/हुड्डा परिवार भी अपराधी है “अपना घर” बनाम “बलात्कार घर” कांड में?

हुड्डा परिवार भी अपराधी है “अपना घर” बनाम “बलात्कार घर” कांड में?

हरियाणा के रोहतक में संरक्षण गृह ‘अपना घर’ में जो कुछ हुआ, और जो कुछ पता चल रहा है उससे स्पष्ट होता जा रहा है कि इस पूरे कांड का असली नेता, असली सरगना मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा है. हुड्डा की पत्नी ने अपना घर की संरक्षिका को कई बार सम्मानित कराया था. हुड्डा खानदान से करीबी ताल्लुकात रखने वाली अपना घर संरक्षिका जो कुछ कर रही थी, जाहिर है उसमें आकाओं के दिशानिर्देश शामिल होंगे. मामले की भले ही सीबीआई जांच हो रही हो लेकिन जब तक हुड्डा सीएम पद पर बने रहेंगे, इस मामले की जांच निष्पक्ष नहीं हो सकती. अपना घर का पूरा प्रकरण क्या है और क्या क्या हुआ, जानने के लिए विभिन्न अखबारों-साइटों पर छपी रिपोर्टों का अध्ययन किया जा सकता है. नीचे उन रिपोर्ट्स को कंपाइल करके दिया जा रहा है ताकि आप असलियत जान सकें.   -यशवंत सिंह

‘अपना घर’ में छड़ी से जबरन कराया जाता था गर्भपात!

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संरक्षण गृह ‘अपना घर’ में जिस तरह का बर्ताव वहां रहने वाली लड़कियों के साथ किया गया, उसे सुनकर तो जानवर का दिल भी पसीज जाए, पर शायद इंसान की इंसानियत इतनी मर चुकी है कि मासूम लड़कियों पर अत्याचार करते हुए उन्होंने इंसानियत की सारी हदें पार कर दीं। पीडित लड़कियों ने अदालत द्वारा गठित कमेटी को दिए बयानों मे उनके साथ हुई अमानवीय कृत्यों की जो क्रूर दास्तान दुनिया के सामने लाकर रख दी है, उसे सुनकर सभ्य समाज शर्मसार हो जाएगा। रोहतक जिले की श्रीनगर कालोनी में संरक्षण गृह ‘अपना घर’ में रह रही लड़कियों द्वारा यौन उत्पीडऩ का विरोध करने पर उन्हें निर्वस्त्र कर छत के पंखे से उलटा लटका दिया जाता था। इन दरिंदों ने मूक-बधिर और विक्षिप्त लड़कियों को भी अपनी हवस का शिकार बना डाला था। एक मूक-बधिर और एक विक्षिप्त लड़की के गर्भवती होने पर इन नरपिशाचों ने दरिंदगी की सभी हदें पार करते हुए दोनों लड़कियों के संवेदनशील अंगों में लकड़ी आदि घुसेड़कर जबरन गर्भपात कराया था। यहां रहने वाले बच्चों और लड़कियों का न केवल यौन शोषण किया जाता था, बल्कि यहां से उन्हें बाहर पार्टियों आदि में भी देह व्यापार के लिए भेजा जाता था।

जसवंती अपनी पुत्री के साथ पुलिस हिरासत में

इनमें सरकारी अधिकारियों की पार्टियां भी शामिल थीं। एनजीओ मालकिन जसवंती का दामाद इन लड़कियों के साथ जब-तब दुष्कर्म करता रहता था। कमेटी की रिपोर्ट में इस बात का भी खुलासा किया गया है कि यहां से कई विदेशी ग्राहकों को भी मासूम लड़कियां उपलब्ध कराई जाती थीं। विदेशी यहां फिल्म बनाने के लिए आते थे। बच्चों से कहा जाता था कि अंकल तुम्हें प्यार करेंगे। ज्ञात हो कि भारत विकास संघ द्वारा संचालित अपना घर संरक्षण गृह में 9 मई 2012 को शिकायत मिलने के बाद राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने छापा मारकर 10 से 15 साल के बीच की 94 लड़कियों को सुरक्षा में लिया था, जिनके साथ तरह-तरह के अमानवीय कृत्य किए जाते थे।

इन बच्चियों को निर्वस्त्र करके उनका वीडियो भी तैयार किया जाता था। इस पूरे घटनाक्रम में पुलिसवालों के शामिल होने के बारे में भी जाच चल रही है। एक लड़की के एचआइवी संक्रमित होने के बारे में भी कोर्ट द्वारा गठित कमेटी ने बताया है। लड़कियों ने बताया कि वे अगर यौन उत्पीडऩ का विरोध करती थीं तो उन्हें निर्वस्त्र कर छत के पंखे से उलटा लटकाया जाता था। कमेटी ने रिपोर्ट में बताया कि बोलने और सुनने में अक्षम एक लड़की और मानसिक रूप से बीमार एक दूसरी लड़की के गर्भवती हो जाने पर वीभत्स तरीके से उसका गर्भपात कराया गया। हरियाणा पुलिस पर गंभीर आरोप है कि वह इन सब में मदद करने के साथ ही संरक्षण गृह का नियमित दौरा कर लड़कियों के साथ यौन अत्याचार करती रही।

मनाने गए थे पिकनिक लेकिन बन गई ब्लू फिल्म!

बच्चों के यौन उत्पीड़न को लेकर बीते एक महीने से चर्चा में रहे हरियाणा के रोहतक के शेल्टर होम ‘अपना घर’ के बारे में एक और शर्मसार कर देने वाली सच्चाई सामने आई है। बच्चियों और महिलाओं के लिए चलाये जा रहे इस ‘अपना घर’ की महिलाओं को पिकनिक के बहाने चंडीगढ़ और हरिद्वार ले जाया जाता था और वहां होटलों में उनकी जबरन ब्लू फिल्म बनाई जाती थी। 5 से 10 साल तक के बच्चों से जबरन ओरल सेक्स और न्यूड योगा करवाया जाता था| नाबालिग छोटी-छोटी बच्चियों को विदेशी और दूसरे ग्राहकों के सामने परोसा जाता था। हैरानी वाली बात यह है कि इन लड़कियों के साथ बलात्कार करने वाले कोई और नहीं बल्कि आम जनता की सुरक्षा में तैनात पुलिसवाले होते थे| इस बात की जानकारी हाईकोर्ट द्वारा गठित जांच कमेटी की ओर से पेश की गई रिपोर्ट में दी गई है|

अनाथों और बेसहारा बच्चों के लिए बने इस ‘अपना घर’ के बारे में लगातार हो रहे खुलासे से ऐसा लग रहा है जैसे यहाँ दरिंदगी की सारी हदें ही टूट गई थी| मानवता को शर्मसार करने वाला यह कड़वा सच पढ़कर शायद आपके दिल में इंसानियत के प्रति नफरत पैदा होने लगे। ‘अपना घर’ की पीड़ित महिलाओं ने हाईकोर्ट द्वारा गठित कमेटी को बताया कि वहां उनका न सिर्फ यौन शोषण किया गया है बल्कि उनकी ब्लू फिल्में भी बनी हैं। पिकनिक के बहाने उन्हें चंडीगढ़ लाकर दो होटलों में ठहराया गया था। होटलों के स्वीमिंग पूल में नहाने को मजबूर किया गया और उनके साथ अश्लील हरकतें करते हुए वीडियो फिल्में बनाई गईं। शूटिंग के दौरान जबरन उनके कपड़े उतरवाए गए। महिलाओं ने बताया कि सिर्फ चंडीगढ़ ही नहीं बल्कि हरिद्वार के एक होटल में भी इसी तरह उनकी ब्लू फिल्म शूट की गई|

आपको बता दें, ‘अपना घर’ में लड़कियों को लंबे समय तक नग्न रखा जाता था फिर उनसे योग कराया जाता और उनकी तस्वीरें खींची जाती थीं। उम्र में थोड़ी बड़ी बच्चियों को नचाने और शारीरिक संबंध बनाने के लिए भी मजबूर किया जाता था।ज्यादातर लड़कियों को शादी के लिए मजबूर कर शारीरिक संबंध बनाने के लिए विवश किया जाता था। यही नहीं छोटे बच्चों को मंदिरों में चोरी करने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा था और इसके लिए उन्हें गंजा करके रखा जाता था। इन बच्चों को कंस्ट्रक्शन साइट पर मजदूरी भी कराई जाती थी।

‘अपना घर’ की संचालिका ‘जसवंती नरवाल’ बच्चों के साथ नौकरों जैसा व्यवहार करती थी। दो से तीन दिन तक यहाँ खाना नहीं दिया जाता था। बड़ी आयु की लड़कियों को जबरन होटलों में ले जाया जाता था जहां पुलिस वाले उनसे संबंध बनाते थे। जसवंती देवी का दामाद जय भगवान और ड्राइवर सतीश बच्चियों को ओरल सेक्स के लिए मजबूर करते थे। बच्चों को होली जैसे त्योहारों पर शराब पिलाई जाती थी| सतीश और जय भगवान बच्चों के प्राइवेट पार्ट्स पर रंग लगाते थे। सिर्फ यही नहीं यहाँ लड़कियों को टूथपाउडर के नाम पर दिया जाने वाला सफेद पाउडर नशा था जिसका इस्तेमाल लड़कियों के यौन उत्पीड़न के लिए किया जा रहा था।

अपना दुखडा सुनाती अपना घर की पीड़ित बालिकायें

इस मामले की जाँच कर रही कमेटी ने पीड़ित महिलाओं के बयानों को हाईकोर्ट के समक्ष रखा है। वहीँ, सीबीआई जांच की सिफारिश होते ही सीबीआई ने अनाधिकारिक तौर पर ‘अपना घर’ की महिलाओं और बच्चों के साथ हुए यौन शोषण के तथ्य जुटाने शुरू कर दिए हैं। इस मामले में सीबीआई ने चंडीगढ़ के उस होटल की भी पहचान कर ली है, जहां पीड़ित महिलाओं की ब्लू फिल्म बनाई गई थी। कयास लगाये जा रहे हैं कि सीबीआई किसी भी समय पीड़ित महिलाओं को चंडीगढ़ लाकर इस होटल की पहचान करा सकती है।

इसके साथ ही सीबीआई उन लोगों पर भी अपनी कड़ी नजर रखे हुए है जिन पर इस होटल में ब्लू फिल्म बना रहे लोगों को हेरोइन उपलब्ध करवाने के आरोप है। इस मामले में जल्द ही गिरफ्तारियां हो सकती हैं। वहीँ, हरियाणा की एक जांच एजेंसी ने चंडीगढ़ के चार होटलों और डेराबस्सी के एक रिसार्ट से सीसीटीवी फुटेज प्राप्त कर लिए हैं। इस फुटेज की जांच की जा रही है जिससे पीड़ित महिलाओं के बयानों की पुष्टि हो सके।

बच्‍चों से कराते थे ओरल सेक्‍स और न्यूड योग!

चंडीगढ़। हवस और हैवानियत जैसे इंसानी फितरत बन गयी है, और इसी फितरत ने हैवानियत का ऐसा चेहरा पेश किया है जिसको सुनकर अपने कान पर ही भरोसा नहीं होगा। आपको यकीन नहीं होगी कि आज की लड़कियों की नंगी मंडी लगाकर उनसे योगा कराया जाता था। बच्‍चों के यौन उत्‍पीड़ने से चर्चा में चल रहे ‘अपना घर’ से एक और सनसनीखेज खुलासा सामने आया है। मानवता को शर्मसार करने वाला यह कड़वा सच पढ़कर शायद आपके दिल में इंसानियत के प्रति नफरत पैदा होने लगे। आपको बता दे कि ‘अपना घर’ में 5 से 10 साल तक के बच्‍चों से जबरन सेक्‍स करवाया जाता था। बच्‍चों को नंगा करके योगा कराया जाता था, लेकिन योगा कम यौन शोषण ज्‍यादा होता था। लगातार बढ़ते शोषण से अब वहां एड्स जैसी जानलेवा बीमारी भी घर करने लगी थी। इसी होम की एक बच्‍ची एड्स पीडित पायी गयी। हाईकोर्ट में पेश एक रिपोर्ट के द्वारा ये सब बताया गया है।

बुधवार को दो एडवोकेट अनिल मल्‍होत्रा और सुदीप्ति शर्मा की कमिटी ने यह रिपोर्ट कोर्ट के सामने पेश की थी। मामला सामने आने पर इसकी जांच के लिए एक कमेटी बनाई गयी थी। इस कमेटी की रिपोर्ट में बहुत ही चौकाने वाला और इस उभरते समाज का शायद सबसे बुरा चेहरा सामने आया है। जिस तरह के शोषण की कल्पना करने मात्र से लोगों की रूह काँप जाये वैसा शोषण वहां किया जाता था। छोटे बच्‍चों को एक-दूसरे के साथ सेक्‍स करवाया जाता था। बच्‍चों के साथ ओरल सेक्‍स किया जाता रहा। पांच से दस साल के बच्‍चों के साथ मुखमैथुन तक किया जाता था। इस अनाथालय में 101 बच्‍चे थे, अधिकत्‍तर समय उनको नंगा ही रखा जाता था। हर उम्र की लड़कियों को किसी के भी सामने नंगा करा दिया जाता था।

उस होम में रहने वाली लगभग सारी लड़कियों को पुरूषों के सामने परोसा जाता था। मना करने पर कड़ी सजा दी जाती थी, कई दिनों तक उनको नंगा रखा जाता था। उसके बाद भी जब कोई लड़की मना करती थी तो उसको शादी का हवाला दिया जाता है। फिर शारीरिक संबंध बनाने के लिए मजबूर किया जाता था। रिपोर्ट में पाया गया कि अपना घर से दूसरी जगह भेजी गयी एक लड़की एचआईवी पॉजिटिव पाई गई है। मासूम बच्‍चों के साथ भी यौन शोषण किया जाता था। अप्राकृतिक सेक्‍स तक किया जाता था। उनकी तस्‍वीरें और वीडियों बनाए जाते थे। बच्‍चों को मंजन के पावडर में नशीला पदार्थ मिलाकर या साफ्ट ड्रिंक में मिलाकर पिलाया जाता था। कई बार तो उन्‍हें जबरन शराब पिलायी जाती थी और उसके बाद उनके साथ कई लोग मिलकर बलात्‍कार करते थे। बच्‍चों के प्राइवेट अंग को रंग दिया जाता था। कमेटी ने कोर्ट से मांग की है कि इस मामले कि जाँच पुलिस के बजाय सीबीआई जैसी स्‍वतंत्र एजेंसी को सौप दी जाए।

रसूखदारों के नाम आने से सुस्त पड़ गई पुलिस

चंडीगढ़. रोहतक के बहुचर्चित अपना घर प्रकरण में हरियाणा के रसूखदारों के नाम सामने आने के बाद पुलिस सुस्त पड़ गई है। सीबीआई इस मामले की कितनी परतें उधेड़ेगी यह चंद दिनों बाद साफ होगा। मामले से जुड़ी असली जानकारी राज्य के आला अधिकारियों को दे दी गई है, लेकिन पुलिस इस बारे में कोई भी खुलासा करने से बच रही है। सूत्रों के मुताबिक राज्य के एक

जसवंती को सम्मानित करती हरियाणा के मुख्यमंत्री की पत्नी आशा हुड्डा

सफेदपोश के करीबी रिश्तेदार इस प्रकरण में शामिल हैं। अपना घर को विभिन्न गतिविधियों में पुरस्कार दिलवाने में भी इन रिश्तेदारों का अहम रोल होता था। मामले से जुड़े आरोपियों ने हरियाणा में कुछ स्थानों पर जमीनें भी ली थी। राज्य के नामी अपराधियों का भी यहां पर आना जाना था।

सोमवार दोपहर चंडीगढ़ से इंस्पेक्टर लखविंदर के नेतृत्व में एसआईटी की चार सदस्यीय टीम रोहतक पहुंची। सबसे पहले गोहाना रोड स्थित लखीराम अनाथालय में अपना घर से भेजे गए किशोर आबताब, प्रिंस, नदीम व राहुल के बयान दर्ज किए। उधर, एसआईटी की दूसरी टीम ने डीएसपी धारणा यादव के साथ जन सेवा संस्थान के महिला आश्रम में पहुंच कर वहां रह रही लड़कियों के बयान दर्ज किए। जांच के संबंध में टीम ने कुछ बताने से मना कर दिया।

शाम को एसआईटी के अधिकारियों की दिल्ली बाईपास स्थित सर्किट हाउस में एक घंटे तक बैठक हुई। हाईकोर्ट के आदेश पर महिला और बच्चों की मेडिकल सोमवार से शुरू हो गई। एसआईटी अपना घर की रामावती और मुन्नी सहित तीन लड़कियों को लेकर पीजीआई पहुंची। अपना घर की सभी महिला और बच्चों के अलग अलग समूह बनाए गए हैं। एक समूह में तीन या चार महिला और बच्चों को रखा गया है। पैनल रोजाना समूह में शामिल सदस्यों की जांच करेगा।

अपना घर यौन उत्‍पीड़न मामले की सीबीआई जांच

चंडीगढ़। हरियाणा सरकार ने रोहतक के अपना घर में बाल उत्पीडऩ व यौन शोषण मामले की केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) से जांच कराने का फैसला किया है। विदित रहे कि हाई कोर्ट द्वारा गठित जांच कमेटी ने भी अपनी रिपोर्ट में मामले की सीबीआई जांच कराए जाने की जरूरत बताई है। उधर, पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने सभी 103 पीडि़तों का मेडिकल कराने का आदेश दिया है। यह जांच रोहतक पीजीआइ में ही कराई जाएगी। इस बीच, रोहतक की अदालत ने जसवंती समेत सभी आरोपियों की न्यायिक हिरासत 29 जून तक बढ़ा दी है। शुक्रवार सुबह जारी विज्ञप्ति में कहा गया है कि सरकार अपना घर में रह रहे बच्चों के प्रति बहुत चिंतित है। इसलिए मामले की जांच का कार्य सीबीआइ को सौंपने का निर्णय लिया है।

उधर, हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान जस्टिस एनके सांघी एवं जस्टिस इंद्रजीत वालिया की खंडपीठ ने पीडि़तों का मेडिकल चंडीगढ़ पीजाआइ में कराए जाने की मांग खारिज कर रोहतक पीजीआई में कराए जाने का आदेश दिया है। इस मामले की जांच के लिए गठित एसआइटी के अध्यक्ष एडीजीपी (गृह एवं कानून) महिंद्र सिंह मान ने हाईकोर्ट को 6 जून से अब तक की कार्रवाई की रिपोर्ट पेश की। मान ने साफ किया कि राज्य सरकार मामले की सीबीआइ से जांच कराने को तैयार है। खंडपीठ ने सभी बच्चियों और बच्चों की सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने के साथ ही सभी पीडि़तों का एचआइवी टेस्ट कराने का निर्देश दिया। 103 पीडि़तों में से दो बच्चे अपने घर लौट चुके हैं। खंडपीठ ने कहा कि अगर अन्य पीडि़त बच्चे व लड़कियां अपने घर लौटना चाहती हैं तो उनके लिए कोई पाबंदी नहीं है।

अपना नहीं था ‘अपना घर’, पिंजरे में कैद थी लड़कियां

हवस और हैवानियत इंसानी फितरत का यह एक ऐसा काला पन्ना है जिस पर लिखी इबारत हर पल करिश्माई अंदाज में बदलती है। कभी बर्बादी की शक्ल में तो कभी खून के छींटों में, कभी बेशर्मी में तो कभी अश्कों और आंहों में। अब इसी इंसानी फितरत ने हैवानियत की एक ऐसी तस्वीर दिखाई है जो ना मालूम कब से एक पिंजरे में कैद थी। हम बात कर रहे हैं आजाद हिंदूस्‍तान के सबसे खौफनाक अनाथालय और आजाद हिंदूस्‍तान की सबसे बदनसीब लड़कियों की। जी हां हरियाणा के रोहतक स्थित भारत विकास संघ नामक एक एनजीओ द्वारा संचालित ‘अपना घर’ की, जहां लड़कियों को जिस्‍मफरोशी में जबरन धकेला जाता था।

इस अनाथालय में लड़कियों के साथ जो अनर्थ हुआ उसे देख और सुनकर आपको अपने ही कान पर यकीन नहीं होगा कि आज के दौर में भी लड़कियों को इस कदर नोचा, खसोटा और लूटा जा सकता है। आपको यकीन नहीं होगा कि आज भी लड़कियों की मंडी लगाकर उनकी परेड करायी जाती है। मगर शेल्‍टर होम ‘अपना घर’ में ऐसा ही होता था। इस अनाथालय में रहने वाली लड़कियों को रसूखदारों और अफसरों की पार्टियों में परोसा जाता था। जो लड़कियां ऐसा करने से इंकार करती थीं उनके पास एक ही रास्‍ता हुआ करता था या तो वो मार खाएं या फिर मर जायें।

ऐसा हुआ भी था, अपना घर संचालिका जसवंती उर्फ बड़ी मैडम की यातनाओं से तंग आकर एक लड़की ने तीन मंजीले से छलांग लगा दी थी। अपना घर में रहने वाली लड़कियों को कभी विदेशियों के सामने चीर हरण के लिये पेश किया जाता था तो कभी उन्‍हें नंगा कर उनकी ब्‍लू फिल्‍म बनाई जाती थी। ये सब ऐसे ही चलता रहता मगर एक दिन यह सच्‍चाई अचानक बाहर आ गई। सच्‍चाई के बाहर आने के बाद सरकार से लेकर सत्‍ता तक और अफसर से लेकर मंत्री तक में कोहराम मच गया। अनाथालय से बेसहारा लड़कियों को जो चींख निकलीं उसने पूरे देश को हिला कर रख दिया। जांच के आदेश दिये गये और अपना घर को सील कर दिया गया है।

जब इस अनाथालय को खोला गया था तो उसका नाम “अपना घर” रखा गया। यह नाम इसलिए रखा गया था कि यहां रहने वाली बेस‍हारा और बेबस लड़कियों को यह अपने घर जैसा लगे। मगर ऊंची इमारतों में रहने वाले घर का मतलब नहीं जानते और उन्‍होंने घर की इज्‍जत को ही तार-तार कर दिया। जहां बेसहारा लड़कियों को जिंदगी का सहारा मिलना चाहिए था, वहां उनके साथ घिनौने खेल खेले गये। जहां उनकी जिंदगी संवरने वाली थी, वहां उन्‍हें अय्याशी का सामान बना दिया गया। खैर इस अनाथालय में बेसहारों पर जो जुर्म हुआ उसे शब्‍दों में लिख पाना संभव नहीं है मगर यह जरुर कहा जा सकता है कि इस चीर हरण और दरिंदगी की वारदात सुन दुर्योधन और दुशासन भी शर्मा जायें। फिलहाल केन्द्रीय महिला व बाल विकास मंत्री कृष्णा तीरथ ने कड़ा कदम उठाया है। उन्होंने इस बारे में हरियाणा के सीएम भूपेंदर सिंह हुड्डा को खत लिखा है और इस मामले में सख्त कदम उठाने की मांग की है। तीरथ ने इस मामले में एक जांच कमेटी भी बनाई है, जो जांच करके अपनी रिपोर्ट मंत्रालय को सौंपेंगी।

‘अपना घर’ में पुलिस करती थी बलात्‍कार, विदेशी बनाते थे ब्‍लू फिल्‍म

रोहतक। हरियाणा के रोहतक स्थित शेल्टर होम ‘अपना घर’ में रहने वाली लड़कियों ने बेहद सनसनीखेज खुलासा किया है। लड़कियों ने आरोप लगाया है कि यहां विदेशी लोग आते थे और उनकी न्‍यूड वीडियो बनाते थे। इतना ही नहीं इसके अलावा जो आरोप लगे हैं और भी संगीन हैं। लड़कियों ने आरोप लगाया है कि इस काली कारतूत की जानकारी न सिर्फ पुलिस को थी बल्कि पुलिस वाले खुद लड़कियों के साथ बलात्‍कार करते थे। फिलहाल इस थर्रा के रख देने वाली वारदात की जांच के लिये एक टीम गठित की गई है और उच्‍च स्‍तरीय जांच के आदेश दे दिये गये हैं। हालांकि रोहतक के डीएसपी का कहना है कि इस मामले में आगे कार्रवाई करने से पहले पक्‍के सबूत की जरूरत होगी।

मालूम हो कि इस पूरे मामले का भंडाफोड़ 9 मई को हुआ था। इसी दिन इस शेल्टर होम की 3 लड़कियां यहां से भागकर दिल्ली में राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग के सामने पहुंचीं। और उसके बाद आयोग ने छापामार कर यहां से 90 लड़कियों को मुक्‍त कराया था और शारीरिक शोषण जैसे घिनौने अपराध का खुलासा हुआ था। जिन लड़कियों को मुक्‍त कराया गया उनमें अधिकतर की उम्र 10 से 15 साल थी। लड़कियों ने राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग और जांच टीम को बताया कि मुंबई और दिल्‍ली से आने वाले विदेशी उन्‍हें अच्‍छा खाना और कपड़े का लालच देकर उनकी नंगी वीडियो बनाते थे। लड़कियों ने बताया कि शेल्‍टर होम की संचालिका जसवंती के दामाद जय भगवान लड़कियों को विदेशियों के आने से पहले सूचित करता था। विदेशी मेहमानों की यहां खूब आवभगत होती थी। जांच टीम का कहना है कि ये खुलासे बेहद चौंकाने वाले हैं। जांच रिपोर्ट कोर्ट के सामने पेश किए जाने के बाद ही पूरे मामले से पर्दा हटाया जा सकेगा। यदि मामले की जांच हरियाणा से बाहर की किसी स्‍वतंत्र एजेंसी से कराई जाती तो पीडितों को न्‍याय मिलने की ज्‍यादा गुंजाइश है।

भारत विकास संघ नामक एक एनजीओ द्वारा संचालित ‘अपना घर’ में यौन शोषण की खबरें सामने आने के बाद पूरे सूबे में हड़कंप मचा हुआ है। आरोप है कि यहां रहने वाली लड़कियों को चं‍डीगढ़ में आला अधिकारियों के यहां होने वाली आलीशान बर्थडे पार्टियों में ले जाया जाता रहा है। लड़कियों का कहना है कि संरक्षण गृह के दौरे पर आने वाले अधिकारियों के सामने वो अपना दुखड़ा रोती थीं लेकिन कोई असर नहीं पड़ा। आरोप यह भी है कि पुलिसकर्मी भी इन लड़कियों के साथ बलात्‍कार करते थे और मना करने पर उन्‍हें नंगा कर पीटते थे।

आश्रय घरों में सालों से हो रहा था यौन शोषण

चंडीगढ़। हरियाणा में बच्चों व लड़कियों की सुरक्षा के लिए बनाए गए आश्रय घरों में कई सालों से घिनौना खेल खेला जा रहा था। राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) को इन आश्रय घरों में बच्चों व लड़कियों के यौन शोषण की कई बार शिकायतें मिलीं। राज्य के महिला एवं बाल विकास विभाग को कई बार चेताया भी गया, लेकिन किसी ने मासूम बच्चों और लड़कियों के शोषण की शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया।

प्रदेश सरकार ने रोहतक के अपना घर व यमुनानगर के बालकुंज में यौन शोषण की शिकायतें उजागर होने के बाद हालांकि प्रत्येक आश्रय स्थल में बच्चों की स्वास्थ्य जांच तथा स्वैच्छिक संगठनों के पंजीकरण का आदेश जारी किया है, लेकिन इस तरह की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस कार्य योजना का अभी तक कोई खुलासा नहीं किया है। हाई कोर्ट में बुधवार को पेश की गई रिपोर्ट के बाद जांच कमेटी तथा पुलिस महानिदेशक द्वारा गठित विशेष जांच दल भी आमने-सामने हो गए हैं। हाई कोर्ट की दो सदस्यीय कमेटी में शामिल अनिल मल्होत्रा तथा सुदीप्ति शर्मा ने पुलिस द्वारा गठित विशेष जांच दल के औचित्य पर ही सवाल खड़े कर राज्य सरकार को नए सिर से कार्य योजना बनाने के लिए मजबूर कर दिया है।

पुलिसकर्मी संदेह के घेरे में

हाई कोर्ट की जांच कमेटी की दलील है कि राज्य के जिन 12 आश्रय स्थलों में 100 से अधिक बच्चों व लड़कियों से बात की गई है, उनमें से अधिकतर ने पुलिसकर्मियों के यौन शोषण के आरोपों में घिरे होने का खुलासा किया है। कमेटी को यमुनानगर, करनाल, पानीपत, सोनीपत, गुडग़ांव, बहादुरगढ़, रोहतक व भिवानी में कोई आश्रय स्थल ऐसा नहीं मिला है, जिसमें पुलिस पर अंगुली नहीं उठाई गई है। एसआइटी की जांच जारी दूसरी तरफ पुलिस महानिदेशक रंजीत दलाल द्वारा गठित विशेष जांच दल अभी किसी नतीजे पर नहीं पहुंच पाया है। अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक एमएस मान को इस जांच दल की जिम्मेदारी सौंपी गई है। महिला एवं बाल तथा समाज कल्याण मंत्री गीता भुक्कल का कहना है कि इस संवेदनशील मुद्दे पर राज्य सरकार बेहद गंभीर है। उन्होंने विपक्ष के नेताओं से इस मुद्दे पर राजनीति नहीं करने का आग्रह करते हुए कहा कि दोषियों को किसी तरह की रियायत नहीं दी जाएगी।

अपना घर केसः जसवंती ने सरकार को जमकर लूटा

बहुचर्चित ‘अपना घर’ की संचालिका जसवंती ने केंद्र के अलावा राज्य सरकार को लूटने का भी कोई मौका नहीं गंवाया। सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने में माहिर जसवंती ने नियमों को ताक पर रख न केवल ‘अपना घर’ में रहने वाले बच्चों व महिलाओं के लिए केंद्र से मासिक अनुदान लिया, बल्कि सस्ता अनाज पाने के लिए वह राज्य सरकार की बीपीएल योजना का लाभ उठाने से भी नहीं चूकी। इस कड़ी में अब जसवंती द्वारा ‘अपना घर’ में रहने वाले 81 महिलाओं व बच्चों के 24 बीपीएल (गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन) कार्ड बनवाए जाने का खुलासा हुआ है।

आश्रम के बाशिंदों के भरण पोषण के लिए केंद्रीय अनुदान मिलने के बावजूद बीपीएल योजना के तहत मिलने वाले सस्ते राशन का लाभ लेकर जसवंती ने केंद्र व राज्य, दोनों सरकारों को चूना लगाया। इसमें भी महत्वपूर्ण बात यह है कि जसवंती ने प्रशासन में अपने ऊंचे रसूखों का लाभ उठाकर एक ही पते पर 24 बीपीएल कार्ड कैसे बनवा लिए? इनमें से 6 कार्डो पर तो इन बीपीएल परिवारों के सदस्यों की संख्या सात दर्शाई गई है। साफ है कि बिना प्रशासन की मिलीभगत के 600 रुपए मासिक प्रति व्यक्ति से अधिक के केंद्रीय अनुदान पर पोषित होने वाले महिलाओं व बच्चों के बीपीएल कार्ड नहीं बन सकते। नियमों के तहत 18 साल से कम आयु के बच्चों के बीपीएल कार्ड बनाए जाने का तो प्रावधान तक नहीं है, लेकिन कार्ड बनवाते समय सरकार का यह नियम भी जसवंती की राह में रोड़ा नहीं बना।

जसवंती ने 20 कार्ड जनवरी 2011 में बनवाए और चार कार्ड नवंबर 2011 में बनवाए। संस्था के करीब 81 महिलाओं और बच्चों के नाम इन राशन कार्डो में दर्ज कराए गए हैं। एक तरफ तो यहां की महिलाएं और बच्चे दो वक्त की रोटी के लिए तरसते थे, दूसरी तरफ प्रति माह संस्था में इन राशन कार्डो की बदौलत कई क्विंटल गेहूं, केरोसिन और चीनी आती थी। इस सामग्री का प्रयोग किस रूप में किया जाता था, इसका हिसाब-किताब किसी के पास नहीं है।

न्यायिक हिरासत के चलते सुनारियां जेल में बंद जसवंती, बेटी सिम्मी, दामाद जयभगवान, ममेरे भाई सतीश, ममेरी बहन शीला व काउंसलर वीना को पुलिस ने शुक्रवार को जेएमआईसी राहुल बिश्नोई की अदालत में पेश किया। अदालत ने दोबारा आरोपियों को 29 जून तक हिरासत में भेज दिया। पेशी के बाद पुलिस हिरासत में जसवंती ने पत्रकारों को बताया कि वह निर्दोष है। एनजीओ की सियासत के चलते फंसाया गया है।

बहुचर्चित अपना घर में आठ साल रहने के बाद मीना शुक्रवार को जेएमआईसी राहुल बिश्नोई की अदालत में बयान दर्ज करवाकर अपने घर मथुरा रवाना हो गई। पेशी से पहले डीएसपी धारणा यादव ने राइटिंग एक्सपर्ट से मीना के बयानों की जांच करवाई। चार दिन पहले मथुरा से रोहतक पहुंचे मीना के परिजनों ने प्रशासन से उसे घर भेजने की गुहार लगाई थी।

कमेटी ने गवाहों की सुरक्षा पर भी सवाल उठाए

चंडीगढ़. रोहतक के ‘अपना घर’ में रहने वालों के यौन उत्पीड़न के बाद अब उनकी सुरक्षा का मामला गहराने लगा है। शुक्रवार को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान मामले की जांच के लिए गठित वकीलों की चार सदस्यीय कमेटी की एक सदस्य सुदीप्ति शर्मा ने कहा कि शेल्टर होम में रहने वाली 35 वर्षीय महिला द्वारा दो दिन पहले आत्महत्या का मामला सामने आया। सुदीप्ति ने कहा कि यह मामला सरासर झूठा है।

यह आत्महत्या की आड़ में हत्या का मामला है। वे इस महिला से मिली हैं। महिला बेहद मजबूत इरादे व आत्मविश्वास से भरी है। अपना बच्च मांगने पर शेल्टर होम की संचालिका जसवंती ने इस महिला के निजी अंगों में कैंची घुसा दी थी। इस कदर प्रताड़ना पर भी महिला नहीं टूटी तो फिर आत्महत्या की बात को कैसे सही माना जा सकता। यह साक्ष्य नष्ट करने व गवाहों की सुरक्षा पर सवाल खड़ा करता है।

गोदाम था ‘बाल कुंज’ तो ‘अपना घर’ शो रूम

रोहतक के ‘अपना घर’ की ही तरह है यमुनानगर का ‘बालकुंज’। यहां के प्रताड़ित बच्चों की वीडियो रिकार्डिंग मौजूद है। बच्चे की बात पर यदि यकीन किया जाए तो कम से कम यहां से 23 बच्चियों को रोहतक के ‘अपना घर’ में भेजा गया है। अब ये बच्चियां कहां है? यह किसी को पता नहीं है। हालांकि बालकुंज के रिकार्ड में यह दिखाया गया कि बच्चियां रोहतक के ‘अपना घर’ गईं। लेकिन वे इस समय कहां है, यह किसी को नहीं मालूम। जब महिला आयोग की टीम ‘अपना घर’ जांच के लिए पहुंची तो इसका एक और काला सच सामने आया। टीम, गांधी कैंप स्थित हरिओम सेवा दल के सहारा आश्रम में पहुंची। वहां बंद कमरे में ‘अपना घर’ से भेजी गई लड़की मथुरा निवासी मीना, सिल्चर (असम) निवासी मुन्नी व कटियार (बिहार) निवासी रामावती से पूछताछ की। तीन घंटे चली पूछताछ में आयोग ने लड़कियों ने अपना घर में हुए शोषण के बारे में बातचीत की। सूत्रों का कहना है रामावती ने आयोग को बताया कि किस तरह उसके पांच माह के बच्चे को संचालिका जसवंती ने बेच दिया।

रोहतक के नाम से कापंती थी लड़कियां

बालकुंज में रह चुकी पिंकी के पास ‘अपना घर’ की एक लड़की का फोन आया था। यह लड़की भी बालकुंज से रोहतक अपना घर गई थी। सूत्रों के अनुसार पिंकी को उस लड़की ने बताया कि रोहतक न आना। इससे तो अच्छा है मर जाना। इसके बाद  पिंकी ने वहां जाने से मना किया। लेकिन किसी ने उसकी बात नहीं मानी। इस लड़की को रोहतक भेज दिया गया। वहां उसने आग लगा कर अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली। बालकुंज में रहने वाली पूनम कबड्डी की सबसे अच्छी खिलाड़ी थी। लेकिन यह बच्ची भी गुमसुम रहने लगी है। यहां तक कि उसने बंद कमरे में रहना शुरू कर दिया। इसी बीच उसे रोहतक भेजने की तैयारी शुरू हो गई। इससे पहले उसने दस अप्रैल को दम तोड़ दिया। सूत्रों के अनुसार यहां से पूनम की व्यथा के बारे में एक पत्रकार को भी जानकारी दी गई। लेकिन यह पत्रकार भी इस बच्ची की कोई मदद नहीं कर पाया।

यातना घर है अपना घर

बालकुंज की लड़कियों में ‘अपना घर’ यातनागृह के तौर पर जाना जाता है। अब सवाल यह है कि जब बच्चियां यहां जाने से घबराती थी, तो आखिर क्यों नहीं बालकुंज प्रशासन ने वहां के हालात का जायजा लिया। यदि लिया होता तो हो सकता है बहुत सी बच्चियां इस शोषण से बच जाती। बालकुंज में बच्चियों को 18 साल तक की उम्र तक रखा जाता है। इसके बाद बच्ची को रोहतक के अपना घर में भेज दिया जाता है। इसका हालांकि रिकार्ड भी रखा जाता है। सूत्रों के अनुसार जो बच्चियां यहां से रोहतक के लिए गईं, बालकुंज प्रशासन ने यह ध्यान नहीं दिया कि आखिरकार वे किन हालातों में अपना घऱ में रह रही हैं। उनकी यदि शादी की जा रही है तो किसके साथ की जा रही है या उन्हें वहां कैसा माहौल दिया जा रहा है, इस बाबत भी बालकुंज प्रशासन लापरवाह बना रहा। बच्चे के अनुसार शोषण की तो यहां इंतहा है। बच्चियां तो यहां बेहद खौफजनक माहौल में रहती है। यहां देव नाम का लड़का भी रहता है। वह लड़कियों को धमकाता था। हालांकि उसकी भी तीन बहनें यहां रहती थीं। देव की बहन को रोहतक भेजा जाना था। इसी बीच वह लड़की गायब हो गई।

अपना घर केस : बच्चियों को पिंजरे में रखते थे बंद

रोहतक: रोहतक के अपना घर से दरिंदगी की नई−नई कहानियां सामने आ रही हैं। एनडीटीवी इंडिया की जांच में पता चला कि घर की छत पर एक पिंजरा बना हुआ है जिसमें महिलाओं और बच्चियों को बंद रखते थे। अब इस एनजीओ पर सख्त कार्रवाई की मांग हो रही है। इस बीच पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के आदेश पर बने पैनल ने यहां से छुड़ाई गई सभी 103 महिलाओं और बच्चियों के बयान दर्ज कर लिए हैं। सूत्रों के मुताबिक इन लड़कियों ने अपने बयान में कई आरोप लगाए हैं। महिलाओं और बच्चियों का आरोप है कि उनका यौन शोषण और बलात्कार तक होता रहा। संचालक जसवंती नारवाल पर बच्चियों को बेचने के भी आरोप लगे और ये भी कि वह विदेशियों को इनके अश्लील फोटो खींचने देती थीं लेकिन याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि इस खौफनाक कहानी के गुनाहगारों को सरकार की शह हासिल थी।

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.