/प्रेमी के साथ मिल माँ का कत्ल किया…

प्रेमी के साथ मिल माँ का कत्ल किया…

दिल दहला देने वाली घटना में एक 16 वर्षीय लड़की ने प्रेम संबंध में बाधक बनी अपनी विधवा माँ की प्रेमी के साथ मिलकर कथित रूप से हत्या कर दी. घटना दो जुलाई की टकली रोड स्थित शंकर नगर की है. हत्या के बाद दोनों लाश को से 70 किमी दूर कसारा घाट में फेंक आए.

पुलिस ने बताया कि आरवायके कालेज में पढ़ने वाली गुरु सिमरन कौर का उसके सहपाठी असलम शेख (17) से प्रेम संबंध था. जब यह बात उसकी मा गुरविंदर कौर को पता चली तो उसने एतराज किया. जिसके बाद पुत्री ने अपनी माँ की ही सुपारी दे डाली. पुलिस ने बताया कि हत्या की साजिश रचने वाला उसका प्रेमी असलम सोमवार को सुबह 7.30 बजे उसके घर पहुंचा. उसके पास धारदार चाकू भी था. सिमरन कौर और असलम के बार-बार सफाई देने पर भी मां नहीं मानी. जिस पर तमतमाये असलम ने सिमरन की मां पर जानलेवा हमला कर दिया. सिमरन ने अपने प्रेमी की मदद करते हुए तकिये से माँ का मुंह बंद कर दिया. हत्या के बाद दोनों लाश को कार से कसारा घाट ले गए और शव का वहां दफन कर दिया.

बद्राकली पुलिस थाने के प्रभारी सीए वारवाकर ने बताया कि इसके बाद लड़की ने खुद बद्राकली पुलिस स्टेशन जाकर अपनी मा की गुमशुदगी की शिकायत की और माँ के भाई को उसके गुम हो जाने की खबर दी. उसी समय थाणे जिले की कसारा पुलिस ने कसारा घाट से शव बरामद किया. लाश के पेट और गर्दन पर घाव पाए गए और उसका गला घोंटकर हत्या किए जाने के संकेत मिले. इसके बाद नासिक की बद्राकली पुलिस ने पाया कि थाने में गुरविंदर कौर की गुमशुदगी की रिपोर्ट लिखाई गई है.

पुलिस ने लड़की को बुलाकर पूछताछ की. पुलिस पूछताछ में लड़की ने स्वीकर कर लिया कि उसने अपने प्रेमी के साथ मिलकर माँ की हत्या की साजिश रची. पुलिस ने बताया कि अपने प्रेमी के साथ संबंधों को लेकर अक्सर उसका माँ से झगड़ा होता था. पुलिस ने दोनों को हिरासत में ले लिया है.

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.