/एक हस्ताक्षर के बदले एक लाख चालीस हज़ार रुपये कमाती थी रोजाना..

एक हस्ताक्षर के बदले एक लाख चालीस हज़ार रुपये कमाती थी रोजाना..

गिरफ्तारी के बाद मुंह छुपाती स्वर्ण लता

कनार्टक की एक महिला शिक्षा अधिकारी स्‍वर्ण लता हर रोज सिर्फ एक हस्ताक्षर से एक लाख चालीस हज़ार रुपये कमाती थी. यह राज फाश लोकायुक्‍त के छापे के बाद हुआ है. प्राइमरी और सेकेंडरी एजुकेशन विभाग की डिप्‍टी सेक्रेटरी स्‍वर्ण लता भंडारी को लोकायुक्‍त पुलिस ने अपने साइन का गलत दुरुपयोग करते हुए रंगे हाथों पकड़ा.

शिक्षा संस्‍थानों के अपनी स्‍कूलों के लिए ग्रांट लिए आने वाली फाईलों के लिए  ‘तुम भुगतान करो, मैं साइन करुंगी’ की नीति के तहत स्‍वर्ण लता हर दिन 1.4 लाख रुपये अपनी तिजोरी में भरती थी. जब तक कोई शिक्षा संस्थान इस रकम का भुगतान नहीं करता, वह  हस्ताक्षर  नहीं करती थी. लोकायुक्‍त में शिकायत आने के बाद जब इस महिला अधिकारी के यहां छापा मारा गया तो सच्‍चाई सामने आ गई.

लोकायुक्‍त मुख्‍यालय से कुछ ही कदमों की दूरी पर स्थित इस कारनामे को अंजाम दिया जा रहा था. पुलिस ने बड़ी संख्‍या में लिफाफे, नकद, नोटबुक और फाइल नंबर वाली चिट बरामद की. इन सभी पर पेड और अनपेड का मार्क बना हुआ था.

स्‍वर्णलता की सच्‍चाई दुनिया के सामने बेलगाम के कुछ लोगो की वजह से आ पाई. बेलगाम के कुछ शिक्षा संस्‍थानों ने अपनी स्‍कूलों के लिए ग्रांट पाने के लिए इस महिला अधिकारी के विभाग में संपर्क किया था. जहां इनसे भी रिश्‍वत मांगी गई. कई दिनों तक धक्‍के खाने के बाद उन्‍हें इस बात का अहसास हो गया कि बिना रिश्‍वत के यहां काम नहीं चलने वाला इसके बाद इन लोगों ने लोकायुक्‍त में शिकायत दर्ज करवा दी.

लोकायुक्‍त ने सबसे पहले स्‍वर्णलता के ऑफिस फिर घर पर छापा मारा. यहां उन्‍हें 600 ग्राम सोना, 6.27 लाख कैश मिला. इसके अलावा पति के बैंक लॉकर में 47 लाख रुपये बरामद किए गए. पुलिस ने स्‍वर्णलता को अरेस्‍ट कर कोर्ट में पेश किया. जहां से उसे नौ जुलाई तक ज्‍यूडिशियल कस्‍टडी में भेज दिया गया.

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.