/दाऊद के भाई ने किया आत्मसमर्पण, पूरा परिवार आना चाहता है भारत..

दाऊद के भाई ने किया आत्मसमर्पण, पूरा परिवार आना चाहता है भारत..

खबर है कि कुख्यात आतंकवादी और अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहीम के छोटे भाई मुस्तकीम इब्राहीम कासकर ने दुबई में पुलिस के सामने समर्पण कर दिया है और उसने भारत लौटने की इच्छा जताई है. हालांकि इस खबर की आधिकारिक पुष्टि अब तक नहीं हो सकी है.

सूत्रों के मुताबिक दाऊद अपने घरवालों को एक-एक कर भारत भेजना चाहता है और यह समर्पण भी उसी योजना का हिस्सा है. इससे पहले भी दाऊद का एक अन्य भाई इकबाल कासकर दुबई के रास्ते भारत आ चुका है और अब उसके दूसरे भाई ने भी ऐसी ही इच्छा जताई है.

एक तरफ जहां किसी बड़े पुलिस अधिकारी ने इस गिरफ्तारी की पुष्टि नहीं की है वहीं दाऊद के पारिवारिक वकील राजेश श्रीवास्तव ने कहा कि, “मैंने उनके परिवार को बता दिया है कि मुस्तकीम कभी भी भारत आ सकता है, क्योंकि यहां उसके खिलाफ कोई भो आपराधिक केस दर्ज नहीं है. एक भारतीय होने के नाते यहां रहने का उसे पूरा अधिकार है.”

ऐसा माना जा रहा है कि आतंकवाद के खिलाफ जारी अमेरिकी लड़ाई और पकिस्तान पर बढ़ रहे दबाव के कारण दाऊद एक-एक कर अपने सगे सम्बन्धियों को सुरक्षित भारत वापस भेजना चाहता है. मुस्तकीम की गिरफ्तारी इसी प्लान का हिस्सा हो सकती है.

गौरतलब है कि 2005 में दाऊद के एक भाई इकबाल कासकर ने भी दुबई में ही सरेंडर किया था जिसके बाद वह भारत भेज दिया गया था. यहां उसे सारा-सहारा कॉम्प्लेक्स घोटाले में गिरफ्तार किया गया, लेकिन जल्द ही वह इस मामले से बरी हो गया.

हालांकि, अगर दाऊद भी भारत वापस आता है तो उसके खिलाफ मुक़दमे चलाना बेहद मुश्किल होगा, क्योंकि उसके खिलाफ ज्यादातर मामले बहुत पुराने हैं और उनके ज्यादातर गवाह या तो मर चुके हैं या लापता हैं. दाऊद को दो साल पहले हार्ट अटैक भी हो चुका है.

Facebook Comments

संबंधित खबरें:

  • संबंधित खबरें उपलब्ध नहीं

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.