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विजय त्रिवेदी राजस्थान पत्रिका के राष्ट्रीय संपादक…

By   /  July 11, 2012  /  1 Comment

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वरिष्ठ पत्रकार और एनडीटीवी इंडिया में बतौर सलाहकार संपादक कार्यरत विजय त्रिवेदी ने संस्थान से इस्तीफा देकर राजस्थान पत्रिका के साथ बतौर राष्ट्रीय संपादक प्रिंट मीडिया में अपनी दूसरी पारी कि शुरुआत कर दी है और दिल्ली ब्यूरो का नेतृत्व करेंगे. राजस्थान पत्रिका के साथ भी उनकी यह दूसरी पारी है, जहां से उन्होंने अपने कॅरियर की शुरुआत की थी.

इसके बाद वे लंबे समय तक नवभारत टाइम्स को अपनी सेवाएं देते रहे.  नवभारत टाइम्स के बाद विजय त्रिवेदी ने कुछ समय इंडिया टुडे के लिए काम किया. फिर वे इलेक्ट्रोनिक मीडिया में आ गए. टीवी में उनकी शुरुआत विनोद दुआ की परख की टीम से हुई. वो लोकसभा प्रेस सलाहकार समिति के सयुंक्त सचिव भी रह चुके हैं.
एनडीटीवी में रहते हुए विजय त्रिवेदी संसद और राजनीतिक खबरें कवर करते थे. त्रिवेदी ने चक्रव्यूह, आज का एजेंडा, हॉटफाइल, सवाल आपके और रविवार आईना जैसे कई मशहूर शो होस्ट किये हैं. इसके अलावा विजय त्रिवेदी एनडीटीवी इंडिया पर साप्ताहिक शो इंडिया दिस वीक भी होस्ट करते थे.

दिनमान, धर्मयूग, साप्ताहिक हिंदुस्तान और रविवार के लिए नियमित स्तंभ लिख चुके विजय त्रिवेदी ज़ीटीवी, दूरदर्शन और एआईआर पर कई शो एंकर कर चुके हैं.

अब प्रिंट मीडिया में उनकी दूसरी पारी है, और उम्मीद है कि राजस्थान पत्रिका को उनके लंबे अनुभव का खासा लाभ होगा.

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About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक “मुखौटों के पीछे – असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष” में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

1 Comment

  1. tejwani girdhar says:

    बेशक इससे पत्रिका में और सुधार होगा

पाठक चाहे आलेखों से सहमत हों या असहमत, किसी भी लेख पर टिप्पणी करने को स्वतंत्र हैं. हम उन टिप्पणियों को बिना किसी भेद-भाव के निडरता से प्रकाशित भी करते हैं चाहे वह हमारी आलोचना ही क्यों न हो. आपसे अनुरोध है कि टिप्पणियों की भाषा संयत एवं शालीन रखें - मॉडरेटर

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