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मुंबई धमाकों से इंडिया टीवी में हंगामा: फिर न्यूज़रुम में सक्रिय हुए रजत शर्मा

By   /  July 16, 2011  /  No Comments

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नंबर वन चैनल इंडिया टीवी मुंबई धमाकों की कवरेज में आखिरी नंबर पर पहुंच गया। एक-एक सेकेंड पर ‘ सबसे पहले हमारे चैनल पर ‘ के जुमलों वाली टेलीविजन की दुनिया में डेढ़ घंटे की देरी ने यह साबित कर दिया कि इंडिया टीवी में सबकुछ ठीक नहीं है। लेकिन इसका नतीजा कम से कम यह जरूर निकला कि चैनल में इसके मालिक रजत शर्मा की न्यूजरुम में सक्रियता बढ़ गई।

दरअसल पिछले कुछ हफ्तों से टीआरपी के खेल में नंबर वन पोजीशन हासिल किए हुए इंडिया टीवी में 13 जुलाई को हुए मुंबई धमाकों की लाइव फूटेज देर से पहुंची। वह भी एक दो नहीं पूरे डेढ़ घंटे की देरी। दरअसल इंडिया टीवी का मुंबई ऑफिस अंधेरी में है जो धमाके वाली जगहों से करीब 40 किलोमीटर की दूरी पर है। सूत्रों का कहना है कि धमाकों की खबर के बाद अंधेरी से दादर और झावेरी बाजार तक ओबी पहुंचने और वीडियो सिग्नल आने में ही यह देरी हुई।

हालांकि दूसरे चैनलों के ऑफिस भी बिल्कुल धमाके वाली जगह पर नहीं हैं, लेकिन उनके ओबी वैन और स्ट्रिंगरों ने ‘ एक्सक्लूसिव ‘ तस्वीरों को फुर्ती से दिल्ली भेज दिया। शायद इंडिया टीवी का स्ट्रिंगर नेटवर्क उतना मजबूत नहीं है जितना दूसरे चैनलों का। यही वजह रही कि उसे अपनी तस्वीरों के आने तक करीब डेढ़ घंटे टीवी-9 की फूटेज पर काम चलाना पड़ा।

खबर है कि इतनी देर तक पूरे न्यूजरुम में हंगामा मचा रहा। शब्दों और जुमलों से खेलने के माहिर विनोद कापड़ी की बोलती बंद रही और रजत शर्मा खुद न्यूज़रुम में आकर सभी गतिविधियों पर पूरी नजर रखे रहे। न सिर्फ लाइव शुरु होने तक बल्कि इसके बाद भी। देर रात तक कई बुलेटिन और स्पेशल बन जाने तक रजत शर्मा अपने केबिन में नहीं गए।

सूत्रों का कहना है कि रजत शर्मा हाल ही में विनोद कापड़ी के एक और फैसले को पलट दिया था। खेल संवाददाता रोहित विश्वकर्मा ने कापड़ी से कुछ मतभेदों की वजह से इंडिया टीवी छोड़ने का ऐलान कर दिया था, लेकिन रजत शर्मा ने उसे समझा-बुझा कर वापस बुला लिया।

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About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक “मुखौटों के पीछे – असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष” में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

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