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रिश्वत लेने के आरोप में आईपीएस अफसर पकड़ा..

By   /  June 22, 2012  /  3 Comments

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भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने गुरुवार को आईपीएस अफसर अजय सिंह को घूस के आरोप में गिरफ्तार कर लिया। आरोप है कि उन्होंने अपने रीडर की जरिये घूस की राशि मंगवाई थी। एसीबी ने गुरुवार दोपहर अजमेर के रामगंज थाने में एएसआई प्रेमसिंह को एक लाख रुपए की रिश्वत लेते गिरफ्तार किया था। वह अजमेर (नार्थ) में तैनात सहायक पुलिस अधीक्षक अजय सिंह का रीडर है। एसीबी की एक टीम जयपुर में श्याम नगर स्थित अजय सिंह के आवास पर भी पहुंची, लेकिन वहां ताला लगा मिला। भरतपुर के गांव बिलोद स्थित उनके निवास पर भी तलाशी ली गई।

एसीबी को भगासनी निवासी भवानी सिंह ने रिश्वत मांगे जाने की शिकायत की थी। एसीबी ने सत्यापन कराया तो पता चला कि अजय सिंह ने रिश्वत के रुपए सहायक उप निरीक्षक प्रेम सिंह को देने को कहा है। पीड़ित गुरुवार दोपहर को एएसआई को रामगंज थाने में रुपए देने पहुंचा। जहां एसीबी के एडीशनल एसपी आशाराम चौधरी के नेतृत्व में उसे दबोच लिया गया।
पूछताछ में एएसआई प्रेम सिंह ने बताया कि उसने रिश्वत की राशि आईपीएस अजय सिंह के लिए ली थी।
अजय सिंह एसीबी की कार्रवाई का पता लगते ही अजमेर से कामां (भरतपुर) के लिए रवाना हो गए। एसीबी ने अजय सिंह के बारे में जानकारी की तो पता चला कि वे भरतपुर घर के लिए रवाना हो चुके हैं और जयपुर के आसपास हैं। इस पर कानोता पुलिस को सूचना दी गई। आईजी उमेश मिश्र भी दो अन्य पुलिस अधिकारियों के साथ घाट की गूणी पहुंच गए। शाम को आईपीएस की गाड़ी वहां से गुजरी तो आईजी ने पीछा किया। कानोता पुलिस ने अजय सिंह की कार को रोक लिया। आईजी भी मौके पर पहुंच गए।
और गाड़ी की तलाशी ली। अवैध शराब मिलने पर कानोता थाने में मामला दर्ज कर गाड़ी में आईपीएस के साथ बैठे उनके भाई हेमंत कुमार को गिरफ्तार कर लिया। एसीबी की टीम अजय सिंह को पूछताछ के लिए अजमेर लेकर रवाना हो गई। जहां उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।

क्या था मामला?
डेढ़ लाख में सौदा तय हुआ- अजमेर में 2006 में मार्स बिल्ड होम एंड डवलपर्स की मल्टीलेवल मार्केटिंग कंपनी खुली थी। कंपनी ने रीयल स्टेट, गेस्ट हाउस, प्लॉट किश्तों में देने का आश्वासन देकर लोगों को चेन सिस्टम से जोड़ा। दो लाख से अधिक सदस्य बने।
कंपनी ने 2 दिसंबर, 09 से सदस्यों को भुगतान बंद कर दिया। लोगों ने एजेंटों के खिलाफ मामले दर्ज कराए। इन्हीं मामलों की जांच आईपीएस अजय सिंह कर रहे थे। जोधपुर के भगासनी निवासी भवानी सिंह भी कंपनी का एजेंट था। उसने एसीबी में शिकायत की कि कंपनी द्वारा प्रोत्साहन के रूप में उसे महेंद्रा कार मिली थी। जिसे उसने बेच दिया था। दर्ज मामले में गाड़ी को जब्त करने तथा आरोपी बनाने से बचाने की एवज में अजय सिंह अपने रीडर एएसआई प्रेम सिंह के जरिये दो लाख रु. मांग रहे हैं। सौदा डेढ़ लाख रुपए में तय हुआ है।
विवादों में रहे हैं
अलवर के शिवाजी पार्क थाने में वर्ष 2009 में एक युवती ने छेड़छाड़ व मारपीट का मामला दर्ज कराया था। जांच में अजयसिंह और उनके दोस्त का नाम भी सामने आया, लेकिन इस बीच अजय सिंह का आईपीएस में चयन होने के कारण मामले में एफआर लगा दी गई थी।
अजय सिंह को प्रोबेशन पीरियड के दौरान जोधपुर कमिश्नरेट से प्रशिक्षण पूरा होने से पहले ही हटाया गया था। सिंह को गत वर्ष अप्रैल में झंवर में एसएचओ लगाया गया था। वहां तीन माह पूरे होने से पहले ही सिंह को ग्रामीणों की शिकायत पर हटा दिया गया। अजमेर में एलआईसी अधिकारी लक्ष्मण मीणा को आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोपी अधिकारी केबी चौधरी को वीआईपी ट्रीटमेंट देने का आरोप। अजमेर के कोटड़ा में जोधपुर के एक बुजुर्ग के भूखंड पर कब्जे की जांच सिंह के पास थी। पीड़ित को एक लाख रु. लेकर भूखंड छोड़ने को धमकाया। शांतिनगर के एक मकान को धोखाधड़ी से बेचने के मामले में एसपी ने जांच डॉ. अजय सिंह को सौंपी थी। इसमें जेल में रहते हुए एक आरोपी जुल्फिकार उर्फ जुल्फी पर बाहर से पॉवर ऑफ अटॉर्नी बनाने का गंभीर आरोप है। ऐसा कैसे हुआ, अब तक पहेली बना हुआ है.
दहेज प्रताड़ना के एक मामले में हस्तक्षेप कर जबरन महिला थाने में मुकदमा दर्ज करवाया। बिना उच्चधिकारियों की अनुमति के कांस्टेबल राजाराम व जयपालसिंह को एसी का रिटर्न टिकिट देकर मुंबई में से दहेज प्रताड़ना के आरोपी रणजीतसिंह को गिरफ्तार किया। अवैध रूप से लाखों वसूलने का आरोप।

(भास्कर)

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About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक “मुखौटों के पीछे – असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष” में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

3 Comments

  1. Dhamakedar khabren hain Mediadarbar.com main.

  2. Dr Shashikumar Hulkopkar says:

    Misuse of delegated power to govt officer, is quite often exposed due undue demands, & in-spite of some fulfilling by parties under copulations the continued harassment makes the exposures As one shall be honest in performing duties but the vested interest & some time pressure for some fevers makes such victims

  3. Praveen Shankar Kapoor says:

    shocking.

पाठक चाहे आलेखों से सहमत हों या असहमत, किसी भी लेख पर टिप्पणी करने को स्वतंत्र हैं. हम उन टिप्पणियों को बिना किसी भेद-भाव के निडरता से प्रकाशित भी करते हैं चाहे वह हमारी आलोचना ही क्यों न हो. आपसे अनुरोध है कि टिप्पणियों की भाषा संयत एवं शालीन रखें - मॉडरेटर

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