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लोकसभा में पुलिस वाले ने महिला मीडियाकर्मी से बदतमीजी करने की हिमाकत की…

By   /  June 21, 2012  /  2 Comments

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देश की सर्वोच्च संस्था संसद भवन की सुरक्षा में तैनात एक सुरक्षा सहायक पर ड्यूटी के समय शराब के नशे में होने व लोकसभा चैनल की एक महिला कर्मी के साथ बदतमीजी व शारीरिक प्रताड़ना के प्रयास का आरोप लगा है।

बड़ी बात यह है कि विरोध स्वरूप महिला द्वारा शोर मचाए जाने पर आरोपी संसद भवन के गेट से अपनी ड्यूटी छोड़ भाग खड़ा हुआ। संसद भवन सुरक्षा निदेशक अजय आनंद ने इस घटना की पुष्टि की है और आरोपी के खिलाफ उचित कार्रवाई किए जाने की बात कही है।

संसद भवन सुरक्षा के एक अधिकारी ने बताया कि यह घटना शुक्रवार दोपहर लगभग 3:30 बजे की है। तालकटोरा रोड गेट संख्या 2-3 पर सुरक्षा सहायक (ग्रेड-वन) यू.बी.एस नेगी तैनात थे। उसी दौरान लोकसभा चैनल की एक महिला कर्मचारी ऑफिस में प्रवेश करने के लिए उस गेट पर पहुंची।

कुछ ही देर में महिला के शोर की आवाज सुनाई दी, जिसके बाद अन्य सुरक्षा कर्मी भी वहां आ गए। महिला कर्मी ने आरोप लगाया कि यू.बी.एस नेगी शराब के नशे में इस कदर धुत हैं कि जब वह गेट से प्रवेश कर रही थी तो नेगी ने उसके साथ बदतमीजी करनी शुरू कर दी।

जब महिला ने विरोध जताया तो उसके साथ शारीरिक प्रताड़ना का प्रयास करने लगा। मामले की जानकारी पार्लियामेंट सेक्युरिटी के आला अधिकारियों को भी दी गई। जैसे ही यू.बी.एस नेगी को इस बात का पता चला कि आला अधिकारी भी मौके पर आ रहे हैं वह अपनी ड्यूटी छोड़ कर भाग खड़ा हुआ।

 एडिशनल डायरेक्टर(सेक्युरिटी) राकेश सेठी भी मौके पर पहुंच गए। पूछताछ के बाद महिला अधिकारी ने सारी बात आला अधिकारी को भी बताई। पार्लियामेंट सेक्युरिटी के डायरेक्टर अजय आनंद का कहना है कि पीड़िता से लिखित में शिकायत ले ली गई है।

हालांकि इस बात की पुष्टि करना मुश्किल है कि घटना के दौरान सुरक्षा सहायक नशे में धुत था या नहीं क्योंकि वह मौके पर नहीं मिला था। पीड़िता की शिकायत के आधार पर आरोपी के खिलाफ उचित कार्रवाई की जा रही है, साथ ही उसके खिलाफ विभागीय जांच भी की जाएगी।

(भास्कर)

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  • Published: 5 years ago on June 21, 2012
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  • Last Modified: June 21, 2012 @ 1:37 am
  • Filed Under: अपराध

About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक “मुखौटों के पीछे – असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष” में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

2 Comments

  1. Dr Shashikumar Hulkopkar says:

    The media worker are prone for discipline when they are on hunt of news, In several cases they violate rules & discipline in their actions, it is obvious that LOKSBHA is the place of high security & to keep law & order the police may have acted in emergency

  2. रक्षक जब भक्षक बने, तो दें उसको दंड.
    सबक मिले कोई न हो, फिर ऐसा उद्दंड.
    फिर ऐसा उद्दंड, काम निष्काम करें सब.
    पद मद में नारी न सहे अपमान कभी अब.
    नेगी का मुँह काला कर दें, सच के पक्षक.
    तक्षक बनकर दनसे मिले यदि खोटा रक्षक..

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