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सरबजीत सिंह ने कबूल किया इस्लाम और बना सरफराज़!

By   /  June 30, 2012  /  3 Comments

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क्या सरबजीत सिंह अपना धर्म परिवर्तन कर चुका है? यदि हम  तीस साल पाकिस्तान की कोट लखपत जेल  से रिहा होकर  आये सुरजीत सिंह की बात माने तो, जी हाँ!

पाकिस्तान की जेल से 30 साल बाद छूटे सुरजीत सिंह ने खुलासा किया है कि लाहौर की कोट लखपत जेल में बंद सरबजीत सिंह ने फांसी से बचने के लिए इस्लाम कबूल कर लिया है.

सुरजीत के मुताबिक सरबजीत ने अपना नाम बदलकर सरफराज़ रख लिया है. सुरजीत के मुताबिक फांसी की सजा पाए एक दूसरा भारतीय कैदी कृपाल सिंह भी धर्म बदल चुका है. उसने अपना नाम मोहम्मद दीन रखा है.

शिरोमणी गुरुद्वारा प्रबंधक कमिटी के इंफर्मेशन सेंटर में रिपोर्टर्स से बात करते हुए सुरजीत ने कहा, ‘सरबजीत और कृपाल सिंह ने इस्लाम कबूल कर लिया है. उन्होंने फांसी की सजा माफ होने की उम्मीद में ऐसा किया है. लेकिन उन्हें माफी नहीं दी गई. पाकिस्तान के अधिकारी अपने लोगों को भी माफी नहीं देते हैं. ‘

उधर, सरबजीत की बहन दलबीर कौर ने सरबजीत के इस्लाम कबूल करने की बात को गलत बताया है. उन्होंने कहा, ‘यह सही नहीं है. सरबजीत गुरुसिख हैं और वह गुरुसिख ही रहेंगे. सरबजीत ने जेल में सिख गुरुओं की तस्वीरें और धार्मिक किताबें रखी हुई हैं. वह इन किताबों का रोज पाठ करते हैं.’

दलबीर ने कहा कि जब वह सरबजीत से मिलने पाकिस्तान की जेल में गई थीं, तो वह कृपाल सिंह को मुस्लिम नाम से पुकारा जा रहा था. लेकिन सरबजीत के बारे में यह सच नहीं है. दलबीर के मुताबिक पाकिस्तान के अधिकारी सरबजीत को सरबजीत या फिर मंजीत कहकर बुला रहे थे.

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  • Published: 5 years ago on June 30, 2012
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  • Last Modified: July 1, 2012 @ 12:10 am
  • Filed Under: धर्म

About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक “मुखौटों के पीछे – असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष” में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

3 Comments

  1. one has to save his life , by changing the religion or by curtsy of some one " SIR SALMAT TO PAGDI PCHAS"?

  2. भारत सरकार भारत मे तो हिंदुओं कि रक्षा कर नहीं पा रही है….पाकिस्तान मे क्या खाक करेगी…….

  3. India govt.wake up, indian people wake up.do somthing for s-t.

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