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लड़कियाँ ज्यादा तेज होती हैं पार्टनर को चीट करने में!

By   /  June 30, 2012  /  10 Comments

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प्रेम संबंधों में पार्टनर को चीट करने के मामले में लड़कियां कहीं ज्यादा स्मार्ट होती हैं, जबकि लड़के बुद्धू। जी ये हमारा नहीं, हाल ही में हुई एक बड़ी रिसर्च का कहना है।

इस बात को लेकर अच्छी खासी बहस हो सकती है कि रिलेशनशिप में चीट करने के मामले में लड़के-लड़कियों में कौन आगे है। लेकिन एक सर्वे की मानें, तो इस मामले में लड़कियां आगे हैं। खास बात यह है कि वे अपने पार्टनर इस बात की भनक भी नहीं लगने देती कि उन्हें चीट किया जा रहा है जबकि, बेचारे पुरुष किसी और से रिलेशन बनाने पर अक्सर पकड़ में आ जाते हैं।

सर्वे में बताया गया है कि तकरीबन अपने पार्टनर को धोखा देने के मामले में 100 फीसदी महिलाएं एक्सपर्ट होती हैं। यही वजह है कि वे चीटिंग करने के बावजूद पकड़ी नहीं जातीं, जबकि वह दूसरे के साथ पकड़ी नहीं जातीं। लेकिन इसके मुकाबले सिर्फ 83 पर्सेंट मेंस ही ऐसे हैं, जो चीट करने पर पकड़े नहीं जाते। गौरतलब है कि यह रिसर्च एक डेटिंग वेबसाइट, अंडरलवर्स डॉट कॉम ने करवाई थी।

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टू-टाइमिंग में स्मार्ट
यह जानना दिलचस्प है कि आखिर गर्ल्स खुद को पाक-साफ कैसे दिखा पाती हैं। इस बारे में डीयू के नॉर्थ कैंपस की स्टूडेंट श्रुति कहती हैं, ‘पुराना पार्टनर तो मेरे साथ में है ही और हाल ही में एक नए की एंट्री भी हो गई। पुराने वाले से मैं नॉर्थ कैंपस में ही मिलती हूं, तो नए वाले के साथ सीपी या साउथ के एरियाज में साथ होती हूं।’

चाहे जो भी हो, लेकिन एक से ज्यादा पार्टनर के साथ रिलेशन मुश्किल तो है। ऐसे में कभी भी आपके सिर पर तलवार लटकी रहती है, लेकिन ये लड़कियां हैं कि इन्हें किसी चीज का डर नहीं हैं। बीकॉम सेकंड ईयर की डिंपल की मानें, तो उनके लिए यह चुटकियों का काम है। वह कहती हैं कि उनके एक नहीं, तीन फ्रेंड्स हैं। उन्होंने तीनों के नाम मोबाइल में अपनी गर्ल फ्रेंड्स के नामों से सेव किए हैं। हां, इन तीनों को अपने एफबी अकाउंट पर ऐड नहीं किया हुआ है।

‘कुछ अच्छे’ की तलाश
हालांकि एक से ज्यादा बॉयज के साथ इनवॉल्व होने के पीछे सबकी अपनी वजहें हैं। इस बारे में गुड़गांव की एक एमएनसी में काम करने वाली हिना कहती हैं, ‘पहले, मैं जब भी अपने बॉयफ्रेंड से मिलने के लिए कहती थी, तो उसके पास टाइम ही नहीं होता था। ऐसे में जब किसी और ने ऑफर किया, तो मैंने हां कर दी। अब दोनों में से एक का टाइम तो मेरे फ्री टाइम से मैच कर ही जाता है। और फिर कई ऐसी अच्छी बातें होती हैं जो पुराने में नहीं हैं, नए वाले में हैं।’

कई बार इन्हें यह भी लगता है कि अगर लड़के ऐसा कर सकते हैं, तो हम क्यों नहीं? इस बारे में एक मैनेजमेंट एग्जिक्यूटिव श्वेता कहती हैं कि बहुत कम लड़के ऐसे होते हैं जो किसी एक लड़की के साथ इन्वॉल्व होते हैं। फिर लड़कियां एक से ज्यादा रिलेशन रख लें, तो यह गलत क्यों है?

स्मार्टनेस पर हैरान बॉयज
वैसे, वुमन के इस स्मार्टनेस से मेंस भी हैरान हैं। साउथ कैंपस में बीएससी के स्टूडेंट अमित कहते हैं, ‘मेरे फ्रेंड की गर्लफ्रेंड के दो अफेयर थे। यह मुझे तब पता चला जब मैंने उसे किसी दूसरे के साथ कैफे में देखा। असल में, वह लड़की मेरे फ्रेंड को इतने प्यार और सादगी से हैंडल करती है कि उसे कुछ पता नहीं चलता।’

…और मात खा जाते हैं लड़के
आखिर क्या वजह है कि बॉयज इस मामले में गर्ल्स जैसे नहीं बन पाते। इस बारे में एक प्रॉडक्शन हाउस में काम करने वाले मैनेजर अभिषेक का कहना है कि लड़के चीजों को ज्यादा सीरियसली नहीं लेते। वे लाइट मूड में रहना पसंद करते हैं। इसलिए वे इन चक्करों में मात खा जाते हैं। लेकिन उन्हें पकड़े जाने पर भी कोई प्रॉब्लम नहीं होती। शायद इसीलिए वह खुद को बचाने के लिए ज्यादा एफर्ट्स भी नहीं करते।

तो क्या अपनी गर्लफ्रेंड को दूसरे लड़के के साथ देखने पर उन्हें बुरा नहीं लगता? इसका जवाब देते हुए अभिषेक कहते हैं कि अगर लड़का सीरियस है, तो बुरा लगता है। अगर वह भी टाइम पास कर रहा तो, बुरा क्यों लगेगा?

जेंडर का मामला नहीं
एक्सर्पट्स के मुताबिक, इस इशू को जेंडर से जोड़कर देखना सही नहीं है। सायकायट्रिस्ट समीर पारीख कहते हैं, यह तो इंडिविजुअल पर डिपेंड करता है कि उसे कैसे सिचुएशन हैंडल करनी है। वहीं, दूसरे पार्टनर में कुछ अच्छा दिखे, तो अपनी लॉन्ग टर्म प्रायॉरिटी भी देखनी चाहिए।

(गरिमा शर्मा – नभाटा)

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About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक “मुखौटों के पीछे – असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष” में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

10 Comments

  1. Kumar Ajay says:

    wat u think frnds

  2. Vipin Mehrotra says:

    bad translation in English

  3. Kumar Ajay says:

    Jitane bhee relation rakho imaandaari poori rakho, nothing else. Enjoy with your relations guys………

  4. Vijay Nagar says:

    rupali ji ……….. itani impress ho sahab se

  5. ok inspector sahab…

  6. sir ka kahna un ladkiyo ke liye hai jo pyaar ko majak samajhti hai unke sath yahi karna chahiye aap bura mat maniye

  7. what a rubbish sir ….lat mar do…lat hi marni hai to patate kyu ho….nd what is da meaning ENJOY!!!!……….

  8. Dr Shashikumar Hulkopkar says:

    IF she wants to flu rt, has lot scope as any YOUNGEST TO OLDEST MEN ARE INTERESTED for cheap sex-activity, Nature had given them such attraction at body shape, &smile any man can be come into clutches

  9. Ranjay Singh Monu says:

    apna though manana hai ladki patao injoy or laat mar do fir next to be continu……… sir

    free advise for boys lena hai lo warna.

    mai though aisa hi hu.

  10. Raj Radhe says:

    Be Careful boys!

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