Loading...
You are here:  Home  >  मीडिया  >  कला व साहित्य  >  व्यंग्य  >  Current Article

बॉस इज़ आलवेज़ राइट .. प्लीज़ डोंट फ़ाइट …

By   /  June 23, 2012  /  1 Comment

    Print       Email
इस खबर को अपने मित्रों से साझा करें..

-गिरीश मुकुल||

सरकारी गैर-सरकारी दफ़्तरों, संस्थानों के प्रोटोकाल में कौन ऊपर हो कौन नीचे ये तय करना आलमाईटी यानी सर्व-शक्तिवान  बॉस नाम के जीवट जीव का कर्म  है. इस कर्म पर किसी अन्य के

कैरीकैचर: भाई अजय झा

अधिकार को अधिकारिता से बाहर जाकर अतिचार का दोष देना अनुचित नहीं माना जा सकता. एक दफ़्तर का   बॉस   जो भी तय करता है वो उसके सर्वश्रेष्ठ चिंतन का परिणाम ही कहा जाना चाहिये.उसके किये पर अंगुली उठाना सर्वथा अनाधिकृत रूप से किये गये कार्य यानी “अनुशासनहीनता” को क़तई बर्दाश्त नहीं  करना चाहिये.
हमारे एक मित्र हैं गिलबिले  एक दिन बोले- बॉस सामान्य आदमी से भिन्न होता है ..!
हमने कहा -भई, आप ऐसा कैसे कह सकते हैं ? प्रूव कीजिये ..
गिलबिले :- उनके कान देखते हैं.. हम आपकी आंखे देखतीं हैं.
हम:-“भैये तो फ़िर आंख ?”
गिलबिले:- आंख तो तिरछी करने के लिये होतीं हैं..सर्वशक्तिवान  बॉस
की वक्र-दृष्टि से स्वयम  बॉस  ही बचाते हैं.दूजा कोई नहीं. गिलबिले जी के ब्रह्म ज्ञान के हम दीवाने हो गए बताया तो उनने  बॉसों के बारे में बहुत कुछ पर हज़ूर यक़ीन मानिये खुलासा हम न कर पाएंगे बस इत्ती बात को सार्वजनिक करने की अनुमति हमको मिली थी सो कर दी. और आगे-पीछे की बात उनके रिटायर होने के बाद पेंशन केस निपटने के बाद खोल दूंगा वरना अब कोई दूसरे परसाई जी तो हैं नहीं जो  “भोला राम का जीव” की तर्ज़ पर गिलबिले जी का जीव लिखेंगे..

 एक मातहत अपने बास के मुंह देखे आचरण से क्षुब्द हो   बॉस   के  बॉस  यानी परबॉस के पास शिकायत लाया. परबॉस के साथ उसकी चर्चा  का संपादित अंश देखिये
मातहत:- सर, हमारे बॉस दोहरा व्यव्हार करते हैं..
परबॉस :- हमारे भी करते थे . कोई नई बात नहीं !
मातहत:- मान्यवर, भेद की दृष्टि की वज़ह से उत्पादन प्रभावित हो रहा है..!
परबॉस :- देश की जी.डी.पी. में हमारी कम्पनी के अवदान का परसेंटेज़ .0001 से भी कम है फ़िर आप काहे चिंता कर रहे हैं, शांति से काम कीजिये बॉस  इज़ आलवेज़ राइट .. प्लीज़ डोंट फ़ाइट …विद यौर बॉस. ही इस सहस्त्रबाहु अंडरस्टैण्ड मिस्टर.. कल्लू जी. डू यौर जाब ओ.के.
माथे पर तनाव लिये कल्लू जी वापस अपना सा मुंह लेकर कारखाने वापस लौटे तो बॉस ने मुस्कुरा कर उनका स्वागत किया यह पूछते हुए कि-“ब्रह्म-ज्ञान मिला कल्लू जी.”
 कल्लू जी की बीवी ने भी तो समझाया था माना नहीं मरदूद सोच रहा था उपर वाले कृपा करेंगें.. हुई क्या न .. होती भी कैसे “बॉस   इज़ आलवेज़ राइट ..!”
कल्लू भाई ने तत्क्षण जीने का तरीक़ा बदल दिया. बस फ़िर क्या था वो आनंद के सागर गोते लगाते हुए संस्थान का कामकाज सम्हाल रहे हैं.
कल्लू ने सहकर्मी महेश तिवारी के गुरुमंत्र को गांठ में बांध लिया कि- दुनिया के अधिकांश बॉस नामक जीव को व्यवस्था को चलाने दो तरह के के लोग चाहिये एक वो जो रुटीन के कामकाज निपटाएं..दूसरा वो प्रोटीन के कामकाज़ निपटाए.
रुटीन के काम वो जो संस्थान के लिये सेटअप के साथ ही तय कर दिये जाते हैं. प्रोटीन के कामकाज़ का अर्थ है.वो कार्य जो बॉस के वास्ते किये जाते हैं.  बॉस   को उससे ताज़गी और स्फ़ूर्ति हासिल होती है. अन्ना-टीम को क्या मालूम कि कि दुनिया भर की व्यवस्था चलाने के लिये कुपोषित बॉसों की नहीं सुपोषित बॉसों की ज़रूरत होती है. उनको कल्लू टाइप के मातहतों की ज़रूरत होती है जो प्रोटीन और अन्य सूक्ष्म-पोषक तत्व उपलब्ध कराते रहें.
लेखक मिसफिट ब्लॉग के करता धरता हैं.
Facebook Comments

इस खबर को अपने मित्रों से साझा करें..
    Print       Email

About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक “मुखौटों के पीछे – असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष” में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

1 Comment

  1. sach hai bhaiya………..dekho………………….इतना समय देने के लिए धन्यवाद मैं कुछ निवेदन करना चाहूँगा :- १) जामनगर की स्थिति हैदराबाद से भी महत्वपूर्ण है पाकिस्तान से सटे इस इलाके में बच्चों के मन में जहर (मिस्टर एस. सुन्दरम विना बी.एड.या शिक्षक- योग्यता के रिलायंस टाउनशिप जामनगर ( गुजरात ) में…स्थित के.डी.अम्बानी विद्या मंदिर में प्राचार्य पद पर सुशोभित हैं और बच्चों को सिखाते हैं – बड़ों के पांव छूना गुलामी की निशानी है,आपके पीछे खड़े शिक्षक -शिक्षिकाएं अपनी बड़ी-बड़ी डिग्रियां खरीद कर लाएहैं ये आपके रोल मोडल बनने के लायक नहीं हैं , गांधीजी पुराने हो गए उनको छोडो – फेसबुक को अपनाओ…. केवल यही नहीं १४-९-२०१० को हिंदी दिवसके दिन प्रातःकालीन सभा में जब इन्हें आशीर्वाद के शब्द कहने को बुलाया गया तो इन्होने माइकपर सभी बच्चों से कहा – " कौन बोलता है हिंदी राष्ट्र भाषा है, हिंदी टीचर आपको मूर्ख बनाते हैं.") भरा जाना भयंकर हो सकता है. २) प्रिंसिपल ने क्लास ११ – १२ से हिंदी हटा दिया है जबकि बच्चे पढना चाहते हैं. ३) २-२ पुराने चयनित ऑल इंडिया रेडियो राजकोट के वार्ताकार हिंदी टीचर को निकालकर हिंदी को कमजोर करके गुजरात को भी महाराष्ट्र बनाया जा रहा है, स्कूल के Director ऑफ़ अकादमिक राजठाकरे के भक्त हैं तथा इसमें उनका अहम् रोल है. ४) इन बातों की जरा भी आहट लग जाती तो मैं अपनी परमानेंट डी०ए०वी० की नौकरी छोड़कर यहाँ नहीं आता, मेरी पत्नी सेल की सरकारी नौकरी छोड़कर यहाँ नहीं आतीं इसलिए हम चाहते हैं कि नौकरी के लालच में इन लोगों के झांसे में कोई और न फंसे और ये बताना धर्म और ईमान का काम है विशेषकर मीडिया पर्सनल की ये जिम्मेदारी भी है पर रिलायंस के आगे सब चुप हैं, रिलायंस वाले कहते भी हैं हम सबको ख़रीदे हुए हैं, आए दिन वहां लोग आत्महत्याएं करते हैं पर पैसे की महिमा..सब शांत रहता है, गरीब को जीने का जैसे हक़ ही नहीं है ५) राष्ट्रपति महोदया के यहाँ से चीफ सेक्रेटरी गुजरात को पत्र भी आया है पर वे उसे दबाकर बैठे हैं , मैंने हाईकोर्ट में केस कर रखा है ये सवाल राष्ट्रभाषा का अधिक है मेरा पर्सनल कम मेरे घर में रोटी साग है पर एक आदर्श नागरिक के नाते हम सब की भी कुछ जिम्मेदारियां बनती हैं ६) कृपया गुजरात को महाराष्ट्र मत बनने दो.

    आप निम्न कार्यों में यथासंभव मदद दीजिए :-……………१) किसी एम० पी० के द्वारा संसद में इस प्रश्न को उठाया जाए. २) किसी वकील, सामाजिक कार्यकर्त्ता या एन० जी० ओ० के द्वारा जनहित याचिका दायर की जाए ३) पत्रकारों द्वारा इस बात को लगातार लिखा जाए ४) हम सभी लोग मिलकर जनजागरण का ये प्रयास ऐसे चलते रहें. यहाँ सब बिके हैं इसलिए मैं आपकी तरफ आशा भरी नज़रों से देख रहा हूँ मैं यहाँ अपने स्तर से भी प्रयासरत हूँ….. विशेष जानकारी हेतु संपर्क करें :- ९४२८०७५६७४ , ८१२८४६५०९२, इमेल – [email protected], [email protected] See More.

    LikeUnlike · · Share.

    Raj Shukla, Shailendra Joshi and 4 others like this.

    Raj Shukla बर्बाद-ए-गुलिस्तां करने को बस एक ही उल्लू काफी था, उस पेड़ (देश) की हालत क्या होगी जहाँ हर डाल (स्कूल) पर उल्लू बैठा हो. इससे बड़ा हमारे देश का दुर्भाग्य क्या हो सकता है. प्रयास जारी रखिये..
    3 hours ago · LikeUnlike.

    DrAshok Kumar Tiwari bahut-bahut dhanyvaad bhaiya maximum ko bhejo……
    9 hours ago · Like · 1.

    Write a comment.

    Friends

    941 Friends
    See All.

    Kirti Rai, Shweta Kulkarni, Gagji Monpara, Madan Kashyap, Gopalan Seshadri.

    Saeed Hameed, Nimesh Modi, Surendra Dube.
    Dinesh Tripathi.

    June 14 near Chandigarh, India.

    >> dr Ashok kumar tiwari ji ki shahayata kare or agar koi sujhav hai to please bataye.
    >>>

    See More.
    — with Hasan Jawed and 15 others.

    News Vision News paper site.

    http://www.newsvision.biz

    News Vision katni news paper site katni katni news paper hindi, english katni news paper.

    Like · · ShareSee More.

    News Vision News paper site.
    http://www.newsvision.biz
    News Vision katni news paper site katni katni news paper hindi, english katni news paper.

पाठक चाहे आलेखों से सहमत हों या असहमत, किसी भी लेख पर टिप्पणी करने को स्वतंत्र हैं. हम उन टिप्पणियों को बिना किसी भेद-भाव के निडरता से प्रकाशित भी करते हैं चाहे वह हमारी आलोचना ही क्यों न हो. आपसे अनुरोध है कि टिप्पणियों की भाषा संयत एवं शालीन रखें - मॉडरेटर

You might also like...

तकदीर के तिराहे पर नवजोत सिंह सिद्धू …क्योंकि राजनीति कोई चुटकला नहीं..

Read More →
Page Reader Press Enter to Read Page Content Out Loud Press Enter to Pause or Restart Reading Page Content Out Loud Press Enter to Stop Reading Page Content Out Loud Screen Reader Support
%d bloggers like this: