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निर्मल बाबा, ये हथकडी क्यों आपकी तरफ आ रही है?

लगता है कि निर्मलजीत नरूला उर्फ निर्मल बाबा पर सभी शक्तियों की किरपा समाप्त हो गयी है. जिसके चलते मध्य प्रदेश की एक अदालत में निर्मल बाबा की अग्रिम जमानत याचिका खारिज हो जाने से निर्मल बाबा के जेल जाने का रास्ता साफ हो गया है.

दरअसल मध्य प्रदेश में सागर जिला के बीना के रहने वाले सुरेन्द्र विश्वकर्मा ने बीना की एक अदालत में निर्मल बाबा के खिलाफ एक मुकद्दमा दायर किया था और आरोप लगाया था कि उसने टीवी पर निर्मल बाबा का समागम देखा जिसमें वे सभी टी वी दर्शकों को कह रहे थे कि काला पर्स रखो, जिसे किरपा आएगी और धन सम्पति की बढ़ोतरी होगी. इस पर मैं उनके बहकावे में आ गया और काला पर्स खरीद कर उसमें पैसे रखने लगा. एक दिन मेरे पर्स में दो हज़ार रुपये रखे थे और मेरी जेब से वह पर्स पता नहीं कहाँ गिर गया. पर्स के साथ मेरे मेरे दो हज़ार रुपये भी खो गए. मेरे लिए यह रुपये बहुत महत्वपूर्ण थे. निर्मल बाबा की सलाह मुझ पर भारी पड़ गयी और मुझे उनकी सलाह मानने से फायदा होने के बजाय नुकसान हो गया.

बीना की अदालत ने इस मामले पर बीते दो जून को एक्शन लेते हुए गिरफ्तारी वारंट जारी कर दिया और निर्मल बाबा को 25 जून को अदालत में हाजिर होने के आदेश दिए. इसी के बाद निर्मल बाबा ने अपने वकीलों के जरिये अदालत में अग्रिम जमानत लेने के लिए याचिका दायर की थी जिसे अदालत ने यह कहते हुए ख़ारिज कर दिया कि “निर्मल बाबा पूरे जनमानस को भ्रमित कर रहे थे. ऐसे में निर्मल बाबा को अग्रिम जमानत देना उचित नहीं होगा.”

निर्मलजीत नरूला उर्फ निर्मल बाबा के खिलाफ चार सौ बीसी सहित कई धाराओं में दर्ज इस मामले में अब उच्च न्यायालय जाने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा है और यदि निर्मल बाबा को वहाँ भी कोई राहत नहीं मिली तो उनके पास जेल जाने के सिवाय कोई विकल्प नहीं होगा.

गौरतलब है कि सबसे पहले मीडिया दरबार ने ही इस ढोंगी की पोल खोली थी और एक पाठक की मदद से निर्मल बाबा का पूरा इतिहास खोज निकाला था. इस पर निर्मलजीत नरूला उर्फ निर्मल बाबा ने मीडिया दरबार को अपने वकीलों के जरिये कानूनी नोटिस भेज कर डराने का प्रयास किया था. मगर हमने डरने के बजाय निर्मलजीत नरूला के ढोंग के खिलाफ जबरदस्त मुहिम चला दी. जिसे फेसबुक पर भी अच्छा खासा समर्थन मिला. इसके बाद पूरा थर्ड मीडिया भी मीडिया दरबार के अभियान से जुड गया और कुछ टीवी चैनलों को भी मजबूरीवश निर्मल विरोध में उतरना पड़ा और मीडिया दरबार कि मुहिम का नतीजा है कि देश भर के कई शहरों में निर्मलजीत नरूला उर्फ निर्मल बाबा के खिलाफ मामले दर्ज होने लगे और इस ठग की असली जगह अब कुछ क़दमों की दूरी पर रह गयी है.

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.