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ब्रिटिश पत्रकार का यौन शोषण कर मनाया मिस्र के मोहम्मद मुर्सी के राष्ट्रपति चुने जाने का जश्न!

By   /  June 29, 2012  /  8 Comments

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मिस्र की राजधानी काहिरा के तहरीर चौक पर एक 22 साल की ब्रिटिश पत्रकारिता की छात्रा के साथ भीड़ द्वारा जानवरों जैसा सुलूक करने का मामला सामने आया है। पत्रकार का शारीरिक शोषण उस दौरान हुआ, जब तहरीर चौक पर मिस्र के राष्ट्रपति चुनावों के परिणाम घोषित होने पर जश्न मनाया जा रहा था। 
डेली मेल की एक रिपोर्ट के मुताबिक 22 साल की नताशा स्मिथ ने बताया कि तहरीर चौक पर रिपोर्टिंग के दौरान उस पर कई पुरुषों ने हमला कर दिया। नताशा ने बताया कि हमलावरों ने जबरन उसके कपड़े फाड़ दिए और उसके साथ जानवरों जैसा सुलूक किया। नताशा ने बताया कि लोगों ने उसके पूरे कपड़े उतार दिए और वे जानवरों की तरह उसके निजी अंगों को नोचने लगे। स्मिथ का यह भी कहना है कि भीड़ में मौजूद लोगों ने उसके निजी अंगों से बुरी तरह छेड़छाड़ की।
ब्रिटेन के एक अखबार में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार नताशा दो अन्य लोगों की मदद से बुर्का पहनकर वहां से बचकर निकल पाई। इस वाकये के बारे में अपने ब्लॉग पर लिखते हुए उसने बताया, ‘मैं वहां पर केवल बुरी नजर वाले लोगों को देख पा रही थी। लोग मुझ पर ऐसे भूखे शेरों की तरह टूट पड़े थे, जैसे मैं ताजा मांस हूं।’
गौरतलब है कि यह हादसा बीते रविवार को घटित हुआ, जब पूरे मिस्र में मोहम्मद मुर्सी के राष्ट्रपति चुने जाने पर जश्न का माहौल था। देश के पहले लोकतांत्रिक ढंग से नेता चुने जाने के मौके पर काहिरा के तहरीर चौक पर भी जश्न मनाया जा रहा था और हजारों की संख्या में लोग मौजूद थे।

नताशा स्मिथ, फालमाउथ यूनिवर्सिटी से इंटरनेशनल जर्नलिज्म में मास्टर्स हैं और वे तहरीर चौक पर भीड़ की रिकॉर्डिंग कर रही थी। स्मिथ महिला अधिकारों के मुद्दे पर रिपोर्ट तैयार करने के लिए मिस्र में थी।
स्मिथ पहली पश्चिमी महिला नहीं है जिसका मिस्र में शोषण किया गया है। सीबीएस न्यूज की लारा लोगन पर भी वर्ष 2011 में हमला हो चुका है। मिस्र की पत्रकार मोना एल्टाहवे पर भी भी बीते नवंबर मिस्र के सिक्योरिटी फोर्स द्वारा हमला किया जा चुका है।

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About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक “मुखौटों के पीछे – असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष” में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

8 Comments

  1. Aradhna Shukla says:

    I am sorry that you dint understand what I wrote..so going to write that again 'Some countries no matter how much they shout that they are democratic they simple are not.. There can never be a democracy until the women are treated equally to men in any country.In these countries society does n't respect women, women are treated no better than animals..and nobody can change this unacceptable situation except those very women who are being treated unfairly.''The way a man treats a woman tells how this particular man was brought up by his mom..''

  2. asali chehra hai turko ka.

  3. MAGR YE NATASAA JI YE BHOOL GAYEE KI YE JANWARO KI MANDI MAI KHADI THI MUSALMAN ABIKSHIT AADHE ADHURE HYAWAN HAI YE ASABHAYA ORR SAITANO KI NA JAZAYAZ OULADE HAI IEN PAR BHAROSHA NAHI KARNA CHAHIYE.

  4. Vijay Nagar says:

    KYA BOLA KUCH bhi samjh mein nahi aaya aap ki baat

  5. शर्मनाक. इस घटना की जितनी भी निंदा की जाए, कम है. मिश्र के नवनिर्वाचित सरकार को सबसे पहला काम यही करना चाहिए की इसकी तत्काल जांचकर दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा दे. वर्ना लोग तहरीर चौक को स्वतंत्रता का सबसे प्रमुख स्तंभ के बजाय मनुष्य की पाशविकता के चौक के रूप में ना याद करें………

  6. Aradhna Shukla says:

    I completely agree..ye kuch aise desh hain jo kitna bhi loktantrikta ka dhol peet len..aurto ki izzat kabhi karna nahi sikh payege..aurat ka status in deshon mein janwaron se badtar hai…aur ye koi nahi badal sakta jab tak ki aurtein khud khadi nahi hoti apne prati kiye ja rahe atyacharon ke khilaf..

  7. Mohit Jhamb says:

    It's very shameful act done by the peoples.

  8. koi ek vaykti ho to kahe ki kitana bura tha….per badhawas bheed ke kratya se us desh ki bhrast snskrati ka pata chalta hai…

पाठक चाहे आलेखों से सहमत हों या असहमत, किसी भी लेख पर टिप्पणी करने को स्वतंत्र हैं. हम उन टिप्पणियों को बिना किसी भेद-भाव के निडरता से प्रकाशित भी करते हैं चाहे वह हमारी आलोचना ही क्यों न हो. आपसे अनुरोध है कि टिप्पणियों की भाषा संयत एवं शालीन रखें - मॉडरेटर

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