/कापड़ी ने माना कि यशवंत ने उधार मांगे थे बीस हज़ार

कापड़ी ने माना कि यशवंत ने उधार मांगे थे बीस हज़ार

इंडिया टीवी के प्रबंध संपादक विनोद कापड़ी ने सी न्यूज़ के मुकेश चौरसिया को दिए गए एक साक्षात्कार में स्वीकार किया है कि भड़ास4मीडिया के संपादक यशवंत सिंह ने मकान की किश्त देने के लिए उनसे बीस हज़ार रुपये उधार मांगे थे. साथ ही कापड़ी ये भी मानते हैं कि वे कभी यशवंत सिंह से नहीं मिले. इसी के साथ वे नोएडा के एसएसपी प्रवीण कुमार का शुक्रिया भी अदा करते हैं कि उन्होंने तत्परता दिखाते हुए शिकायत दर्ज होने के दो घंटे भीतर यशवंत सिंह को गिरफ्तार कर लिया.

इसी के साथ पूरी पोल पट्टी खुल जाती है यशवंत सिंह प्रकरण की. जब यशवंत सिंह और कापड़ी कभी मिले ही नहीं तो यशवंत सिंह ने कब उनकी कार रोक कर बीस हज़ार रुपये मांगे और जान से माँरने की धमकी दी. जिसकी बिना पर यशवंत सिंह पर भारतीय दंड संहिता की 386 जैसी रंगदारी मांगने की गैर जमानती धारा लगाई गयी. जैसा कि खुद कापड़ी स्वीकार करते हैं कि ये सारा प्रकरण फोन और एसएमएस के जरिये हुआ. उनके साक्षात्कार को पूरा सच मान लिया जाये तो भी अपराध सिर्फ रात को बारम्बार फोन और एसएमएस कर तंग करने का बनता है ना कि रंगदारी का.

तो फिर रंगदारी मांगने का झूठा आरोप यशवंत सिंह पर मढने के पीछे किस का दिमाग काम कर रहा था. कहीं ऐसा तो नहीं कि एसएसपी प्रवीण कुमार यशवंत सिंह पर चलते हों और जब विनोद कापड़ी अपनी समस्या लेकर एसएसपी प्रवीण कुमार से मिले तो प्रवीण कुमार ने कापड़ी से शिकायत में कुछ अतिरिक्त बातें जुड़वा ली हों ताकि यशवंत सिंह को पंगा लेने का सबक जोरदार ढंग से सिखाया जा सके साथ ही उनका मनोरथ भी पूरा हो जाये. या फिर प्रवीण कुमार को ऊपर से आदेश हो कि मौका पाते ही यशवंत सिंह को मज़ा चखा दो कि साला सबकी नींद हराम करता है.

यदि ऐसा है तो एसएसपी प्रवीण कुमार पर पद के दुरूपयोग का मामला बनता ही है, साथ ही विनोद कापड़ी की किसी मीडिया संस्थान में किसी उच्च पद पर बने रहने की योग्यता पर भी सवालिया निशान खड़ा कर देता है. इसी के साथ अखिलेश सरकार के प्रवक्ता राजेश दीक्षित के मासूमियत भरे बयान कि “यह अखिलेश सरकार को बदनाम करने की साजिश है” की भी असलियत सामने ला देता है.

इस पूरे षड्यंत्र कि जड़ें कितनी गहरी हैं इसका अंदाज़ इस बात से लगाया जा सकता है कि जैसे ही इस विडियो का लिंक मीडिया दरबार पर प्रसारित किया गया उसके चंद मिनटों बाद यह विडियो यूट्यूब से रिमूव भी कर दिया गया. हालाँकि गूगल.कॉम में vinod kapdi on bhadas4media कीवर्ड खोजने पर यूट्यूब पर इस विडियो के होने के सबूत मिलते हैं लेकिन जैसे ही हम इस लिंक पर क्लिक कर आगे बढ़ते हैं तो हमें विडियो की बजाय पढ़ने को मिलता है कि:

“This video has been removed by the user.

Sorry about that.”
खैर आप पढ़िए विनोद कापड़ी द्वारा मुकेश चौरसिया को दिए गए साक्षात्कार की ट्रांसस्क्रिप्ट:

पूरा मामला क्या था जिसके लिए आपने पुलिस से शिकायत की?

29-30 जून की रात को करीब दो बजे रात के आसपास मेरे मोबाइल पर भड़ास फॉर मीडिया के मालिक यशवंत सिंह के फोन आने शुरू होने लगे….पांच छः बार इन्होने फोन किया मै उस वक़्त सो रहा था मैंने उसके कॉल को रिसीव नही किया, मैंने जब देखा तो उसके 5-6 कॉल थे मैंने उस वक़्त उसका जवाब देना उचित नही समझा. उसके बाद उन्होंने मेरी पत्नी के मोबाइल पर कॉल करना शुरू किया, जब उन्होंने भी फोन नही उठाया तो उसने उनके मोबाइल पर एसएम्एस करना शुरू किया जैसे पहले मैसेज किया हेल्लो मैडम गुड मोर्निंग हाउ आर यू जी….ये सब बड़ा अजीब सा था कि जिसको आप जानते नही हो वो आपको रात के दो बजे फोन कर रहा है एसएम्एस कर रहा है और आपके पत्नी को (एक महिला) को मैसेज कर रहा है….. मेरी पत्नी ने उसका जवाब लिखते हुए मैसेज किया की हुज़ दिस उसने (यशवंत ने) उसका जवाब लिखा की मी यशवन्त…. यशवंत भड़ास….मेरी पत्नी ने दुबारा उनको मैसेज किया की आपको इतनी सेन्स नही है की आप दो बजे रात को किसी महिला को कॉल कर रहे है एसएम्एस कर रहे है . इसका जवाब देते हुए यशवंत ने लिखा हा मै नॉनसेन्स हूँ. हा हा मै नॉनसेन्स हूँ ….मुझे ये मामला बहुत गंभीर लगा तो दूसरे दिन मैंने पुलिस से बात किया जब मै पुलिस से बात कर रहा था तभी यशवंत का एक मैसेज मेरे पास आया कि कल रात को मै आपको और मैडम को फोन कर रहा था मुझे बीस हज़ार रुपये चाहिए थे लेकिन आपकी पत्नी (उसने बहुत व्यंग्य के साथ लिखा कि माता जी नाराज़ हो गयी) नाराज़ हो गयी मुझे बीस हज़ार रुपये चाहिए क्योंकि मैं एक फ्लैट ले रहा हूँ. उसमें मुझे बीस हज़ार रुपये कम पड़ रहे हैं ……ये बहुत ही हैरान कर देने वाली बात थी कि जिसको आप ठीक से जानते नहीं हो जिसके साथ आपका उठना -बैठना नही है, वह आपको दो बजे रात को फोन कर रहा है और अगले दिन एसएम्एस करे की मुझे बीस हज़ार रुपये चाहिए आप दीजिये उसने लिखा की उसे उधार चाहिए लेकिन जिसको आप जानते नही उससे उधार मांग रहे है रात को दो बजे दस बार कॉल कर रहे है एसएम्एस कर रहे है ये कोई तरीका नही है इसलिए पुलिस मे मैंने इसकी शिकायत की….

ऐसा कहा जाता रहा है कि यशवंत अपने वेबसाईट के जरिये बहुत सारे चैनलों से पैसे की उगाही करते थे. इसपर आपका क्या कहना है ?

ये मैंने भी सुना है की यशवंत पैसों की उगाही करता है ये मैंने भी सुना है…..लेकिन आजतक मेरे पास इसका कोई सबूत नही आया है और न ही इससे पहले उसने मुझसे कभी ऐसी बात की थी….ये पहला मौका था जब इन्होने दो बजे रात को मुझे और मेरी पत्नी को फोन और एसएम्एस किया…..आप अपनी वेबसाइट में कुछ भी लिखिए आप पत्रकार है आप स्वतंत्र है इनकी वेबसाइट की भाषा जो लोग मुझे बताते है की जिस भाषा मे वो लिखते है आप कुछ भी लिखिए मुझे उसमे कोई आपत्ति नही है लेकिन आपत्ति ये है कि आप मेरे व्यक्तिगत जीवन मे आकर आपने मुझे और मेरी पत्नी को दो बजे फोन कर रहे है एसएम्एस कर रहे है ये स्वीकार्य नही होगा…..उसके बाद आपकी इतनी हिम्मत की आप दूसरे दिन मुझे मैसेज कर रहे है कि आपको बीस हज़ार रुपये चाहिए…..कही न कही मुझे लगा की उन्होंने मुझे जो फोन किया वो उसी कड़ी का हिस्सा था जो इनके बारे मे कहा जाता है कि ये ब्लैकमेलिंग करते है और उगाही करते है और जो बीस हज़ार रुपये मांगे इन्होने उधार के तौर पर ही सही लेकिन आप बीस हज़ार रुपये क्यों मांग रहे है किस आधार पर मांग रहे है हमारा आपका रिश्ता क्या है……हम आपको बीस हज़ार रुपये दे देंगे लेकिन रात को दो बजे फोन करके लगातार बीस बार उसके बाद कहिये की बीस हज़ार रुपये चाहिए इनके पीछे मंशा ठीक नहीं लग रही….

यशवंत को आप कब से और कितना जानते है…?

मै यशवंत को बिलकुल नही जनता. बल्कि यशवंत की जो एक कहानी है मुझे लगता है कि सबको पता लगना चाहिए इसके बारे मे… यशवंत आज से पांच साल पहले जब वे दैनिक जागरण अख़बार मे काम करते थे और मै उस वक़्त स्टार न्यूज़ मे था, उन्होंने नौकरी के सम्बन्ध मे मुझसे संपर्क स्थापित किया. था जब दो -तीन दिन हो गए, उन्हें ऑफिस से कोई कॉल नही गया होगा तो इन्होने रात को डेढ़ बजे शराब के नशे मे मुझे फोन करना शुरू किया…..मैंने इनको समझाया कि ये जॉब के लिए बात करने का कोई वक़्त नही है तो इन्होने रात को फोन पर गालियां देनी शुरू कर दी. बहुत गन्दी गालियाँ जिसे मै बयां नही कर सकता. उसके बाद जब मैंने इनका कॉल उठाना बंद कर दिया तो इन्होने मुझे एसएम्एस करना शुरू कर दिया……अगले दिन मैंने इनके मालिक दैनिक जागरण के संजय गुप्ता जी को फोन किया और बताया कि सर आपका जो रिपोर्टर है वो नौकरी के लिए फोन करता है वो तो ठीक है लेकिन रात के डेढ़ बजे फोन करता है, गाली देता है जो अस्वीकार्य है …..मै संजय गुप्ता जी का आभार जताऊंगा कि उन्होंने तुरंत करवाई करते हुए एक घंटे के अन्दर उसे नौकरी से निकाल दिया…… यशवंत इस तरह के क्राइम करने वाले हैबीचुअल पत्रकार है जो रात को शराब पी के किसी को भी फोन करते है गालियां देते है और न जाने क्या क्या करते है….

पुलिस के तरफ से क्या कहा गया, क्या कारवाई की गयी ?

नोयडा पुलिस ने काफी अच्छा काम किया जैसे ही हमने शिकायत की उसके दो घंटे के अन्दर नॉएडा के एसएसपी प्रवीण कुमार ने बहुत तत्परता दिखाते हुए एक टीम का गठन किया और यशवंत को गिरफ्तार कर लिया और उन्हें कोर्ट मे पेश किया गया. (यह बातचीत दो दिन पहले की गयी थी)

 

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.