/पुलिस के लिए अब पत्रकार आसान शिकार..

पुलिस के लिए अब पत्रकार आसान शिकार..

वेब मीडिया के पत्रकार यशवंत सिंह और मुकेश भारतीय की गिरफ्तारी के बाद पुलिस के लिए अब पत्रकार  आसान शिकार बनते जा रहे हैं.  झारखंड के पूर्वी सिंहभूम के जादूगोड़ा से खबर है कि दैनिक जागरण के स्‍थानीय संवाददाता सुशील अग्रवाल की एक खबर से नाराज जादूगोड़ा के थानाध्‍यक्ष ने उनको जेल में डालने की धमकी दी है.

सुशील ने इस संबंध में एसपी को पत्र लिखकर मामले की जांच करवाने तथा अपनी सुरक्षा किए जाने की मांग की है. सुशील का कहना है कि यह धंधा बहुत दिनों से चल रहा था, परन्‍तु थानाध्‍यक्ष बराबर इससे इनकार करते थे. नए थाना प्रभारी के छापेमारी से सारा भेद खुला. नीचे सुशील द्वारा एसपी को भेजा गया पत्र.

सेवा  में,

आरक्षी अधीक्षक (पूर्वी सिंहभूम)
झारखंड।

विषय  – जादूगोड़ा थाना प्रभारी द्वारा पत्रकार को जेल मे डाल देने की धमकी देने के संबंध में।

महाशय,

सविनय निवेदन यह है कि सुशील अग्रवाल दैनिक जागरण अखबार जादूगोड़ा का संवाददाता हूँ। बीते 02 जुलाई 2012 के अंक में ‘जुआरियों के लिए सेफजोन बना जादूगोड़ा’ शीर्षक से छपा समाचार से बौखला कर जादूगोड़ा थाना प्रभारी नयन सुख दाड़ेल ने मुझे जेल भेजवाने की धमकी दी है। थाना प्रभारी द्वारा पत्रकारों को इस प्रकार की धम्की देना लोकतन्त्र के लिए घातक है। अतः आपसे करवद्ध प्रार्थना है कि इस गंभीर मामले की निष्‍पक्ष जांच हेतु एक कमेटी गठित कर थाना प्रभारी के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाए। यहा बता दें कि जब मैंने शाम को उनसे क्षेत्र का समाचार लेने के लिए 7 बजकर 26 मिनट पर उन्हें फोन किया तो उन्होंने मुझसे कहा कि तू बहुत बड़ा पत्रकार बनता है। जेल जाने के लिए तैयार रहो। कल तुम्हारे घर का ग्रामीण घेराव करेंगे और उसके बाद मैं तुम्हें जेल मे डाल दूंगा।

अतः श्रीमन से प्रार्थना है कि आप इस समाचार को पढ़े और उसके बाद यह निर्णय लें कि मैंने क्या गलत लिखा है। इससे पहले भी जादूगोड़ा क्षेत्र मे बड़े पैमाने पर जुआ चलता था पर थाना प्रभारी इससे इनकार करते थे पर इसके बाद नए इंस्पेक्टर अवधेश कुमार सिंह ने छापेमारी कर बड़े स्तर पर जुयारियों को पकड़ा और जेल भेजा।

प्रार्थी

सुशील अग्रवाल

जादूगोड़ा

 

Facebook Comments

संबंधित खबरें:

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.