/नेता लूट रहे हैं एलपीजी सिलिंडरों पर सब्सिडी का असली मज़ा

नेता लूट रहे हैं एलपीजी सिलिंडरों पर सब्सिडी का असली मज़ा

आम लोगों को महंगाई से राहत देने के लिए सरकार जिन एलपीजी सिलिंडरों पर सब्सिडी देती है, उनका इस्तेमाल करने वालों में देश के वीवीआईपी सबसे आगे हैं। राजधानी में एलपीजी खर्च करने वाले टॉप-100 लोगों में नेताओं की संख्या ज्यादा है। शुक्रवार को तीनों तेल कंपनियों ने रसोई गैस सिलिंडरों का हिसाब देखने के लिए ट्रांसपेरेंसी पोर्टल लॉन्च किया तो यह जानकारी मिली।पता चला कि इस साल 31 मई तक नई दिल्ली में उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी के आधिकारिक निवास पर 171 सब्सिडाइज्ड सिलिंडरों का इस्तेमाल हुआ। इंडस्ट्रियलिस्ट नवीन जिंदल के 6 पृथ्वीराज रोड स्थित घर पर 369 सिलिंडर गैस कंपनियों ने भेजे, मतलब रोजाना एक सिलिंडर से ज्यादा। नवीन के यहां दो गैस कनेक्शन हैं- पहला, पिता स्वर्गीय ओ.पी. जिंदल के नाम और दूसरा, राधा देवी रावत के नाम।

ट्रांसपेरेंसी पोर्टल को लॉन्च करने वाले पेट्रोलियम मिनिस्टर एस.जयपाल रेड्डी भी 26 सिलिंडर भरवा चुके हैं, यानी हर महीने दो से ज्यादा। पत्रकारों के पूछने पर रेड्डी ने मजाक में कहा कि यह दिखाता है कि मैं कितना पॉपुलर नेता हूं। मेरे यहां बहुत सारे मेहमान आते हैं, कभी-कभी 200-300 तक। स्वाभाविक है, खर्च तो ज्यादा होगा ही।

किसने लिए कितने सिलिंडर
हामिद अंसारी, उपराष्ट्रपति : 171
परणीत कौर, विदेश राज्यमंत्री : 161
विजय बहुगुणा, उत्तराखंड सीएम : 83
राजनाथ सिंह, बीजेपी नेता : 80
एम.एस. गिल, पूर्व मंत्री : 79
नवीन जिंदल, सांसद व इंडस्ट्रियलिस्ट : 369
जयपाल रेड्डी, तेल मंत्री : 26

*इस साल 31 मई तक
– 21 दिन के बाद ही डिलिवरी होने के दूसरा सिलिंडर बुक हो सकता है

कैसे देखें अपनी डिटेल
– www.petroleum.nic.in, www.indane.co.in, www.ebharatgas.com या hindustanpetroleum.com
– वहां ट्रांसपेरेंसी पोर्टल पर क्लिक करें। अपनी कंस्यूमर नंबर की डिटेल और डिस्ट्रिब्यूटर का नाम लिखें।
– आपके कंस्यूमर नंबर पर बुक कराए गए सिलिंडर का स्टेटस और अन्य डिटेल तुरंत मिल जाएंगी।

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.