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खार को खरी खरी सुनाई कृष्णा ने

By   /  July 9, 2012  /  2 Comments

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मुंबई के होटल ताज में आतंकी हमले के आरोपी अबू जुंदाल पर विदेश सचिव वार्ता में उभरे मतभेदों के बाद टोक्यो में भारत और पाकिस्तान के विदेश मंत्रियों की मुलाकात में भी आतंकवाद को पाकिस्तानी मदद का मुद्दा ही छाया रहा. अफगानिस्तान की मदद के लिए जापान की राजधानी में आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के हाशिये पर हुई इस मुलाकात में विदेश मंत्री एसएम कृष्णा ने पाकिस्तान की विदेश मंत्री हिना रब्बानी खार से कहा कि भारत की ओर से दिए गए सुबूतों पर कार्रवाई जरूरी है.

सूत्रों के मुताबिक रविवार को करीब आधे घंटे की इस मुलाकात में कृष्णा ने जोर देकर कहा कि भारत की ओर से इस बात के पर्याप्त सुबूत दिए जा चुके हैं कि पाकिस्तान के सरकारी तंत्र से भी आतंकी गुटों को मदद मिल रही है. कृष्णा ने मुंबई आतंकी हमले के दोषियों के खिलाफ अब तक कोई कार्रवाई न होने का मामला भी उठाया. उन्होंने स्पष्ट किया कि हाफिज सईद जैसे मुंबई हमले के गुनहगारों को सजा नहीं मिली तो विश्वास का संकट कम होना संभव नहीं है. चर्चा के दौरान कृष्णा ने पाकिस्तान में कैद भारतीय नागरिक सरबजीत की रिहाई का मुद्दा भी उठाया.

दोनों देशों के बीच सितंबर में फिर विदेश सचिव स्तर की बातचीत होनी है. इससे पहले जापान में कृष्णा और खार की मुलाकात वार्ता को आगे बढ़ाए रखने की कोशिश की एक कड़ी है. बीते डेढ़ महीनों से दोनों मुल्कों के बीच चल रही बातचीत में जहां सियाचिन, सरक्रीक को लेकर गतिरोध दिखाई दिया, वहीं अब जुंदाल को लेकर मतभेद भी सामने आए हैं. गत 4-5 जुलाई को हुई विदेश सचिव वार्ता में पाकिस्तान ने भारत के सुबूतों को नकारने में पूरी ताकत लगा दी थी. 26/11 हमले को पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आइएसआइ की सीधी मदद के जुंदाल के रहस्योद्घाटन को भी पाक विदेश सचिव ने सिरे से खारिज कर दिया था. भारत ने जुंदाल से हासिल पाकिस्तानी पासपोर्ट, राष्ट्रीय पहचान पत्र जैसे दस्तावेजों और पूछताछ में हासिल कई अहम जानकारियां भी सामने रखी थीं. जवाब में पाक विदेश सचिव ने इन्हें नाकाफी बताते हुए कहा था कि भारत अपने पास मौजूद सभी सुबूत सौंपे तो पाकिस्तान उनकी पड़ताल कराएगा. यही नहीं, उन्होंने तो भारत को इल्जाम की भाषा से परहेज की नसीहत भी दे डाली थी.

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About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक “मुखौटों के पीछे – असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष” में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

2 Comments

  1. खरी खरी….होती क्या है ये कृष्णा साहेब क्या मनमोहन और सोनिया को भी नहीं पता है….पाकिस्तान जिस भाषा को समझता है वो भाषा बोलने वाला दिल्ली कि गद्दी पर कोई है ही नहीं……..देश को इंतज़ार है…..

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