/भाई ने ही लूटी बहन की अस्मत…

भाई ने ही लूटी बहन की अस्मत…

राजस्थान के पली शहर के सुभाष नगर में रहने वाली विवाहित युवती से युवक द्वारा दुष्कर्म का मामला सामने आया है। पीडि़ता का आरोप है कि आरोपी युवक जीतू उर्फ जितेंद्र रावत को उसने धर्म का भाई बना रखा था। जो अपनी बहन की शादी के बहाने उसे अपने साथ ले गया। रास्ते में आरोपी ने पेय पदार्थ में उसे नशीला पदार्थ पिला दिया और बेहोशी की हालत में उसे दिल्ली ले गया। जहां होटल में दो दिन तक आरोपी ने उससे दुष्कर्म किया।

शुक्रवार शाम को पाली लौटी पीडि़ता ने ब्यावर के जीतू उर्फ जितेंद्र रावत के खिलाफ दुष्कर्म का मुकदमा दर्ज कराया है। पुलिस ने पीडि़ता का मेडिकल जांच करा आरोपी की तलाश शुरू की है।  

पाली से भगाया, होश आया तो दिल्ली में पाया

 

महिला थाना प्रभारी उम्मेदसिंह ने बताया कि अजमेर के मसूदा थाना क्षेत्र में लुलवा दांती का बाडिय़ा निवासी 27 वर्षीया युवती अपने पति व तीन बच्चों के साथ पाली के सुभाष नगर में किराए के मकान में रहती है। पाली में उसका पति मजदूरी करता है।

पीडि़ता का आरोप है कि उसने पीहर में पड़ोस के गांव बाणोता का बाडिय़ा (ब्यावर) निवासी जीतू उर्फ जितेंद्र रावत को उसने धर्म का भाई बना रखा था। जिसका अक्सर पाली में भी उसके घर आना-जाना था। आरोप है कि गत 16 जून को अपनी बहन की शादी के बहाने जितेंद्र रावत उसे अपने साथ ले गया और रास्ते में नशीला पेय पदार्थ पिलाया। होश आने पर उसने आप को दिल्ली के एक होटल में पाया।

आरोप है कि दो दिन तक आरोपी ने उसी होटल में उससे दुष्कर्म किया और गत 19 जून की रात को ब्यावर लाकर छोड़ दिया। वहां दो दिन तक अस्पताल में उपचार कराने के बाद शुक्रवार को पाली पहुंच पीडि़ता ने मुकदमा दर्ज कराया।

(भास्कर)

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.