/शर्मसार हो रही है पत्रकारिता कुछ पत्रकारों के कारण…

शर्मसार हो रही है पत्रकारिता कुछ पत्रकारों के कारण…

कुमार सौवीर||

आइये, आज हम आपको दिखाते हैं पत्रकारिता की किताब के ऐसे गन्‍धाते-स्‍याह-काले पन्‍ने, जिनके चलते पूरी पत्रकारिता को ही शर्मसार होना पड़ा है। ताजा मामला है इंडिया टीवी चैनल के प्रबंध संपादक विनोद कापड़ी और मीडियाखबर डॉट कॉम के संचालक पुष्‍कर पुष्‍प तथा सी-न्‍यूज चैनल के दिल्‍ली पत्रकार मुकेश चौरसिया की करतूतों का। कापड़ी से लिया गया इंटरव्‍यू इन पत्रकारों के चलते भले ही यू-ट्यूब पर रिमूव कर दिया गया हो, लेकिन हमारे पास यह इंटरव्‍यू का फुटेज बाकायदा मौजूद है। लेकिन इन पत्रकारों ने जो भी किया, उससे पत्रकारिता हमेशा लज्जित तो होती ही रहेगी।

मामला था भड़ास4मीडिया डॉट काम के संपादक यशवंत पर रंगदारी वसूलने की कोशिश और अश्‍लील एसएमएस भेजने का आरोप का। नोएडा के दो अलग-अलग पुलिस थानों में दर्ज कराये गए इन दो मुकदमों में इंडिया टीवी के प्रबंध संपादक विनोद कापड़ी दम्‍‍पत्ति ने कई आरोप भी लगाये थे, लेकिन इस वीडियो ने इसी बीच ही यह खुलासा कर दिया कि रंगदारी दरअसल यशवंत सिंह ने नहीं, बल्कि कुछ बड़ेनुमा पत्रकार और चिंटू-पिंटू ने की, जो पहले खबर को चलाते हैं और फिर समझौते के नाम पर बड़ी रकम की डील कर खबरों को दबवा देते हैं।

न्‍यूज चैनल और पोर्टल के नाम पर चल रहे गंदे धंधे के खुलासे से अब एक नया हंगामा उठ गया है जब सी-न्यूज नाम के एक न्यूज चैनल के दिल्ली के ब्यूरो प्रमुख ने विनोद कापड़ी का इंटरव्यू किया। तीन दिन पहले ही। लेकिन इस इंटरव्‍यू के बाद से इस शातिरनुमा पत्रकार ने इस इंटरव्यू के फुटेज को यू-ट्यूब पर से हटा दिया। खबर है कि पहले इस फुटेज को अपलोड और फिर उसे रिमूव करने की इस पूरी कवायद में खासी रकम का लेन देन किया गया है।

विनोद कापड़ी

घटनाक्रम के मुताबिक कापड़ी ने यशवंत सिंह को जेल भिजवाने के लिए नोएडा के एसएसपी प्रवीण कुमार से मिल कर यशवंत पर रंगदारी वसूलने-धमकाने वगैरह के आरोप जड़ते हुए नोएडा के दो थानों में पिछले दिनों मुकदमे दर्ज कराये थे। अब तक इसका खुलासा नहीं हो पाया है कि आखिर एक ही वक्‍त में दो अलग-अलग थानों में यशवंत सिंह के खिलाफ नोएडा के एसएसपी प्रवीण कुमार ने क्‍यों मामले दर्ज कराये हैं। बहरहाल, इसके बाद से ही विनोद कापड़ी और नोएडा एसएसपी प्रवीण कुमार की निष्‍पक्षता पर गहरे सवालिया निशान उठ गये थे। विनोद कापड़ी के खिलाफ पत्रकारों का एक बड़ा तबका भड़क गया तो अपनी खाल बचाने के लिए आगरा के एक सी-न्यूज चैनल में कापड़ी ने इंटरव्यू प्रायोजित कराया। इस पूरे इंटरव्‍यू में सी-चैनल के रिपोर्टर मुकेश चौरसिया ने जवाबनुमा सवाल ही उठाये। लेकिन इसमें यशवंत पर आरोपों झड़ी लगाते हुए न जाने कैसे गलती कर ही बैठे कापड़ी। कापड़ी ने बातचीत में कुबूल कर लिया कि यशवंत ने कापड़ी से रंगदारी नहीं मांगी थी, बल्कि यशवंत ने कापड़ी से बीस हजार की रकम उधार के तौर पर एसएमएस कर मांगी थी। जबकि इसके पहले कापड़ी ने इसे रंगदारी का मामला बताया था।

बताते चलें कि इस चैनल के दिल्ली ब्यूरो प्रमुख मुकेश चौरसिया ने कापड़ी के साथ हुई अपनी इस बातचीत के फुटेज को

मुकेश चौरसिया

यू-ट्यूब पर अपलोड कर दिया।  कहने की जरूरत नहीं कि मुकेश चौरसिया मीडियाखबर डॉट कॉम नाम के एक पोर्टल का सहयोगी है और मीडियाखबर नामक पोर्टल का मालिक है पुष्‍कर पुष्‍प। सूत्र बताते हैं कि अपनी बातचीत को अपलोड करने का कारण यह था कि इस तरह कापड़ी की मक्खन-मालिश हो जाएगी। पुष्‍कर पुष्‍प और मुकेश चौरसिया ने सभी परिचित न्यूज पोर्टल संचालकों को इस फुटेज का लिंक तथा फुटेज की ट्रांसस्क्रिप्‍ट तैयार कर भेज दिया ताकि उसके आधार पर यशवंत के खिलाफ माहौल बताया जा सके। मीडियाखबर डॉट कॉम के संचालक पुष्‍कर पुष्‍प ने केवल अपने पोर्टल पर इस खबर को फुटेज के लिंक के साथ प्रकाशित किया, बल्कि अन्‍य कई पोर्टलों ने इस खबर को प्रमुखता से छापा और लिंक भी डाल दिया। ताकि विनोद कापड़ी को खुश किया जा सके।

लेकिन कापड़ी के वकीलनुमा पत्रकारों-पुलिसवालों ने जैसे ही कापड़ी को यह खबर दी कि इस बातचीत में रंगदारी के बजाय उधार की बात जैसे ही लोग सुनेंगे, कापड़ी के कपड़े पूरी तरह धुल जाएंगे। यशवंत के पक्ष में इससे पूरा मामला भी पलट जाएगा और कोर्ट में कापड़ी के सारे आरोप हवा होकर यशवंत के चरणों में लोटने लगेंगे। क्योंकि अपनी रिपोर्ट में यशवंत पर कापड़ी पहले ही यह आरोप लगा चुके थे कि कापड़ी से यशवंत ने रंगदारी मांगी थी।

पुष्कर पुष्प

बताते हैं कि यह पता चलते ही कापड़ी के हाथों से जैसे तोते ही उड़ गये। अपनी इसी बदहवासी में कापड़ी ने मीडियाखबर डॉट कॉम के संचालक पुष्‍कर पुष्‍प और मुकेश चौरसिया से इस फुटेज को यू-ट्यूब से हटाने का अनुरोध किया, लेकिन बताते हैं कि इस पर मीडियाखबर डॉट कॉम वाले पुष्‍कर पुष्‍प और मुकेश चौरसिया धंधे-पानी की बात पर उतर आये। बात लेने-देने की शुरू होने लगी। विश्‍वस्त सूत्रों के अनुसार धंधे के ऐसे ही किसी एक मजबूत पायदान पर इन दोनों के बातचीत तय हो गयी। जानकारों का कहना है कि मीडियाखबर डॉट कॉम वाले पुष्‍कर पुष्‍प और मुकेश चौरसिया ने तोड़ ही लिया और आखिरकार यू-टयूब पर कापड़ी का इंटरव्यू का फुटेज मीडियाखबर डॉट कॉम पर रिमूव कर दिया गया। नतीजा यह हुआ कि कापड़ी की जिस बातचीत को जिन पोर्टलों ने छापा था, उसके क्लिक करते ही यह मैसेज आने लगा कि दिस वीडिया हैस बीन रिमूव बाई द यूजर। इतना ही नहीं, खुद मीडियाखबर डॉट कॉम वाले पुष्‍कर पुष्‍प और मुकेश चौरसिया ने भी अपने पोर्टल से इस फुटेज को रिमूव कर डाला।

उधर जैसे ही कई पोर्टलों को मीडियाखबर डॉट कॉम वाले पुष्‍कर पुष्‍प और मुकेश मुकेश चौरसिया की इस करतूत का पता चला, हंगामा खड़ा हो गया। इस करतूत की खबर पूछने के लिए जब पोर्टल संचालकों ने चौरसिया से तो, मीडियाखबर डॉट कॉम वाले पुष्‍कर पुष्‍प और मुकेश मुकेश चौरसिया का फोन ही नहीं उठाया गया। जाहिर है कि इस बातचीत और कापड़ी की बातचीत का प्रमाण खत्म डाला गया। सी-न्यूज चैनल संचालकों से भी मुकेश चौरसिया की इस करतूत का पता लगाने की कोशिश की गयी, लेकिन उनसे भी संतोषजनक नहीं मिल सका है। बहरहाल, कई संचालकों का सीधे-तौर पर आरोप है कि कापड़ी और मीडियाखबर डॉट कॉम वाले पुष्‍कर पुष्‍प तथा मुकेश चौरसिया के बीच भारी डील सम्पन्न हो गयी है।

फुटेज को रिमूव करने के बारे में मुकेश चौरसिया का तर्क है कि इससे अनावश्‍यक विवाद खड़ा हो रहा था, इसीलिए यह कार्रवाई करने की जरूरत पड़ी। लेकिन यह तर्क भी गले से नहीं उतर रहा है। क्‍यों कि यह इंटरव्‍यू तो कापड़ी का ही था और उनके ही पक्ष के लिए किया गया था। मुकेश चौरसिया का कहना था कि इस पूरे मामले में मीडिया ने कापड़ी का पक्ष नहीं दिया है, इसीलिए यह इंटरव्‍यू करना पड़ा था। इंटरव्‍यू में मुकेश ने कापड़ी के पक्ष में जवाबनुमा सवाल किये थे। लेकिन हैरत की बात है कि मुकेश को कापड़ी के उस पक्ष की चिंता तो रही जो पुलिस एफआईआर में पहले ही दर्ज है और यशवंत के खिलाफ मीडिया में जमकर छापा जा रहा है, लेकिन यशवंत का पक्ष एक बार भी लेने की जरूरत मुकेश चौरसिया ने नहीं समझा। उधर सी-न्‍यूज चैनल के संपादक कल्‍याण कुमार से जब इस संवाददाता ने उनके चैनल में एयर हो चुके इस इंटरव्‍यू का फुटेज मांगा, तो कल्‍याण कुमार ने इनकार कर दिया। उनका जवाब था कि उस इंटरव्‍यू का फुटेज दिया जाना मुमकिन नहीं है।

कोई बात नहीं, हम आपको अब दिखाते हैं कि मुकेश के साथ बातचीत में कापड़ी ने क्या कहा था…

 

कुमार सौवीर
लो, मैं फिर हो गया बेरोजगार।
अब स्‍वतंत्र पत्रकार हूं और आजादी की एक नयी लेकिन बेहतरीन सुबह का साक्षी भी।
जाहिर है, अब फिर कुछ दिन मौज में गुजरेंगे।
मौका मिले तो आप भी आइये। पता है:-
एमआईजी-3, सेक्‍टर-ई
आंचलिक विज्ञान केंद्र के ठीक पीछे
अलीगंज, लखनऊ-226024
फोन:- 09415302520
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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.