/सच हुई मीडिया दरबार की भविष्यवाणी: प्रशांत टंडन टीम सी-वोटर से आउट

सच हुई मीडिया दरबार की भविष्यवाणी: प्रशांत टंडन टीम सी-वोटर से आउट

 

  • अपकमिंग चैनल CVB का पैकअप…
  • दो दर्ज़न मीडियाकर्मियों की छुट्टी…
  • पहले ही जा चुकी है 28 की नौकरी…

UNI से गठबंधन टूटने के बाद यशवंत देशमुख की न्यूज़ एजेंसी CVB यानि सी-वोटर ब्रॉडकास्ट के हालात दिन ब दिन खराब होते जा रहे हैं। ताज़ा खबर ये है कि इस संस्थान ने अपने नए चैनल के प्रोजेक्ट का पूरी तरह पैकअप कर दिया। चैनल की अग्रिम पंक्ति के लोगों में से चैनल हेड प्रशांत टंडन और सीनियर प्रोड्यूसर शाहिद सईद को गुडबाय कह दिया गया। गौरतलब है कि मीडिया दरबार ने अपने पोर्टल पर पहले भी इस बारे में बताया था। हालांकि तब चैनल से जुड़े लोगों ने इसे अफवाह बताया था।

इसके अलावा दिल्ली ऑफिस से भी कम से कम दस लोगों की नौकरी चली गई है। CVB ने आगरा में भी अपना बड़ा ब्यूरो बना रखा था क्योंकि इस शहर से कंपनी के व्यावसायिक हित जुड़े थे। सी-वोटर का एक बड़ा फायनैंसर आगरा से ही था और उसके हाथ खींचने के बाद ही चैनल बंद करने का फैसला लिया गया। आगरा ब्यूरो बंद होने से एक दर्ज़न मीडियाकर्मियों की नौकरी चले जाने की खबर है।

पटना और दूसरे कई शहरों में भी जहां ब्यूरो बनाए गए थे, वहां से आ रही खबरें भी कंपनी की हालत माली होने की सूचना ही दे रहे हैं। कई ब्यूरो कार्यालयों को या तो समेट लिया गया है या फिर उनमें इक्का-दुक्का स्टाफ ही बचे हैं। हालांकि एजेंसी अभी भी चल रही है, लेकिन उसमें भी स्टाफ कम होने का असर पड़ता दिख रहा है। 

दिलचस्प बात यह है कि इस मुश्किल में भी प्रबंधन के कुछ करीबी माने जाने वाले अपनी नौकरी बचाने में कामयाब हो गए हैं। एक चर्चा यह भी है कि   बाहर किए जाने वालों की लिस्ट बनाने में यशवंत के एक पुराने मित्र उदय चंद्र की चली है। उदय को उसकी पिछली कई नौकरियों के रिकॉर्ड को देखते हुए छंटनी एक्सपर्ट के तौर पर जाना जाता है।

खास बात यह है कि अब तक  CVB से निकाले गए किसी भी मीडियाकर्मी ने हिसाब-किताब में गड़बड़ी की शिकायत नहीं की है।  अब बारी स्ट्रिंगरों के पेमेंट की है जो शुरु से खासा उलझाने वाले गणित के तौर पर जाना जाता है।

Facebook Comments

संबंधित खबरें:

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.