनिया भर में लाखों प्रशंसक हैं। वह 84 वर्ष के थे और पिछले दिनों से करांची के अगा खान अस्पताल में भर्ती थे।
गजल सम्राट मेंहदी हसन को भावभीनी श्रद्धांजलि देते हुए भारत और पाकिस्तान के मशहूर फनकारों ने कहा कि उनके जाने से संगीत की दुनिया में ऐसा खालीपन पैदा हो गया है जिसे कभी भरा नहीं जा सकेगा।हसन से तालीम लेने वाले गायक तलत अजीज ने कहा कि मेरे लिये तो यह व्यक्तिगत नुकसान है। मैं उनका शागिर्द था। मैंने उनके साथ काफी समय बिताया है। मेरे लिये वह स्टार थे।

उनके इंतकाल पर कुछ कहने के लिये मेरे पास अल्फाज नहीं है। वह गजल की दुनिया का नगीना थे। कोई दूसरा मेंहदी हसन पैदा नहीं होगा।

पाकिस्तानी सूफी गायिका आबिदा परवीन ने कहा कि वह हमेशा कहते थे कि मैं सुर देख सकता हूं। भारत और पाकिस्तान दोनों देशों में उनके चाहने वालों की कमी नहीं थी। वह महान थे। ऐसे फनकार कभी कभी ही पैदा होते हैं।

पाकिस्तानी गायक अदनान सामी ने कहा कि वह हर किसी के प्रेरणास्रोत थे। मेहदी हसन अपने आप में एक संस्थान थे। मैं अभी भी इस खबर को पचा नहीं पा रहा हूं कि वह नहीं रहे।

जिला खान ने कहा कि मुझे उतना ही दुख है जितना अपने पिता के जाने पर हुआ था। वह कितने महान फनकार थे। वह गजल गायिकी के शहंशाह थे।

दिवंगत जगजीत सिंह की पत्नी चित्रा ने कहा कि हर किसी ने उनके संगीत, तकनीक और गाने की शैली से सीखा था। मैं उनसे मिली थी और वह हमेशा हौसलाअफजाई करते थे।

वयोवृद्ध संगीतकार प्यारेलाल ने कहा कि यह बहुत बुरी खबर है। वह महान गायक ही नहीं बल्कि बेहतरीन इंसान भी थे। मुझे याद है कि अस्सी के दशक में मेरे घर में उनका कन्सर्ट हुआ था। मुझे पता था कि वह बीमार हैं लेकिन मैं उनके जल्दी ठीक होने ही दुआ कर रहा था। वह हमेशा हमारे दिलों में जिंदा रहेंगे।

ग्रैमी पुरस्कार विजेता मोहन वीणा वादक विश्व मोहन भट्ट ने कहा कि यह अपूरणीय क्षति है। गजल गायिकी के एक दौर का अंत हो गया। उनकी गजलें पेचीदा नहीं होती थी और आम आदमी भी समझ सकता था। उनकी उर्दू इतनी अच्छी थी कि गायिकी और मधुर हो जाती थी।

अनुपम खेर ने कहा कि मेरे पसंदीदा गजल गायक मेंहदी हसन नहीं रहे। छात्र जीवन में उन्हें सुनने के लिये पाकिस्तान दूतावास के बाहर धक्के खाये थे।

निर्देशक मधुर भंडारकर ने कहा कि गजल शहंशाह नहीं रहे। मेंहदी हसन की कमी बहुत खलेगी। गायिका श्रेया घोषाल ने कहा कि मेंहदी हसन साहब नहीं रहे। कई दिलों के जज्बातों को जुबां देने वाली आवाज खामोश हो गई।

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About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक “मुखौटों के पीछे – असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष” में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

3 Comments

  1. Kamlesh Mishra says:

    GUZAL SAMARAT

  2. Meraj Alam says:

    oh mahan gazal o sufhi gayak thi bhoot hi dukhad khabar ye

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