/आखिर जाना ही पड़ा अनुरंजन झा को: रजनीश बने न्यूज़ डायरेक्टर

आखिर जाना ही पड़ा अनुरंजन झा को: रजनीश बने न्यूज़ डायरेक्टर

मीडिया दरबार की करीब एक पखवाड़े पहले छपी खबर आखिरकार सच साबित हुई और CNEB के सीओओ अनुरंजन झा को हार मान कर बाहर का रास्ता नापना पड़ गया। लाख कोशिशों के बावजूद अनुरंजन का कांट्रैक्ट रिन्यू नहीं हुआ और शनिवार को एक समारोह के अंदाज़ में उनकी विदाई हो गई। दोपहर में चैनल के चेयरमैन कम सीईओ अमनदीप सरान ने न्यूज़रुम में सभी को नए न्यूज़ डायरेक्टर रजनीश कुमार से परिचय करवाया तथा सभी खबरों के लिए उन्हें ही रिपोर्ट करने को कहा।

रजनीश कुमार इससे पहले आईबीएन-7 में एसोसिएट एक्जीक्यूटिव प्रोड्यूसर के पद पर थे। वे INX के अंग्रेजी समाचार चैनल न्यूज़एक्स, स्टार न्यूज़ तथा सहारा समय से भी जुड़े रह चुके हैं। अनुरंजन की छवि जहां एक खिलाड़ी की रही है वहीं रजनीश को एक गंभीर पत्रकार के तौर पर जाना जाता है। इस बात का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि जहां अनुरंजन के फेसबुक पर फ्रेंड्स लिस्ट में करीब पांच हजार लोग हैं वहीं रजनीश का फेसबुक और ऑरकुट जैसी सोशल नेटवर्किंग साइटों पर अकाउंट भी नहीं है।

बिहार और झारखंड में पले बढ़े रजनीश ने अपनी पत्रकारिता की शुरुआत करीब 15 साल पहले माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय में सर्वोच्च स्थान हासिल करने के बाद की थी। छात्र जीवन में भी रजनीश कभी दूसरे नंबर पर नहीं रहे और शायद यही वजह है कि उन्हें खबरों और तथ्यों की गहरी समझ के लिए जाना जाता है। मीडिया दरबार से बात करते हुए रजनीश ने बताया कि फिलहाल उनकी प्राथमिकता खबरों और बुलेटिनों का स्तर सुधारना है। रजनीश के मुताबिक उन्हें एक बहुत अहम जिम्मेदारी मिली है, जिसे निभाना उनके लिए गर्व की बात है। उनहोंने भरोसा जताया कि CNEB की मौजूदा टीम बहुत बढ़िया है और उससे उन्हें पूरे सहयोग की उम्मीद है।

उधर अनुरंजन खेमे में इस उठापटक से खलबली मच गई है। एक ‘ प्रमुख ‘ मानी जाने वाली एंकर मीनाक्षी शरण ने शनिवार को ही अपना इस्तीफा सौंप दिया। वह CNEB से पहले सहारा में जूनियर एंकर थी, लेकिन अनुरंजन से नजदीकियों की वजह से यहां खासा महत्व हासिल कर चुकी थी। बताया जा रहा है कि अनुरंजन के कई और कृपा पात्र जल्दी ही चैनल से बाहर कर दिए जाएंगे या फिर इस आशंका से खुद ही छोड़ जाएंगे।

शनिवार को अनुंजन के किले के एक और प्रमुख स्तंभ किशोर मालवीय के भी चैनल से जाने की खबर आई थी, लेकिन मीडिया दरबार से बातचीत में उन्होंने इससे इंकार किया। किशोर मालवीय अनुरंजन के मुकाबले कहीं ज्यादा अनुभवी और वरिय़्ठ पत्रकार माने जाते थे, लेकिन CNEB  में सलाहकार संपादक के पद पर ही थे।

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.