/असर सत्यमेव जयते का: आमिर खान को मिले केन्द्र सरकार से दो सौ करोड के प्रोजेक्ट

असर सत्यमेव जयते का: आमिर खान को मिले केन्द्र सरकार से दो सौ करोड के प्रोजेक्ट

‘सत्यमेव जयते’ के बाद भी नहीं रुकेगा आमिर खान का जन जागरूकता अभियान। स्टार प्लस के चर्चित शो “सत्यमेव जयते” के बाद उनका प्रोडक्शन हाउस अब उन लघु फिल्मों के निर्माण में लगा है जिन्हें वे केंद्र सरकार के ‘विशेष अनुरोध’ पर बना रहे हैं। देश में बाल कुपोषण की भारी समस्या के प्रति जागरूकता लाने की दृष्टि से महिला व बाल विकास मंत्रालय के इस करोड़ों रुपए के प्रचार अभियान का एक बड़ा हिस्सा वे करीब 50 लघु फिल्में और स्पॉट होंगे जो आमिर खान प्रोडक्शंस बनाएगा। Amir Khan

गुरुवार को महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा कि कुपोषण के खिलाफ मुख्य रूप से यह सूचना, ज्ञान और संचार अभियान होगा जिसके केंद्र में आमिर होंगे। इन प्रचार फिल्मों पर काम शुरू हो गया है। प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा समर्थित इस विशाल और बड़े बजट वाले प्रचार अभियान को टीवी, रेडियो और अखबारों के अलावा मोबाइल फोन (एसएमएस) के जरिए जन-जन तक पहुंचाया जाएगा। यह पूछने पर कि इस अभियान से जुडऩे के लिए आमिर खान ने क्या कीमत ली है, उक्त अधिकारी ने कहा कि इस अभियान के लिए आमिर अपनी सेवाएं मुफ्त देंगे लेकिन उनके प्रोडक्शन हाउस को निर्माण लागत के एवज में एक रकम तय हुई है। हालांकि उक्त अधिकारी ने यह स्पष्ट नहीं किया कि वह रकम कितनी है, लेकिन माना जा रहा है कि इस सरकारी अभियान का बजट 200 करोड़ रुपए से भी अधिक है।

मंत्रालय को इस अभियान में सरकार के अलावा यूनिसेफ से भी वित्तीय मदद मिली है और इसके लिए आमिर खान और सरकार के बीच हुआ एक समझौते पर हस्ताक्षर हो चुके हैं। गौरतलब है कि आमिर ने पर्यटन मंत्रालय के लिए भी ‘अतिथि देवो भव’ अभियान किया था। हालांकि उन्होंने वहां भी अपनी सेवाएं मुफ्त दी थीं, लेकिन जनता को जागरूक बनाने वाले उन विज्ञापनों का निर्माण भी उनकी प्रोडक्शन कंपनी ने ही किया था और इसके लिए उनकी कंपनी को कुछ करोड़ रुपए मिले थे।
आमिर के गीतकार मित्र प्रसून जोशी और फिल्मकार मित्र राकेश ओमप्रकाश मेहरा इस फिल्म को बनाने वाले लोग थे। स्टार प्लस पर ‘सत्यमेव जयते’ के निर्माण के लिए भी आमिर की कंपनी को कथित रूप से 4 करोड़ रुपए प्रति एपीसोड मिल रहे हैं। कुपोषण पर आमिर की यह नई पहल फिलहाल निर्माण के चरण में है और इस बार भी प्रसून जोशी इससे जुड़े हैं। मंत्रालय को उम्मीद है कि यह अगले तीन महीनों के भीतर इस अभियान को राष्ट्रीय स्तर पर शुरू कर सकेगा और आमिर खान की उपस्थिति इस अभियान को सफल बनाएगी। इस बारे में पूछने के लिए प्रसून जोशी को भेजे गए एसएमएस का कोई जवाब नहीं मिला।

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.