/एकमेव जज सोनिया गांधी! क्या वाम समर्थन से बनेगा बाजार का राष्ट्रपति?

एकमेव जज सोनिया गांधी! क्या वाम समर्थन से बनेगा बाजार का राष्ट्रपति?

-पलाश विश्वास||

राष्ट्रपति चुनाव को लेकर मचा सियासी घमासान और उग्र हो गया है। कांग्रेस ने पहली बार यह साफ कर दिया है कि मनमोहन सिंह 2014 तक प्रधानमंत्री बने रहेंगे। पार्टी के महासचिव जनार्दन द्विवेदी ने ममता बनर्जी पर मर्यादा तोड़ने का आरोप लगाते हुए ममता और मुलायम द्वारा सुझाए गए तीनों नाम खारिज कर दिए।राष्ट्रपति चुनाव को लेकर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के दिल्ली आने के बाद से शुरू हुआ सियासी घमासान चरम पर पहुंच गया है। कांग्रेस ने पहली बार इस मुद्दे पर सार्वजनिक रूप से अपनी चुप्पी तोड़ी है। पार्टी के महासचिव जनार्दन द्विवेदी दोपहर करीब 12 बजे पत्रकारों के सामने आए और उन्होंने ममता और मुलायम के द्वारा सुझाए गए तीनों नाम खारिज कर दिए।तृणमूल कांग्रेस-सपा गठबंधन द्वारा सुझाए गए तीन नामों के प्रस्ताव को खारिज करते हुए कांग्रेस गुरुवार या शुक्रवार को संप्रग उम्मीदवार के नाम की घोषणा कर सकती है। पार्टी के शीर्ष सूत्रों ने कहा कि कांग्रेस कोर समिति की बैठक के बाद आज शाम या कल घोषणा हो सकती है। तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख ममता बनर्जी ने कल कहा था कि वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी और उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी कांग्रेस के पहले और दूसरे पसंद हैं।

सत्यमेव जयते!आपको याद होगा कि दिल्ली की नौटंकी का परदा उठने से काफी पहले हमने राष्ट्रपति डा. राधा कृष्णण को मौजूदा राष्ट्रपति के कार्यकाल के प्रसंग में याद किया था। गणतंत्र की स्थापना के साथ संकल्प लिये गये थे, वह सपने अब भी कहीं ठिठके हुये आम जन के मन में, आंखों में तैर रहे है। हो सकें तो उसे दोबारा पढ़ लें। भारत में अंग्रेजी हुकूमत के अवसान के बाद जबसे सत्तावर्ग को सत्ता हस्तांतरण हुआ और बहिष्कार, वर्चस्व व नरसंहार की संस्कृति चालू है,यानी 1947 से अब तक व्यवस्था और अर्थव्यवस्था में ग्लोबल समीकरण के मुताबिक तीन महत्वपूर्ण अवसर आये, जब सरकार, नीति निर्धारण, संसदीय राजनीति, मीडिया , न्यायपालिका, जन सरोकार, जनांदोलन, प्रतिरोध, समाज और संस्कृति एक मुश्त संक्रमणकाल के जद में आ गये। 1969 का राष्ट्रपति चुनाव, 1991 में उदारवादी नरसंहराव का अवतरण और बतौर खुले बाजार के जनक डा. मनमोहन सिंह का भारतीय राजनीति में बतौर वाशिंगटन के नुमाइंदा पूरी टीम के साथ बाहैसियत अर्थमंत्री भारतीय संसदीय लोकतंत्र में आविर्भाव। और मौजूदा राष्ट्रपति चुनाव का शंघाई एजंडा।उदारीकरण का यह दूसरा दौर है जहाँ पहुँचकर देश की नियति खासकर गरीब-गुरबों के भाग्य ऐसी कम्पनियों के हाथों सौंप दिया गया हैं जिनके लिए मुनाफा कमाना चाहे जिस कीमत पर संभव हों, एकमात्र लक्ष्य हैं। तीनों मुहूर्त के फिलमांकन में कामन चेहरा प्रणव मुखर्जी का है, जो सर्वत्रे विद्यमान!इसी दरम्यान इंदिरा गांधी के दूरदर्शन अभियान और राजीव गांधी की तकनीक सूचना क्रांति के मध्य सैम पित्रोदा, मंटेक सिंह आहलूवालिया जैसे गैरसंवैधानिक गैर संसदीय चरित्रों का वर्चस्व नीति निर्धारण और अर्थव्यवस्था में निर्णायक बनते जाना भारत के इमर्जिंग मार्केट में समाहित हो जाने की हरिकथा अनंत है।

ताजा खबरों के मुताबिक अब राष्ट्रपति चुनाव के लिए उम्मीदवारों के नाम फाइनल होने से पहले कांग्रेस और तृणमूल आमने-सामने हो गए हैं।राष्ट्रपति पद के लिए मची दौड़ में एक और ट्विस्ट आता दिखाई दे रहा है। कांग्रेस सूत्रों से खबर आ रही है कि राष्ट्रपति पद के लिए तृणमूल कांग्रेस चीफ ममता बनर्जी और समाजवादी पार्टी के मुखिया मुलायम सिंह यादव की ओर से सुझाए गए नामों को स्वीकार नहीं किया जाएगा।कांग्रेस सूत्रों ने बताया कि कलाम पहली पसंद नहीं बन सकते और प्रणब मुखर्जी के नाम को हटाया नहीं जा सकता। दूसरी ओर पीएमओ ने भी राष्ट्रपति पद के लिए प्रधानमंत्री की संभावित उम्मीदवारी की खबर को खारिज कर दिया है। राष्ट्रपति चुनाव के लिए आम सहमति बनाने के उद्देश्य से यूपीए जल्द ही एक इमरजेंसी मीटिंग बुला सकता है। सूत्रों ने बताया कि यूपीए में किसी एक नाम पर एकमत होने की कोशिश की जाएगी। इसके बाद यूपीए की ओर से किसी एक आधिकारिक नाम की घोषणा भी की जा सकती है। इस बीच खबर है कि प्रणब अब भी कांग्रेस की लिस्ट में सबसे ऊपर हैं। ममता-मुलायम के ट्विस्ट के बाद कांग्रेस के पास भी चिंतित होने के अपने कारण हैं। यदि यूपीए उम्मीदवार की राष्ट्रपति चुनाव में हार होती है तो सरकार जल्द गिर भी सकती है जिससे आम चुनाव होने की संभावना बढ़ जाएगी। ममता और मुलायम ने साथ आकर राज्यों का एक तीसरा फ्रंट जैसी अटकलों को भी तेज कर दिया है।इन सबके बीच सोनिया गांधी की विश्वसनीयता दांव पर लगी हुई है। कांग्रेस समर्थित उम्मीदवार को चुनाव के लिए नामांकन कराना कांग्रेस के लिए एक बड़ी चुनौती बनने वाली है। साथ ही प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के लिए भी यह एक चिंता का विषय है जब सहयोगी उनपर पीएम से अधिक राष्ट्रपति बनने को लेकर विश्वास जता रहे हों।

कांग्रेस ने राष्ट्रपति पद के लिए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की उम्मीदवारी खारिज करते हुए कहा है कि वे उन्हें नहीं छोड़ सकती।

कांग्रेस नेता जनार्दन द्विवेदी ने संवाददाताओं से कहा, “मनमोहन सिंह 2014 तक प्रधानमंत्री रहेंगे।” उन्होंने कहा, “हम डॉ. मनमोहन सिंह को छोड़ने की स्थिति में नहीं हैं।”

राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) ने राष्ट्रपति पद के लिये अभी तक अपना प्रत्याशी घोषित नहीं किया है, लेकिन पूर्व केन्द्रीय मंत्री तथा भारतीय जनता पार्टी की सांसद मेनका गांधी की राष्ट्रपति पद के लिए पसंद केन्द्रीय वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी हैं। उन्होंने कहा कि मुखर्जी एक सुलझे हुए राजनीतिज्ञ हैं तथा वे उन्हें पिछले तीस साल से जानती हैं।श्रीमती मेनका गांधी ने पार्टी नेता और गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी का नाम प्रधानमंत्री पद के लिये सामने आने को अच्छा कदम बताया और कहा कि वे अच्छे प्रधानमंत्री साबित होंगे। हालांकि इस बारे में कोई भी निर्णय पार्टी को ही लेना है। उन्होंने इस पद के लिये मोदी और पार्टी के अन्य नेताओं के बीच किसी भी विवाद से इन्कार किया।

वित्तमंत्री एवं राष्ट्रपति पद के प्रबल दावेदार प्रणब मुखर्जी ने कहा है कि कांग्रेस नीत यूपीए शीर्ष पद के लिए अपने उम्मीदवार के नाम की जल्द घोषणा करेगी। उन्होंने मंत्रिमंडल की एक बैठक के बाद संवाददाताओं से कहा, कांग्रेस और यूपीए को राष्ट्रपति पद के लिए एक उम्मीदवार निर्धारित करना होगा। राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार कौन होगा, इस पर जल्द फैसला किया जाएगा।राष्ट्रपति पद की उम्मीदवारी को लेकर कांग्रेस ने ममता बनर्जी पर विश्वासघात का आरोप लगाया है और लेफ्ट से समर्थन जुटाने की कोशिश में बिमान बोस और बुद्धदेब भट्टाचार्य से संपर्क साधा है। सूत्रों के मुताबिक वित्तमंत्री और राष्ट्रपति पद की दौड़ में शामिल प्रणब मुखर्जी ने दोनों नेताओं से फोन पर बातचीत की है।ममता बनर्जी द्वारा प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का नाम राष्ट्रपति पद के लिए सुझाए जाने के बाद बृहस्पतिवार को शाम होते-होते देश के सर्वोच्च पद का चुनाव और दिलचस्प हो चला है। खबर है कि कांग्रेस द्वारा राष्ट्रपति पद के लिए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का नाम खारिज किए जाने के बाद टीएमसी नेता ममता बनर्जी आज शाम 6 बजे फिर से सपा नेता मुलायम सिंह से मुलाकात करेंगी।सोनिया गांधी की तरफ से राष्‍ट्रपति पद के उम्‍मीदवार के तौर पर प्रणब मुखर्जी और हामिद अंसारी का नाम पेश करने के बाद मुलायम और ममता ने कलाम, मनमोहन और सोमनाथ का नाम आगे कर दिया। इस पर कांग्रेस ने तृणमूल के खिलाफ हमला बोल दिया है। सूत्र यह भी बता रहे हैं कि कांग्रेस ने प्रणब की उम्‍मीदवार को अपनी इज्‍जत का सवाल बना लिया है और वह वित्‍त मंत्री को रायसीना हिल भेजने के लिए कोई भी जोखिम उठाने को तैयार है। कांग्रेस को राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव से भी साथ मिलता दिख रहा है। लालू ने सोनिया के उम्‍मीदवार को अपना पूरा समर्थन देने का वादा किया है। सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस और सपा के बीच पर्दे के पीछे बातचीत जारी है। मुलायम सिंह आज सोनिया गांधी से मिल सकते हैं। दूसरी ओर, कलाम की उम्‍मीदवारी को लेकर एनडीए में मतभेद के संकेत हैं। जद(यू) ने कलाम के नाम पर कोई भरोसा देने से इनकार किया है जबकि शिवसेना ने कलाम को समर्थन देने का वादा किया है। बीजेपी अभी इस बारे में आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं बोल रही है। पार्टी का कहना है कि कांग्रेस की ओर से उम्‍मीदवार के नाम का औपचारिक ऐलान होने के बाद ही वह अपनी राय और रणनीति सामने रखेगी। कलाम ने ममता-मुलायम को कहा है कि यदि उन्‍हें 60 फीसदी वोट मिलने की गारंटी मिले तो ही वह राष्‍ट्रपति चुनाव के मैदान में उतरेंगे।

सोनिया की पसंद को नापसंद करके ममता और मुलायम ने कांग्रेस के सामने मुश्किल खड़ी कर दी है। अब उसके सामने बड़ी समस्या है वोटों की। अगर कांग्रेस प्रणब के नाम पर अड़ती है, तो बिना ममता और मुलायम के वोटों का अंकगणित पूरा होता नहीं दिखता। ममता और मुलायम की इस गुगली के बाद कांग्रेस का राष्ट्रपति चुनाव का गणित बदल गया है। ममता और मुलायम की इस गुगली ने कांग्रेस के होश फाख्ता कर दिए हैं। सोनिया गांधी की पसंद को ममता और मुलायम ने सीधे तौर पर खारिज कर दिया। यही नहीं, पहली बार प्रधानमंत्री का नाम राष्ट्रपति पद की रेस में ला खड़ा किया गया। जाहिर है ऐसे में सवाल उठने लगा है कि अब कैसे बनेगा यूपीए की पसंद का राष्ट्रपति?

Facebook Comments

संबंधित खबरें:

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.