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धमाकों से नहीं, मीडिया से ‘आहत’ हुए सुबोध कांत सहाय…?

By   /  July 16, 2011  /  1 Comment

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केंद्रीय मंत्री सुबोध कांत सहाय के नाम से बने एक फेसबुक अकाउंट पर उनके हवाले से लिखा गया है कि वे मीडिया के रवैये से आहत हुए हैं। ‘उन्होंने’ अपनी वाल पर हिंदी में लिखे संदेश में कहा है कि उन्हें फैशन शो में जाते वक्त धमाकों की जानकारी नहीं थी। हालांकि यह भी एक चर्चा का मुद्दा बन सकता है कि केंद्रीय मंत्री का सूचना तंत्र इतना कमजोर क्यों है?

उनका फेसबुक संदेश इस प्रकार है:

“मेरे फैशन शो में जाने के मामले को मीडिया ने जिस तरह से पेश किया है मैं उससे बहुत आहत हुआ हूँ . मैं भी देश का एक संवेदनशील और जिम्मेदार नागरिक हूँ . मुझे बम धमाको की जानकारी नहीं थी और जैसे ही इसकी जानकारी मिली मैं वहां से चला गया और मुंबई में अपने लोगों से फ़ोन पर बात चीत करता रहा . एक्स मिनिस्टर की बेटी का पहला शो था और उनलोगों ने १० मिनट रुक कर आशीर्वाद देने का अनुरोध किया जिसे मैं ठुकरा नहीं सका . ऐसे में तथ्यों को बिना जाने या पूछे प्रस्तुत करना मुझे लगता है न्यायपूर्ण नहीं है”

हालांकि फेसबुक पर उनका संदेश प्रसारित होते ही कमेंटों की बाढ़ आ गई है, लेकिन अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि यह आईडी असली सुबोधकांत सहाय की है या नहीं.. फेसबुक के इंफॉर्मेशन के मुताबिक इस आईडी को किसी [email protected] ने तैयार किया है। सुबोधकांत सहाय से संपर्क नहीं हो पाया है।

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About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक “मुखौटों के पीछे – असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष” में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

1 Comment

  1. jagbir says:

    aji jane bhi do ab …sab kuch saaf saaf dikh rha tha aakhir kitni safai doge…ek se ek chor chipa rakha h congress ne…bde sharm ki baat hai ….khair chodo everydog has a day…ek din sabka ata hai duwa krnenge aapka bhi aaye to dard ka ashaas ho apko bhi ..jab hum log fashion show dekh rhe honge….besharm…….

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