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बावर्ची से पिता बने परवेज ने हत्या की लैला की…

By   /  July 6, 2012  /  1 Comment

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आतंकवादियों से संबंधों से चर्चा में आयी और करीब डेढ़ साल से लापता बॉलीवुड अभिनेत्री लैला खान उर्फ रेशमा पटेल की हत्या हो चुकी है. उसके सौतेले पिता परवेज इकबाल टॉक ने यह दावा किया है. परवेज ने पुलिस को बताया कि नौ फरवरी 2011 को लैला समेत परिवार के पांच सदस्यों की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी.

पाकिस्तान मूल की लैला फिल्म ‘वफा’ में काम कर चुकी है. लापता होने के बाद उसके संबंध आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा से जोड़े जा रहे हैं. उसके दुबई में होने की आशंका भी व्यक्त की गई थी. बुधवार को लैला के पिता ने उसकी गुमशुदगी का मामला दर्ज कराया. डोडा-रामबन रेंज के डीआईजी गरीब दास ने गुरुवार को बताया कि लैला के अपहरण के मुख्य आरोपी परवेज ने हत्या की बात कबूली है.

परवेज कहा कि उसने बॉलीवुड के फाइनेंसर आसिफ शेख उर्फ सोनू, बिल्डर अफगान खान के साथ मिल कर लैला की हत्या की थी. इसके लिए दो शूटर भाड़े पर लिए थे. लैला के साथ उसकी मां सलीमा बेगम पटेल, बहन जारा पटेल, भाई इमरान पटेल तथा चचेरी बहन रेशमा खान की भी हत्या की गई थी. हत्या महाराष्ट्र के ही जंगल में की गई. वहीं, शव दफना दिए गए थे. किश्तवाड़ में लैला की गाड़ी की बरामद होने के बाद परवेज को 21 जून को गिरफ्तार किया था.

दास ने कहा कि जब तक शव बरामद नहीं होते किसी नतीजे पर नहीं पहुंचा जा सकता. अभी पूछताछ जारी है. मुंबई क्राइम ब्रांच की एक टीम पूछताछ के लिए किश्तवाड़ आ रही है.

परवेज ने बताया कि उसने लैला खान के यहां बावर्ची के तौर पर नौकरी की थी. कुछ दिन बाद लैला की मां सलीमा से शादी कर ली. परवेज इससे पहले भी कई दावे कर चुका है. पहले उसने कहा था कि लैला फर्जी पासपोर्ट के जरिये परिवार सहित पाक के रास्ते दुबई जा चुकी है. पुलिस की पड़ताल में यह बात गलत निकली.
परवेज ने बताया कि लैला की मां की संपत्ति हथियाने के लिए उसकी हत्या का साजिश रची गई थी. सलीमा पटेल को यह संपत्ति नादिर पटेल से तलाक के बाद मिली थी.

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About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक “मुखौटों के पीछे – असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष” में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

1 Comment

  1. " MONEY MAKES MAYOR GO' & it is human tenancy to earn it one way or other , thus be3coming in relations with vested interest will bring soon er later this type of crimes , & just prtend inocance.

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