/फर्जी FIR के जरिये भड़ास के सम्पादक यशवंत सिंह को गिरफ्तार करवाया!

फर्जी FIR के जरिये भड़ास के सम्पादक यशवंत सिंह को गिरफ्तार करवाया!

साक्षी जोशी एवं विनोद कापडी का चर्चित फ़ोटो

टीवी चैनल, अखबार और कारपोरेट मीडिया घरानों की काली करतूतो को उजागर करने और पत्रकारो के पक्ष मे संघर्ष करने वाले न्यूज पोर्टल bhadas4media के संपादक संपादक यशवंतसिंह को कल दिन के बारह बजे नोयडा सेक्टर 49 की पुलिस ने गिरफ़तार कर लिया.भडास मीडिया के क्षेत्र का चर्चित पोर्टल है. यशवंत के खिलाफ़ साक्षी जोशी नामक एक महिला पत्रकार ने धारा 341, 386 एवं धारा 506 के तहत का मुकदमा दर्ज किया है। साक्षी ने यशवंत के ऊपर यह आरोप लगाया है कि यशवंत ने उनको जान मारने की धमकी देकर पैसे की मांग की.

यशवंत सिंह की गिरफ्तारी समाचार प्‍लस चैनल के सामने सेक्‍टर 63 में हुई, जिसके गवाह उस समय ऑफिस के बाहर खड़े तमाम पत्रकार हैं. लेकिन उनकी गिरफ्तारी भंगेल से दिखाई गई. और तो और रंगदारी और वसूली की मनगढंत कहानी बनाकर पुलिस ने एक बार फिर अपनी विश्‍वसनीयता पर प्रश्‍न चिन्‍ह खड़ा कर दिया है. गिरफ्तारी के बाद थाना सेक्‍टर 49 में यशवंत सिंह को न तो गिरफ्तारी का कारण बताया गया ना ही उनको किसी से मिलने या फोन करने दिया गया. तमाम पत्रकारों के दबाव के बाद 1 जुलाई को दिन में दस बजे पहली बार पुलिस यशवंत सिंह को सामने लाई.

साक्षी इंडिया टीवी के मैनेजिंग डायरेक्टर विनोद कापडी की पत्नी हैं. इन दोनो पति-पत्नी का प्रेम स्कैंडल कभी वेब मीडिया मे काफ़ी चर्चित हुआ था. शादी के पहले साक्षी इंडिया टीवी में एंकर थी तथा विनोद कापरी मैनेजिंग डायरेक्टर. यह घटना वर्ष 2010 की है. उस समय इन दोनो की एक तस्वीर ने मीडिया जगत में अच्छा – खासा तुफ़ान खडा कर दिया था. उक्त तस्वीर में साक्षी तथा कापरी दोनो एक दुसरे से लिपटे हुये थें.

यशवंत सिंह

हालांकि देखा जाय तो यह कोई खास खबर नही थी , परन्तु मामला एक हीं चैनल में काम करनेवाले एंकर और मैनेजिंग डायरेक्टर के बीच का था इसलिए इस तस्वीर को टीवी चैनल द्वारा महिला पत्रकार के शोषण के रुप में दर्शाया गया. बाद में नंवबर 2010 में दोनो ने शादी कर ली. साक्षी ने इंडिया टीवी बीबीसी हिंदी और फिर आइबीएन-7 ज्वाइन कर लिया। शादी के बाद यह बाद यह बात आई गई हो गई , परन्तु इस बात का खुलासा आज तक नही हो पाया कि क्या इस तस्वीर के सामने आने के कारण अपने पत्रकारिता के कैरियर का ख्याल करके कापरी ने शादी की या वाकई दोनो का पहले से शादी का इरादा था. साक्षी और कापरी की अंतरंग तस्वीर और उनदोनो से संबंधित समाचार को भडास ने भी अपने साइट्स पर प्रकाशित किया था. बाद में मीडिया क्षेत्र के धुरंधरो के दबाव के कारण यह समाचार भड़ास पर से हटा दिया गया था. एक अन्य पत्रकार ऋषि पांडे जो टोटल टीवी के आउटपुट हेड थें उनके उपर इस तस्वीर को लीक करने का आरोप लगा था. दोनो की शादी हो जाने के बाद ऋषि पांडे ने साक्षी जोशी, विनोद कापड़ी और साक्षी जोशी के पिता उमेश जोशी के खिलाफ दिल्ली के पटियाला हाउस कोर्ट में इंडियन पैनल कोड की धारा 120B/34/499/500 (IPC) के तहत केस दर्ज करवाया. उमेश जोशी टोटल टीवी के एडीटर थें. उमेश जोशी के कार्यकाल मे टोटल टीवी मे काम करनेवाली एक पत्रकार प्रिया सिंह ने आत्महत्या कर ली थी. ऐसा बताया जाता है कि प्रिया सिंह ने अपने सुसाइड नोट में उमेश जोशी एवं तपन राय भारती को जिम्मेवार ठहराया था. प्रिया सिंह ने कारण बताया था कि उमेश जोशी नही चाहते थें कि प्रिया एंकरिंग करे क्योंकि अगर वह एंकरिंग करती तो उमेश जोशी की बेटी साक्षी की पूछ कम हो जाती और इसी कारण से उमेश जोशी ने टोटल टीवी के मालिक विनोद मेहता को प्रिया सिंह के खिलाफ़ भडकाया था.

इस नये घटना क्रम में यशवंत सिंह के उपर मुकदमा करने का कारण वही पुरानी अदावत है. जानकार सूत्रो के अनुसार कल किसी बात पर साक्षी एवं यशवंत सिंह के बीच फ़ोन पर नोक झोंक हो गई. पुरानी खुन्नस तो थी हीं , साक्षी ने मौका अच्छा देखा और यशवंत के खिलाफ़ मुकदमा कर दिया. समाचार लिख जाने तक यशवंत सिंह थाने मे बैठे थे. हमने साक्षी जोशी को मेल भेजकर उनका पक्ष जानने का प्रयास किया , परन्तु अभी तक जवाब न आने के कारण हम उनका पक्ष नही दे पा रहे हैं. हमने इंडिया टीवी के कार्यालय मे फ़ोन करके विनोद कापरी का पक्ष जानने का भी प्रयास किया परन्तु विनोद कापरी अभी तक अपने कार्यालय नही पहुंचे थें. ऐसा बताया जाता है कि पहले भी 2008 मे विनोद कापरी के साथ यशवंत का विवाद हुआ था लेकिन आपस मे हीं मामला सुलझ गया था.

खुद यशवंत सिंह जो कहानी बता रहे हैं वह यह है कि इसमें कोई दो राय नहीं है कि उन्होंने उस संपादक को फोन किया था जिसका नाम विनोद कापड़ी है. विनोद कापड़ी इंडिया टीवी के प्रबंध संपादक हैं और शुक्रवार की देर रात यशवंत सिंह ने पहले विनोद कापड़ी के मोबाइल पर फोन किया. फोन नहीं उठा तो उन्होंने विनोद कापड़ी की पत्नी साक्षी के नंबर पर डायल कर दिया. खुद यशवंत सिंह कहते हैं कि साक्षी ने इसका विरोध किया कि इतनी रात में किसी के मोबाइल पर फोन करने का यह कौन सा तरीका है? खैर इसके बाद दो चार एसएमएस दोनों तरफ से आये गये और दोनों अपनी अपनी जगह शांत हो गये.

सुबह एक बार फिर शुरूआत यशवंत सिंह ने की. उन्होंने साक्षी जोशी को एक एसएमएस भेजा कि असल में रात में उन्होंने एक जरूरी काम से फोन किया था. उन्होने नोएडा में एक घर बुक किया है और उसकी किश्त अदा करने के लिए पैसे इकट्ठा कर रहे हैं इसलिए मित्रों से मदद मांग रहे हैं. उन्होंने बीस हजार रूपये के मदद की बात एसएमएस में कही. यशवंत सिंह ने बड़ी सादगी से स्वीकार किया कि वे तो रात की घटना का पैच अप करने के लिए सुबह पैसे वाली बात कर रहे थे लेकिन यही बात उन्हें भारी पड़ गई. इसके बाद आनन फानन में क्या हुआ मालूम नहीं लेकिन शनिवार को यशवंत सिंह को उस वक्त गिरफ्तार कर लिया गया जब वे समाचार प्लस के नोएडा स्थित दफ्तर से बाहर आ रहे थे. यशवंत सिंह खुद कहते हैं कि लगता है पुलिस उनके फोन को सर्वेलेन्स पर लिए हुए थी और उनके नंबर पर एक फाल्स काल आई जिसके बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया.

हमारी जानकारी के अनुसार यशवंत ने कभी हथियार नहीं रखा और यशवंत के पास से कोई हथियार बरामद भी नहीं हुआ है. इस हालात मे यह कहना कि यशवंत ने जान से मारने का भय दिखाकर रंगदारी मांगी, हास्यापद लगता है. आज अभी एक बजे यशवंत को कोर्ट में पेश किया गया है. दिल्ली के नई मीडिया के पत्रकार, युवा पत्रकार कोर्ट परिसर मे मौजूद हैं. विस्फोट के संपादक संजय तिवारी, वरिष्ठ पत्रकार शेष नारायन सिंह यशवंत के साथ हैं. जैसे हीं न्यायालय का कोई निर्णय आता है हम आपको उससे अवगत करायेंगें.
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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.