/ब्रिटिश पत्रकार का यौन शोषण कर मनाया मिस्र के मोहम्मद मुर्सी के राष्ट्रपति चुने जाने का जश्न!

ब्रिटिश पत्रकार का यौन शोषण कर मनाया मिस्र के मोहम्मद मुर्सी के राष्ट्रपति चुने जाने का जश्न!

मिस्र की राजधानी काहिरा के तहरीर चौक पर एक 22 साल की ब्रिटिश पत्रकारिता की छात्रा के साथ भीड़ द्वारा जानवरों जैसा सुलूक करने का मामला सामने आया है। पत्रकार का शारीरिक शोषण उस दौरान हुआ, जब तहरीर चौक पर मिस्र के राष्ट्रपति चुनावों के परिणाम घोषित होने पर जश्न मनाया जा रहा था। 
डेली मेल की एक रिपोर्ट के मुताबिक 22 साल की नताशा स्मिथ ने बताया कि तहरीर चौक पर रिपोर्टिंग के दौरान उस पर कई पुरुषों ने हमला कर दिया। नताशा ने बताया कि हमलावरों ने जबरन उसके कपड़े फाड़ दिए और उसके साथ जानवरों जैसा सुलूक किया। नताशा ने बताया कि लोगों ने उसके पूरे कपड़े उतार दिए और वे जानवरों की तरह उसके निजी अंगों को नोचने लगे। स्मिथ का यह भी कहना है कि भीड़ में मौजूद लोगों ने उसके निजी अंगों से बुरी तरह छेड़छाड़ की।
ब्रिटेन के एक अखबार में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार नताशा दो अन्य लोगों की मदद से बुर्का पहनकर वहां से बचकर निकल पाई। इस वाकये के बारे में अपने ब्लॉग पर लिखते हुए उसने बताया, ‘मैं वहां पर केवल बुरी नजर वाले लोगों को देख पा रही थी। लोग मुझ पर ऐसे भूखे शेरों की तरह टूट पड़े थे, जैसे मैं ताजा मांस हूं।’
गौरतलब है कि यह हादसा बीते रविवार को घटित हुआ, जब पूरे मिस्र में मोहम्मद मुर्सी के राष्ट्रपति चुने जाने पर जश्न का माहौल था। देश के पहले लोकतांत्रिक ढंग से नेता चुने जाने के मौके पर काहिरा के तहरीर चौक पर भी जश्न मनाया जा रहा था और हजारों की संख्या में लोग मौजूद थे।

नताशा स्मिथ, फालमाउथ यूनिवर्सिटी से इंटरनेशनल जर्नलिज्म में मास्टर्स हैं और वे तहरीर चौक पर भीड़ की रिकॉर्डिंग कर रही थी। स्मिथ महिला अधिकारों के मुद्दे पर रिपोर्ट तैयार करने के लिए मिस्र में थी।
स्मिथ पहली पश्चिमी महिला नहीं है जिसका मिस्र में शोषण किया गया है। सीबीएस न्यूज की लारा लोगन पर भी वर्ष 2011 में हमला हो चुका है। मिस्र की पत्रकार मोना एल्टाहवे पर भी भी बीते नवंबर मिस्र के सिक्योरिटी फोर्स द्वारा हमला किया जा चुका है।

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.