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सेक्स के शौक़ीन ऐसे गुरुओं का क्या करें?

By   /  June 16, 2012  /  9 Comments

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-स्वामी बालेंदु

स्वामी नित्यानंद फिर गिरफ्तार हो गए हैं. पहले एक अभिनेत्री के साथ सेक्स के आरोप में जेल गए थे, जमानत मिल गई और अब पांच साल तक महाराज के शयन कक्ष की सेवा में रही अन्तरंग शिष्या ने पिछले पांच वर्षों से लगातार बलात्कार और यौन शोषण के आरोप लगाये हैं, एक अमेरिकी पुरुष भक्त ने अपने साथ हुए समलैंगिक यौन दुर्व्यवहार के आरोप भी लगाये हैं. इन महाराज को जो अपने आपको परमहंस कहते हैं सोने के सिंहासन पर बैठने और सोने के मोटे मोटे कंठे और मुकुट पहनने का और खूबसूरत जवान लड़कियां (शिष्याएं) रखने का बहुत तगड़ा शौक है. मैं जब 2009 में अमेरिका में था तब मैंने पहली बार इनका नाम सुना और इनके ही भक्तों के बीच में इनकी ऐसी तैसी करनी शुरू करी, Youtube पर अपने एक लेक्चर का वीडियो चढ़ाकर, ये बात इनके गिरफ्तार होने और सेक्स सीडी आने के पहले की है.
केवल एक नित्यानंद ही नहीं, एक और महाराज जो अपने आपको इच्छाधारी कहते थे, आज भी शायद जेल में ही हैं, सीधे सीधे चकलाघर चलाते थे और बड़े हाई रेट पर लड़कियों की सप्लाई करते थे. हमारे वृन्दावन के कृपालु महाराज जिन्होंने अरबों रुपये लगाकर यहाँ “प्रेम मन्दिर” बनवाया है, उनके ऊपर कई बार बलात्कार और अपनी महिला भक्तों से सेक्स के आरोप लग चुके तथा वो भारत और भारत के बाहर गिरफ्तार भी हो चुके हैं, पर अपने रसूख और पैसे के बल पर बाहर हैं और आज भी मजा ले रहे हैं. इन्हीं कृपालु महाराज के शिष्य स्वामी प्रकाशानंद भी अपने गुरु के नक्शेकदम पर चलते हुए अमेरिका की अदालत में नाबालिगों का यौन शोषण करने के कई अपराधों में दोषी पाए गए और बीस से भी जादा वर्षों की सजा सुनाई गई तो फरार हो गए और 2 साल से जादा होने को आ रहा है अभी तक पता नहीं चला और वो अमेरिका के मोस्ट वांटेड की सूची की शोभा बढ़ा रहे हैं. वो तो अमेरिका था तो सजा हो गई अपना इण्डिया होता तो ले दे कर छूट गए होते. इनके और भी कई शिष्य शिष्याएं देश विदेश में घूम घूम कर भक्तों का हर प्रकार से दोहन कर रहे हैं.
बैंगलौर के सत्य साईं बाबा जिनका पिछले साल ही शरीर पूरा हुआ और जिनके यहाँ हमारे देश के प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री भी हाजिरी लगाने जाते थे, उन्होंने हाथ की सफाई और जादू के खेल दिखाकर खूब भभूत निकाली और अमीरों के लिए सोना चांदी निकाला परन्तु BBC ने उनकी पोल एक डोक्युमेंट्री में खोली जिसमे कि उनके ऊपर एक अमेरिकन लड़के ने यौन शोषण के आरोप लगाये. वो डोक्युमेंट्री इंटरनेट पर उपलब्ध है और देखने लायक है. भारत में उनके राजनीतिक प्रभाव की वजह से और भी कई अपराधों के मामले पूरी तरह से दबा दिए गए.
कुछ साल पहले एक खबर आयी थी, जिसकी पुलिस में भी रिपोर्ट हुई व अख़बारों में भी निकला कि एक हमारे वृन्दावन के कथावाचक कलकत्ता में भागवत बांचने गए, सेठानी के साथ उनके अवैध सम्बन्ध थे, सेठ को तलाक लेना था तो उसने सबूत जुटाने के लिए फिल्म बना ली और उनको भागना पड़ा वहां से. कुछ समय पहले अखबार में खबर थी कि कितने ही आश्रमों में वेश्यावृत्ति का धंधा चलता है और पुलिस के छापों में कई महिलाएं पकड़ी गईं, धर्म और भक्ति की आड़ में देह का धंधा बहुत आसान है. इस प्रकार के कितने ही गंदे धंधों की खबर यहाँ के प्रसिद्ध अंग्रेजों के मन्दिर से सुनने में आती ही रहती हैं. देशी तो ठीक ही है, अब तो कितनी ही विदेशी महिलाओं की भक्तिपूर्ण वेश्यावृत्ति की खबर आम हो चुकी है और हो भी क्यों न, कितना आसान है विदेशियों के लिए यहाँ पैसा कमाना, क्यों कि नये धनपति भारतीय पुरुषों को विदेशी माल हमेशा से आकर्षित करता रहा है और यहाँ तो भक्ति के रंग में रंगा बहुत सस्ते में ही मिल जाता है. फंडा वही पुराना, डिमांड और सप्लाई का है.
जरा धर्म की नगरी हरिद्वार और ऋषीकेश के आश्रमों में जाकर देख लो, अथाह संपत्तियों के मालिक साधू, सन्यासी और गुरु लोग उनके लक्जरी ठाठ और महलों जैसी रिहायश और चेलियों की चहल पहल. अधिकतर आश्रमों और गुरुओं की निज सेवा में उनकी अन्तरंग महिला शिष्याएं रहती हैं. आश्रम में आने जाने वाले, रहने व काम करने वाले और गुरु जी के चेला जी, सभी जानते हैं कि इन महिलाओं और गुरुओं के क्या सम्बन्ध हैं, इस तरह की बातें अधिक समय तक छुपी नहीं रहतीं और आस पास वालों को तो मालुम पड़ ही जातीं हैं. परन्तु फिर भी कोई उनको पत्नियाँ या रखैल नहीं कहता और ये बाबा जी भी बड़े पाक साफ़ धर्म के धुरंधर अनुयायी बने रहते हैं. जब कभी कोई चेली किन्हीं कारणों से बिदक जाती है और महाराज की पोल खोलने लगती है, जैसा कि नित्यानंद के साथ हो रहा है तो बात जग जाहिर हो जाती है. मैं नाम तो किस किस का लूँ परन्तु चूंकि बचपन से इसी माहौल में रहा और पला बढ़ा हूँ, इसलिए मैंने बहुत से बड़े बड़े स्वयंभू शंकराचार्यों, तथाकथित महामंडलेश्वरों, साधू, सन्यासियों और कथावाचकों को अपनी आँखों से आपत्तिजनक अवस्था व व्यवहार करते देखा है. और उनके चेला सेवकों को भी ये सब बातें पता होतीं थीं, परन्तु महाराज के प्रभाव और पैसे की वजह से सब अधिकतर चुप ही रहते थे.
क्या आपको आश्चर्य नहीं होता कि जहाँ एक साधारण नौकरी पेशा या बिजनेस करने वाले व्यक्ति को कितनी मेहनत करनी पड़ती है दो पैसा कमाने और अपने बाल बच्चों की अच्छे ढंग से परवरिश करने और साधारण मकान बनाने के लिए परन्तु ये धर्म का धंधा करने वाले पंडित, पुजारी, साधू, सन्यासी, कथावाचक कितनी जल्दी इतना पैसा कमा लेते हैं और आलीशान महल खड़े कर लेते हैं. वो भी कम समय में धर्म और भगवान के नाम पर. कहाँ से आता है इतनी जल्दी और इतना पैसा इनके पास? नये जवान संतों और कथावाचकों को देखो, सेठानियों की भीड़ लगी रहती है इनके पास और वहीँ मैंने कितनी ही महिला संतों साध्वियों, कथावाचिकाओं को देखा है कि सेठ मेहरबान हैं उनके ऊपर और पैसों की कोई कमी नहीं है उनके पास. जरा देखो कि धार्मिक शानो शौकत के नाम पर कितना पैसा लुटाया जाता है इनकी कथाओं, प्रवचनों, जागरणों और भजनों के कार्यक्रम में. टीवी पर अपने कार्यक्रम चलवाते हैं ये लोग पैसा देकर कि भारत की धार्मिक जनता से और प्रोग्राम मिलें तथा और पैसा भी. बताओ मुझे क्या यही धर्म और गुरुओं का धंधा है?
जरा इन तथाकथित करोड़पति और अरबपति संत और सन्यासियों से पूछें कि क्या इन्हें सन्यासी की परिभाषा भी मालुम है ? प्रवचन और कथा करना तो धंधा है और विशेष तौर पर यदि हमारे यहाँ वृन्दावन में आकर देखें तो ये कुटीर उद्योग की तरह पनप चुका है, धर्म, शास्त्र, भगवान, कृपा और आशीर्वाद को बेचने का धंधा. आजकल के तथाकथित धार्मिक समझे जाने वाले बाबा और अरबपति सन्यासी, हंसी आती है इनको सन्यासी कहते परन्तु इन लोगों को शर्म नहीं आती यही लोग सबसे बड़े जिम्मेदार हैं चारित्रिक पतन का और इन्होंने समाज और देश को बहुत हानि पहुंचाई है.
निर्मल बाबा के केस को देखकर पता चल गया सबको कि भारत का मीडिया कितना बिकाऊ है और ये केवल एक निर्मल बाबा अकेला थोड़ी न है, कुमार स्वामी समेत जाने कितने ही टीवी में रोज आते हैं. मीडिया पैसा लेकर के कितने ही गुरुओं और गुरुआनियों की खबर संदेहास्पद बनाकर भी दिखा देता है जिससे उसका प्रचार भी हो जाता है और मीडिया के ऊपर दोष भी नहीं आता और पैसे भी मिल जाते हैं. अभी पिछले दिनों मैंने देखा स्टार TV पर एक तथाकथित महिला संत खूब मेकअप कर के भक्तों की गोद में संगीत की धुन पर लैपडांस भी कर रही थी और लोग जय जयकार कर रहे थे. क्या यही धर्म, संस्कृति और सभ्यता है?
मैंने तो यहाँ तक सुना है कि धार्मिक वेश्यावृत्ति भी अपना स्थान समाज में बना चुकी है, धर्म का चोला पहन कर और भगवान का नाम लेकर अपने भक्तों का बिस्तर भी गर्म किया जाता है और उनसे मोटी कमाई भी होती है. असल में ये भक्त लोग सेक्स की एकरसता से बोर हो गए हैं तो धर्म के आवरण में लपेटकर नयी फैंटेसी के साथ सेक्स का मजा लेते हैं. भगवान् की भक्ति और सेक्स की मस्ती एकसाथ डबल मजा. क्या फरक पड़ता है इन नव धनाढ्यों को कुछ पैसा इस तरह के गुरुओं और गुरुआनियों के ऊपर खर्च करके? नाइट क्लब में भी तो खर्च करते ही हैं. पिछले साल एक चकलाघर चलाने वाला इक्षाधारी संत पकड़ा ही गया था परन्तु कितने ही संत और संतनियों धंधा अभी भी चल ही रहा है. कहाँ जा रहा है हमारा समाज और नैतिकता? क्या यही है हमारा भारत महान?
मुझे एक सबसे बड़ा कष्ट तो ये होता है, कि जो सज्जन स्त्री पुरुष सच में शुद्ध और धार्मिक भाव से इन दुराचारी संत और साध्वियों के पास जाते हैं, उनके लिए भी ये भगवाधारी अच्छी भावनाएं नहीं रखते, और उनके अगल बगल के लोग, जो इन तथाकथित साधू सन्यासियों के दुश्चरित्र को जानते हैं, वो भी यही समझते हैं कि, ये लोग यहाँ गलत काम करने ही आये हैं, जबकि उनमें से बहुत से तो मासूम होते हैं और शुद्ध भावना से जाते हैं. क्या अब समय नहीं आ गया है कि हम इन धर्म के धंधेबाजों का बहिष्कार करें? इन मन्दिरों और आश्रमों में होने वाली लूट से खुद भी बचें और अपने बाल बच्चों को भी बचाएं? टीवी पर इन बेईमान धंधेबाजों के कार्यक्रमों को न देखें. धर्म के नाम पर आयोजित होने वाले कार्यक्रमों में अपना कीमती समय नष्ट न करें और खुद भी गन्दी नज़रों और लांछनों से बचें. अरे यदि आपको भगवान का भजन ही करना है तो अपने घर में बैठकर करो न, क्यों इन बाबाओं और गुरुआनियों के पीछे भागते हो और अपना समय तथा मेहनत से कमाया पैसा भी बर्बाद करते हो इन्हें देकर. कभी आपने सोचा कि आखिर भारत में साधू सन्यासियों और गुरुओं के पास बेशुमार संपत्ति क्यों है जबकि एक साधारण आदमी को पेट भरना भी मुश्किल है.
मैं तो धर्म की नगरी वृन्दावन में रहता हूँ जहाँ कि हर तरफ धर्म का ही व्यवसाय फलफूल रहा है. आप सोच ही सकते हो कि मेरी इन सब बातों को सुनकर पढ़कर ये संत महंत, गुरु और इनके दलाल लोग मेरे खून के प्यासे हैं. इनका वश चले तो आज मार दें मुझे. ऊपर लिखे सभी प्रसिद्ध साधू संतों और संस्थाओं के नाम पर मैं कई लेख लिख चुका हूँ और इनकी पोल खोल चुका हूँ. इसके परिणाम स्वरुप मैंने इनकी नाराजगी मोल ली और इन्होने मुझे कई प्रकार से लालच दिए, डराया धमकाया, झूठी बदनामियाँ की तथा कानूनी कार्यवाही करने की भी धमकी दी. पर मैं भी लगा रहा और लगा रहुंगा. मेरा किसी एक व्यक्ति या संस्था से कोई व्यक्तिगत विरोध या दुश्मनी नहीं है परन्तु इस प्रकार के धर्म और भगवान के नाम पर बने हुए भ्रष्ट तंत्र से है. चूंकि मैंने इन लोगों के नाम खुलकर लिखे और इनका विरोध किया इसलिए इन लोगों ने सभी तरह के हथकंडे अपनाए. ये लोग बहुत बड़े माफिया और अपराधी हैं, कल को यदि मुझे या मेरे परिवार के किसी व्यक्ति को कोई हानि पहुँचती है तो उसके जिम्मेदार यही लोग होंगे. मेरा तो चलो धर्म से मन ही खट्टा हो गया और मैं धार्मिक व्यक्ति नहीं रहा तथा ये समझता हूँ कि धर्म ने ही इन सब अपराधों के लिए साधन सुविधा उपलब्ध कराई है. परन्तु मैं तो उनसे भी हाथ जोड़कर अनुरोध करता हूँ जो कि धर्म को मानते हैं, और ये गन्दगी धर्म से दूर करना चाहते हैं. कृपया इन धर्म के धंधेबाजों के विरुद्ध प्रचार करें और इनका बहिष्कार करें.

(जयसियाराम.कॉम)

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About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक “मुखौटों के पीछे – असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष” में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

9 Comments

  1. Soye hue logo aapko jagna hoga.

  2. Hindustan me aise babao or Netao ki kami nahi he. Aise logo ka nash ya patan tabhi ho sakta he jab baki ke bache huye indian jo rahe he unko jagna hoga. union is strenth…

  3. wah! dharm k thekwdaro ko in kukrmiyo ki kartoot nhi dikhti. inka to ek hi ilaj hai sex ka sadhan hi hatwava diya jae. na rhega baas na bjegi bansuri.

  4. sab saalon ko jail mai daal do, ya 5 baar faansi ki saza do, taki bachne ka , koi chance na ho…

  5. Dr Shashikumar Hulkopkar says:

    If the precher or guru is only if religious & devoted to god he had hardly in desieres of matetrial effects of wealth/ women As it is seen in past such devotions holding gurus had realloy helped dram/ religion LIKE VIVEKANAND who had international recognitions of purity of his life, Swami Ramdas is the other example, under his Great SHIVAJI had respected CAPUTURED DAUGHTER IN-LAW OF KALAYAN SEBHDAR HAD GIVEN DUE HONER & RESPECT such devotions is now missing & day long we have news of SEX is media with guru

  6. Prin Silence says:

    इन बाबओ को तो पकड़ कर इनके शरीर से सारा रक्त निकाल कर कड़ी धूप मे भगा भगा कर जूते चप्पल से मारना चाहिए.
    ताकि सड़क पर चलने वाले हर इंसान को ये पता चल जाए की बाबाजी ने क्या किया है और अगर कोई और बाबा करेगा तो उससे भी इशी तरह से सड़क पर भगा-भगा कर इनाम दिया जायेगा.

  7. Miss Shiva Jain jia sayad enkoa miaria hiasab sea guarua kia pria bhasa hia eankoa nhia malua nhia hia.

  8. mahesh dhakad says:

    hamari parampara he kuch aishi hai ke bhagwan, dhram,karam, ye bachpan se hamain samjhaya jata hai…bhagwan our bhaye ko jod diya jaata hai…..aam adami bhaye se bachne ke liye bhagwan ke pass jaata hai…our ye baba log bhagwan ke agent bankar bhaktoo ka fayada uthate hai…jagrukta hamain apne ghar se shuru karni hoogi……………mahesh dhakad

  9. Sooraj Khatri says:

    Aap Janter Manter Delhi mien Ek din ka upwas aur Dharna in Dongi Babaon ke Khilaf ayojit Karen. Is Dharne mien Mukhya Mang rakhe ki 25 Lakh se jyada Sampati wale Babaon Ki Sampati Goverment dwara Jabt (Forfit) kar li jay. main apne sathiyon ke sath Shamil hoonga.

पाठक चाहे आलेखों से सहमत हों या असहमत, किसी भी लेख पर टिप्पणी करने को स्वतंत्र हैं. हम उन टिप्पणियों को बिना किसी भेद-भाव के निडरता से प्रकाशित भी करते हैं चाहे वह हमारी आलोचना ही क्यों न हो. आपसे अनुरोध है कि टिप्पणियों की भाषा संयत एवं शालीन रखें - मॉडरेटर

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