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CBI द्वारा बीएस लाली को क्लीन चिट देने की तैयारी

By   /  June 30, 2012  /  No Comments

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सीबीआइ ने राष्ट्रमंडल खेलों के प्रसारण अधिकार मामले में प्रसार भारती के पूर्व सीईओ बीएस लाली को क्लीनचिट देने की तैयारी कर ली है। शुंगलू कमेटी की रिपोर्ट पर प्रधानमंत्री कार्यालय ने मामला जांच एजेंसी को सौंपा था। साल भर की जांच के बाद सीबीआइ का कहना है कि आरोपों में कोई दम नहीं है और फैसले सामूहिक और विवेकपूर्ण तरीके से लिए गए।

सूत्रों के मुताबिक लाली के खिलाफ धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश के मामले में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल करने का फैसला किया गया है। प्रसार भारती ने 246 करोड़ रुपये का अधिकांश बजट एसआइएस को खेलों के प्रसारण के लिए दिया था। एसआइएस ने यह काम सिर्फ 176 करोड़ रुपये में जूम को दे दिया। इस तरह सरकार को 100 करोड़ रुपये का चूना लगा। सीबीआइ ने लाली और जूम कम्यूनिकेशंस के एमडी वसीम देहलवी के खिलाफ केस दर्ज किया था। देहलवी ब्रिटिश कंपनी एसआइएस लाइव के रेजीडेंट डायरेक्टर भी हैं। आरोपों के बाद लाली को निलंबित कर दिया गया था। सीबीआइ अब कह रही है कि प्रसार भारती ने भुगतान के समय कोई बदलाव नहीं किया। संविदा के मसौदे में बदलाव भी एसआइएस को लाभ पहुंचाने के मकसद से नहीं किया गया था। कांट्रैक्ट के अंतिम प्रारूप पर सॉलिसिटर जनरल की सहमति थी। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की अगुआई वाली निगरानी समिति ने इसे मंजूर किया था।

सूत्रों के मुताबिक संविदा के स्पष्ट तौर पर एसआइएस के पक्ष में होने के बावजूद यह एक सामूहिक प्रशासनिक निर्णय था। राष्ट्रमंडल के 17 में 10 खेलों को कवर न करने के दूरदर्शन के फैसले में भी सीबीआइ को जांच में कोई खामी नहीं मिली।

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  • Published: 5 years ago on June 30, 2012
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  • Last Modified: July 4, 2012 @ 3:20 am
  • Filed Under: मीडिया

About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक “मुखौटों के पीछे – असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष” में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

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