/अब ट्रेलर नहीं महंगाई की पूरी फिल्म देखो!

अब ट्रेलर नहीं महंगाई की पूरी फिल्म देखो!

अब तक तो आपने महंगाई का ट्रेलर ही देखा था अब आपको महंगाई की असली फिल्म दिखाई पड़ेगी। रविवार से कोचिंग क्लासेस और प्रशिक्षण केंद्र से लेकर होटल में खाने-पीने और हवाई यात्रा तक सभी पर महंगाई की मार पड़ गई है। एक जुलाई से सेवाकर की नई व्यवस्था लागू हो गई है। इसी के साथ ज्यादातर सेवाएं सेवाकर के दायरे में आ गई हैं। नकारात्मक सूची को छोड़कर अन्य सभी सेवाओं पर आज से 12 प्रतिशत सेवाकर लागू हो गया है।

सरकार ने सेवाओं की नकारात्मक सूची को छोड़ अन्य सभी सेवाओं पर सेवाकर लगाने का फैसला किया है। नकारात्मक सूची में 38 सेवाओं को रखा गया है। इस सूची में मीटर से चलने वाली टैक्सी, ऑटो रिक्शा, जुआ, लॉटरी, मनोरंजन पार्क में प्रवेश, यात्री और माल परिवहन व विद्युत कंपनियों द्वारा बिजली वितरण सेवाएं शामिल हैं। यानी इन पर सेवाकर नहीं पड़ेगा। इनके अलावा अंत्येष्टि क्रिया, दफनाना और शव वाहन सेवाओं को भी इससे मुक्त रखा गया है। कोचिंग क्लासेज और प्रशिक्षण केंद्रों को सेवाकर के दायरे में लाया गया है। वहीं, स्कूलों, विश्वविद्यालयों और अनुमति प्राप्त व्यासायिक पाठ्यक्रमों की शिक्षा को सेवाकर के दायरे से बाहर रखा गया है।

फिलहाल, रेल माल ढुलाई और यात्री किराए में रविवार से सेवाकर लगने को लेकर भ्रम की स्थिति बनी हुई है। रेलमंत्री मुकुल राय ने कहा है कि रेलवे एक जुलाई से माल भाड़ा और यात्री किराए पर सेवाकर नहीं लगाएगा। इस बाबत उन्होंने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को पत्र लिखा है, जिनके हाथों में ही इस समय वित्त मंत्रालय की कमान भी है। 2012-13 का बजट पेश करते हुए पूर्व वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने सेवाकर के दायरे को बढ़ाने का एलान किया था। इसमें सेवा की परिभाषा को व्यापक बनाया गया है। अब तक 119 सेवाएं सकारात्मक सूची में शामिल थीं और उन्हीं पर सेवाकर लगाया जाता रहा है। सेवाकर के दायरे को व्यापक बनाने की सरकार की सोच को वस्तु एवं सेवाकर [जीएसटी] की दिशा में एक कदम और आगे बढ़ने के तौर पर देखा जा रहा है। सरकार व स्थानीय प्राधिकरणों को एयरक्राफ्ट की मरम्मत और रखरखाव के लिए दी जाने वाली सेवाओं को भी नकारात्मक सूची में रखा गया है। इसी तरह वकीलों द्वारा दूसरे वकीलों और दस लाख रुपये तक का टर्नओवर रखने वाले व्यावसायिक संस्थानों को भी सेवाकर के दायरे से मुक्त रखा गया है। सार्वजनिक शौचालय भी इसके दायरे में नहीं रहेंगे। जवाहरलाल नेहरू राष्ट्रीय नवीकरण मिशन [जेएनएनयूआरएम] व राजीव आवास योजना जैसी स्कीमों को भी नकारात्मक सूची में रखा गया है। वित्त मंत्रालय ने चालू वित्त वर्ष में सेवाकर से 1.24 लाख करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य रखा है।

कुल मिला कर सेवाकर के इस जाल से जहाँ मनमोहिनी सरकार के खजाने की बल्ले बल्ले होने वाली है वहीँ पहले से महंगाई की मार से दबे कुचले आम भारतीय का अब कोई धनी धौरी नहीं दिखता.

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.