/सरबजीत की रिहाई से मुकर गया पाकिस्तान..

सरबजीत की रिहाई से मुकर गया पाकिस्तान..

सरबजीत की रिहाई से पाकिस्तान पलट गया है। एक न्यूज़ एजेंसी  की खबर के अनुसार पाकिस्तानी राष्ट्रपति के प्रवक्ता ने देर रात कहा कि रिहाई सरबजीत सिंह की नहीं बल्कि सुरजीत सिंह की होनी है जो पिछले तीन दशक से पाकिस्तान के जेल में बंद है।

सुरजीत सिंह को 1882 में जासूसी के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। उन पर मुकदमा चला और उन्हें मौत की सजा सुनाई गई। 1989 में सुरजीत सिंह को उस वक्त की पाकिस्तानी प्रधानमंत्री बेनजीर भुट्टो की सलाह पर राष्ट्रपति गुलाम इशाक खान ने माफी दी थी। सितंबर 2004 में जेल में 25 बिता लेने के बाद भी सुरजीत सिंह को रिहा नहीं किया गया।
पाकिस्तानी राष्ट्रपति के प्रवक्ता बाबर ने साफ किया कि सुरजीत सिंह ने उम्रकैद की सजा पूरी कर ली है और उन्हें रिहा किया जाएगा। इससे पहले आई खबरों में कहा गया था कि राष्ट्रपति जरदारी ने आदेश दिया है कि अगर सरबजीत ने अपनी सजा पूरी कर ली है, तो उन्हें तुरंत रिहा किया जाए। ऐसा माना जा रहा था कि डॉक्टर खलील चिश्ती की रिहाई के बदले सरबजीत की रिहाई मुमकिन हो पाई।
गौरतलब है कि पाकिस्तान में सरबजीत सिंह पर आरोप लगा था कि पाकिस्तान के कसूर इलाके में हुए एक बम विस्फोट में उनका हाथ था। बम विस्फोट में 14 लोग मारे गए थे। उन्हें 1991 में मौत की सज़ा सुनाई गई थी। सरबजीत सिंह के परिवार वाले उन्हें बेकसूर बताते रहे हैं और कहते रहे हैं कि वे गलती से पाकिस्तान की सीमा में चले गए थे। प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने जरदारी की भारत की यात्रा के दौरान सरबजीत सिंह का मुद्दा उठाया था और उन्हें रिहा करने की मांग की थी। कुछ दिनों पहले भारत ने कई सालों से बंद पाकिस्तानी नागरिक डॉ. खलील चिश्ती को पाकिस्तान जाने की इजाजत दी थी।

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.