/राजेश खन्ना को खलनायक सिद्ध करने में कोई कसर नहीं छोड़ी एबीपी न्यूज़ ने

राजेश खन्ना को खलनायक सिद्ध करने में कोई कसर नहीं छोड़ी एबीपी न्यूज़ ने

शनिवार शाम एबीपी न्यूज़ ने अपने लव स्टोरी कार्यक्रम में एक घटिया सी एंकर के जरिये मृत्यु शैय्या पर लेटे राजेश खन्ना को खलनायक के तौर पर पेश करने में कोई कसर बाकी नहीं रखी. एबीपी न्यूज़ द्वारा इस कार्यक्रम को प्रस्तुत करने वाली एंकर, नेशनल हाईवे पर चलने वाले चकलाघरों के बाहर खड़ी वेश्याओं के जैसी भाव भंगिमाओं के साथ इस कार्यक्रम को प्रस्तुत कर अंजू महेन्द्रू को एक प्यार में सताई हुई लड़की की तरह पेश कर रही थी  वहीँ राजेश खन्ना को सिर्फ और सिर्फ एक शक्की इन्सान के तौर पर पेश करते हुए खलनायक साबित करने में कोई कोर कसर बाकी नहीं छोड़ रहा था. लगातार अपनी कई फिल्मों के एक बाद एक फ्लॉप होने की वजह से अंदर ही अंदर टूट रहे एक कलाकार को संबल देने के बजाय उसे अपनी अँगुलियों पर नचाने की कोशिश कर रही अंजू महेन्द्रू को इस कार्यक्रम में महानता की देवी साबित करने का बेजान प्रयास करती एंकर से दर्शक सहमत होने के बजाय उसकी अश्लील भंगिमाओं से कुढ़ कर चैनल बदलने के सिवा कुछ नहीं कर सकते थे.

यह ठीक हैं कि काका मुनि जब लगातार पंद्रह हिट फ़िल्में देने के बाद सफलता के ऐसे दौर से गुजर रहे थे कि हर लड़की की किताब में राजेश खन्ना की तस्वीर बरामद की जा सकती थी. ऐसे में यह भावुक किस्म का इन्सान अपने  चमचों  से घिर गया था और जब कोई भी इन्सान चमचों के बीच घिर जाता है  तो उसे अपनी भलाई बुराई की कोई सुध नहीं रहती. लेकिन जब उसकी फ़िल्में बॉक्स ऑफिस लगातार फ्लॉप होती जाये तो वह किस मानसिक दौर से गुजर रहा होगा. डूबते जहाज़ से सबसे पहले चूहे भागते हैं और ठीक इसी तरह काका मुनि की चमचा टीम भी उनके बुरे दौर में भाग गयी थी. जिस समय राजेश खन्ना मानसिक रूप से टूट रहे थे उस वक्त उन्हें भावनात्मक संबल देने के लिए उस समय की उनकी प्रेमिका अंजू महेन्द्रू इंतजार करती थी कि राजेश खन्ना उनके घर आयें. अपनी ऐसी उपेक्षा के कारण अंजू महेन्द्रू और राजेश खन्ना के बीच दूरियाँ बढ़ने लगी. अंजू महेन्द्रू के बेमतलब नखरों से नाराज़ राजेश खन्ना उनकी उपेक्षा कर डिम्पल कपाडिया को भाव देने लगे तो अंजू महेन्द्रू ने खुद उनसे बात करने के बजाय अपने कार चालक के हाथों राजेश खन्ना के दिए उपहार लौटते हुए कभी फोन न करने और घर न आने की नसीहत दे डाली तो काका मुनि के पास अंजू महेन्द्रू से अपने सभी रिश्ते खत्म कर देने के अलावा कोई चारा नहीं बचा था.

इसके बाद जब राजेश खन्ना ने डिम्पल कपाडिया से शादी कर ली  तो भी राजेश खन्ना अपनी मुहब्बत अंजू महेन्द्रू को भूल नहीं पा रहे थे, जो कि उनके वैवाहिक जीवन को नरक में तब्दील करने के लिए काफी था. और हुआ भी यही. डिम्पल कपाडिया ज्यादा समय तक यह स्थिति बर्दाश्त नहीं कर पाई तथा राजेश खन्ना के घर को अलविदा कहकर अलग रहने लगी. खैर यह सब राजेश खन्ना और उनके परिवार के निजी मामले हैं. जिसमें दखल देना उचित नहीं. मगर एबीपी न्यूज़ ने मानवता की सभी हदें लांघते हुए एक सड़क छाप वेश्या सी लगती एंकर के हाथों जिन्दगी की आखरी सांसे गिन रहे राजेश खन्ना के साथ जो कुछ करवाया है, उसकी जितनी निंदा की जाये कम है.

 

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.