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भोजपुरी फिल्मों की अभिनेत्री ट्यूलिप सिंह पहले कास्टिंग काउच की शिकार, अब ठगी के मामले में फरार…

By   /  June 28, 2012  /  7 Comments

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फिल्मों में काम पाने के लिए लड़कियां कुछ भी करने को तैयार रहती हैं, जिसके चलते वे कास्टिंग काउच का शिकार बन जाती हैं. कास्टिंग काउच के लिए बदनाम भोजपुरी फिल्म उद्योग में एक बार फिर से कास्टिंग काउच का मामला सामने आया है। इस बार कथित रूप से कास्टिंग काउच की शिकार हुईं हैं भोजपुरी फिल्मों की अभिनेत्री ट्यूलिप सिंह उर्फ पूनम सिंह उर्फ़ पूर्णिमा। उन्होंने यह दावा एक अखबार को दिए बयान में किया है।

ट्यूलिप ने एक अखबार को दिए बयान में कहा है कि गुजरात के एक बिजनेसमैन से उसके शारीरिक संबंध थे। बिजनेसमैन ने उनकी दो फिल्मों में पैसा भी लगाया था। पूनम ने ये भी कहा है कि उनका दो बार गर्भपात भी हो चुका है। पूनम की मानें तो ‘पहले मैंने बर्दास्त किया, लेकिन बाद में जब बिजनेसमैन ने यूनिट की अन्य लड़कियों को मेरे जरिए अपना शिकार बनाना चाहा तो मैंने मना कर दिया। ऐसे में बिजनेसमैन ने फिल्म में पैसा लगाने से भी मना कर दिया। अब वह मुझे झूठे केस में फंसा रहा है।’

उस बिजनेसमैन ने जब अन्य लड़कियों का शोषण करना शुरू किया तो तब पूर्णिमा ने विरोध किया, लेकिन मामला दर्ज नहीं कराया। पूर्णिमा के साथ कास्टिंग काउच होने के शिकार का मामला तब सामने आया, जब व्यवसायी ने अभिनेत्री और उसके प्रेमी पर ढ़ाई करोड़ का चूना लगाने का आरोप लगाया।

गौरतलब है कि लगभग दो माह पहले ही गुजरात के एक व्यवसायी ने अभिनेत्री पूनम सिंह और उनके लिव इन पार्टनर रमन नायर पर अहमदाबाद में 2.5 करोड़ रुपये का चूना लगाने का आरोप लगाया था। अभिनेत्री का कहना है कि उसे दो बार गर्भपात भी कराना पड़ा है।
ज्वैलर्स के अनुसार दोनों ने उससे 2.5 करोड़ का सोना और डायमंड खरीदे थे लेकिन पैसे नहीं चुकाए। बाद में ज्वैलर को फर्जी चेक पकड़ा दिया था। गुजरात पुलिस पूनम को काफी समय से तलाश कर रही है। वह फिलहाल फरार है।

पूर्णिमा सिंह मूल उत्तर प्रदेश की निवासी है। विवाहित पूर्णिमा की एक बेटी भी है। लेकिन फिल्मों में काम करने के लिए पूर्णिमा वर्षो पहले ही पति व बेटी को छोड़ मुंबई आ गई थी। पूर्णिमा भोजपुरी फिल्मों के सुपरस्टार माने जाने वाले रवि किशन के साथ ‘काली’ नामक फिल्म में नजर आई थी। इसके अलावा वह दो मराठी फिल्में भी कर चुकी है।

 

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About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक “मुखौटों के पीछे – असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष” में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

7 Comments

  1. Dr Shashikumar Hulkopkar says:

    It pronounced in Sanskrit That ” STRIYAS CHERI TUM NA DEVOPI JANTI KUTUH MANAVA”
    means behavior of OF WOMEN IS SO THAT IT CANNOT BE KNOWN SO WHEN THE SITUATION HAS CHANGED THE ACTRESS RAN AWAY FROM THE TRUTH NO WANDER ????

  2. Shyam Arya says:

    What is truth? We should not have waste time for such dirty persons

  3. Shyam Arya says:

    What is truth? We should not have waste time for such dirty persons.

  4. Manoj Pandey says:

    do bacho ki killar hain.

  5. PRAMOD KUMAR WARAY, BALLARSHAH.DIST-CHANDRAPUR. (M.S)INDIA says:

    FILIM mai kya real life hero nahi hira bano yaar ..jo hameshaa chamkta rahe kabhi naa haare aur super star rahe ….filim mai too kai loog aate hai jaate hai naam tak loog bhol jaate hai …

  6. राजीव कुमार सिंह says:

    filmi duniya ki yahi kahani hai.

  7. Ashish Kumar says:

    filmo kr liye apna chodna sahi nai hai.

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