/भोजपुरी फिल्म अभिनेत्री के साथ सामूहिक बलात्कार

भोजपुरी फिल्म अभिनेत्री के साथ सामूहिक बलात्कार

यूपी समाजवादी पार्टी की सरकार बनने के बाद से बलात्कार, हत्या और लूट जैसे अपराध तेज़ी से बढ़े हैं.   भोजपुरी फिल्म में काम करने वाली एक अभिनेत्री की इज्जत लूट ली गई। हिरोइन का आरोप है कि इसके साथ तीन लोगों ने सामुहिक बलात्कार किया। पुलिस ने इस मामले में जब दिलचस्पी नहीं दिखाई तो महिला को न्यायालय के शरण में जाना पड़ा। कोर्ट के फटकारने के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है।
बताया जा रहा है कि नोएडा के सालारपुर में रहने वाली भोजपुरी हिरोइन का विवाद भंगेल के प्रमोद त्यागी से चल रहा है। अब ये महिला आरोप लगा रही है कि कि विवाद को सुलझाने के लिए त्यागी ने उसे अपने गांव बुलाया। अभी वह वहां पहुंचने के लिए जाने ही वाली थी कि उसका अपहरण कर लिया गया। इसके बाद आरोपी के गांव के मंदिर के पास तीन लोगों ने अभिनेत्री की इज्जत लूट ली।
अभिनेत्री का आरोप है कि उसके साथ प्रमोद, सुखबीर और एक अन्य ने सामूहिक दुष्कर्म किया। इसके बाद वह पति के साथ कोतवाली सेक्टर 39 पहुंची लेकिन पुलिस ने मामला दर्ज नहीं किया। इस पर महिला ने कोर्ट की शरण ली थी।
यूपी में ऐसी वारदात कहीं न कही रोज ही हो रही हैं। अपराध लगातार बढ़ते ही जा रहे हैं। हत्या, बलात्कार, लूट और वाहन चोरी जैसे क्राइम पर नकेल कस पाने में पुलिस असफल है। उत्तर प्रदेश में एक मार्च से 15 अप्रैल के बीच 669 हत्याएं, 35 डकैती, 263 बलात्कार, 429 लूट और वाहन चोरी के 3256 मुकदमे दर्ज हुए हैं। ये आंकड़े  विधानसभा में भाजपा के विधायक सुरेश खन्ना के सवाल के लिखित उत्तर में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने स्वीकार किया कि हां ऐसी घटनाएं घटी हैं। ये आंकड़े 15 अप्रैल तक के ही है।

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.