/कपिल सिब्बल के भी पड़ सकता है चांटा..

कपिल सिब्बल के भी पड़ सकता है चांटा..

केंद्रीय कृषि मंत्री शरद पवार और पूर्व टेलीकॉम मंत्री सुखराम के गाल पर तमाचा जड़ने वाला युवक केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री कपिल सिब्बल को निशाना बनाने की फिराक में है।

गौरतलब है कि हरविंदर सिंह नाम के युवक ने पिछले साल नवंबर में पांच दिनों के अंतराल के भीतर ही पूर्व टेलीकॉम मंत्री सुखराम और मौजूदा केंद्रीय कृषि मंत्री शरद पवार के गाल पर तमाचा मारा था। अब खुफिया विभाग को सूचना मिली है कि वो कपिल सिब्बल को निशाना बनाना चाहता है।

खुफिया विभाग ने चेतावनी जारी की है कि कपिल सिब्बल को भी किसी सामूहिक समारोह में थप्पड़ मारा जा सकता है। इस सूचना के बाद आईबी की एक टीम ने हरविंदर सिंह से बुधवार को मुलाकात भी की। वहीं हरविंदर सिंह का कहना है कि वो कपिल सिब्बल को थप्पड़ मारने के लिए बस मौके का इंतेजार कर रहा है।

हरविंदर सिंह कपिल सिब्बल को थप्पड़ मारने के लिए उनके किसी कार्यक्रम में पहुंचने की जुगत लगाने में लगा है वहीं दिल्ली पुलिस भी उसकी गतिविधियों पर नजर रखे हुए है। कपिल सिब्बल को किसी भी संभावित हमले से बचाने के लिए अब उनके सार्वजनिक कार्यक्रमों की जानकारी भी गुप्त रखी जा रही है।

गौरतलब है कि 23 नवंबर को शरद पवार को थप्पड़ मारने के बाद हरविंदर सिंह जेल भी जा चुका है। सबसे पहले हरविंदर सिंह ने पूर्व टेलीकॉम मंत्री सुखराम को थप्पड मारा था। सुखराम को जब 1996 के एक मामले में दिल्ली की एक अदालत ने पांच साल की सजा सुनाई थी तब हरविंदर ने इस कारनामे को अंजाम दिया था। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि कहीं हरविंदर सिंह की हरकतों के पीछे कोई संगठन तो नहीं है।

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.