/स्वंतत्रता सेनानी का कांग्रेसी पुत्र वसूल रहा है उसके पिता के कार्यों की कीमत….?

स्वंतत्रता सेनानी का कांग्रेसी पुत्र वसूल रहा है उसके पिता के कार्यों की कीमत….?

स्वंतत्रता सेनानी रणवीर सिंह हुड्डा के पुत्र भूपेंद्र सिंह हुड्डा के शासन काल में हरियाणा के अधिकांश बाल आश्रय केन्द्र बाल यौन शोषण के अड्डे बन गए लगते हैं. क्या एक स्वतंत्रता सेनानी का कर्ज देश को इस तरह चुकाना होगा? यदि हरियाणा के मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा की रगों में एक देशभक्त का खून दौड रहा है तो उन्हें बेशर्मों की तरह अपनी कुर्सी से चिपके रहने की बजाय तुरंत इस्तीफा देना चाहिए. मगर इस देश का दुर्भाग्य है की ये राजनेता कभी अपनी जिम्मेदारी स्वीकार नहीं करते.

हरियाणा के मुख्यमंत्री के गृह जिले रोहतक स्थित ‘अपना घर’ में लड़कियों को टूथपाउडर के नाम पर दिया जाने वाला सफेद पाउडर नशा था जिसका इस्तेमाल लड़कियों के यौन उत्पीड़न के लिए किया जा रहा था। लड़कियों के गर्भवती हो जाने पर उनका जबरन गर्भपात तक कराया गया। यह खुलासे पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट द्वारा बनाई गई दो सदस्यीय जांच कमेटी की रिपोर्ट से हुआ है। अधिवक्ता अनिल मल्होत्रा और सुदीप्ति शर्मा की कमेटी ने ‘अपना घर’ एनजीओ में बच्चों पर हो रहे सोषण पर अपनी रिपोर्ट पेश की है। रिपोर्ट में कहा गया कि शेल्टर होम में रहने वाली लड़कियों को बड़े रसूखदार लोगों के सामने परोसा जा रहा था।

नग्न कर करवाया जाता था योगा

रिपोर्ट में कहा गया कि पीड़ित लड़कियों को लंबे समय तक नग्न रखा जाता था और उनकी इस बेबसी की तस्वीरें ली जाती थी। यही नहीं लड़कियों को इस हालत में योगा करने के लिए विवश किया जाता था। थोड़ी ज्यादा आयु वाली लड़कियों को रात के समय नाचने व अनैतिक गतिविधियों के लिए इस्तेमाल किया जा रहा था। पांच साल तक के बच्चों ने कमेटी से शिकायत की कि उन्हें मुख मैथुन के लिए विवश किया जाता है। यही नहीं छोटे बच्चों को मंदिरों में चोरी करने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा था और इसके लिए उन्हें गंजा करके रखा जाता था। एक लड़की मेडिकल रिपोर्ट में एचआईवी पीड़ित पाई गई।

पुलिस वाले होटल में ले जाकर यौन शौषण करते थे
‘अपना घर’ से यमुनानगर के छछरौली स्थित बाल कुंज पहुंचे 12 बच्चों ने कमेटी को बताया कि उन्हें रोहतक में शारीरिक व मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा था। उन्हें शराब पिलाकर न्यूड कर दिया जाता था। अपना घर चलाने वाली जसवंती उन्हें नौकर की तरह रखती थी। दो से तीन दिन तक खाना नहीं दिया जाता था। बड़ी आयु की लड़कियों की शिकायत थी कि उन्हें होटल के कमरों में ले जाया जाता था जहां पुलिस वाले उनसे संबंध बनाते थे।

करनाल, पानीपत में भी ऐसा ही
रिपोर्ट में बताया गया कि करनाल के नारी निकेतन में रहने वाली पांच लड़कियों ने कमेटी के समक्ष शारीरिक उत्पीड़न की शिकायत की। लड़कियों ने कहा कि उन्हें जबरन गोलियां खिलाकर उनका गर्भपात कराया गया। पानीपत स्थित मदर टेरेसा मिशनरी ऑफ चेरेटी में रहने वालों की हालत तो ऐसी थी कि वे अपनी शिकायत भी नहीं बता पाए। उन्हें देखकर अंदाजा लगाया जा सकता था कि बच्चे नशे की हालत में हैं। गुड़गांव स्थित शेल्टर होम में रहने वाली लड़कियों ने कमेटी के सदस्यों को बताया कि उन्हें सेक्स करने से पहले जबरन शराब पिलाई जाती थी। इसके बाद उनकी नग्न तस्वीरें ली जाती थीं।

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.