/जन्म दिन मनाने के लिए बियर बार ही जगह मिली थी क्या?

जन्म दिन मनाने के लिए बियर बार ही जगह मिली थी क्या?

नारी सम्मान की रक्षा को लेकर मीडिया दरबार ने अपने पाठकों से उनके विचार मांगे हैं, जिन्हें श्रंखलाबध्द रूप से बहस श्रेणी में प्रकाशित किया जा रहा है. इसी के तहत फेसबुक से उज्जवल छवि ने अपने विचार भेजें है. जिन्हें जस का तस नीचे प्रकाशित किया जा रहा है. यह लेखक के अपने निजी विचार हैं तथा मीडिया दरबार इनके विरोधाभासों का कत्तई जिम्मेवार नहीं है.

फेसबुक से उज्जवल छवि लिखते हैं….

गुवाहाटी में जो घटना घटी वो बहुत ही बुरा है ! लडको ने हैवानियत की हद पार कर दी है !
शर्मनाक है यह ! मै इसकी घोर निंदा करता हु !
यहाँ तक की कपडे फाड़े गए, विडिओ बनाकर “यू टयूब ” पे डाल दिया गया !
सब कुछ बहुत ही बुरा हुआ , बाकी सब कुछ आपने भी न्यूज़ में देखा ही होगा !
लेकिन, अब दूसरा पहलु ……!!
लड़की को जन्म दिन मनाने के लिए बियर बार ही जगह मिली थी क्या ?? उसने
कपडे भी कैसे पहने थे ये भी सबने देखा ही होगा !
ग्यारहवी में पढने वाली लड़की ने शराब क्यों पी ?
२० लडको ने उसके साथ गुंडागर्दी की…..लेकिन ऐसी नौबत क्यों आई ? क्या वो सभी लड़के पागल थे ??
मीडिया पूरी खबर क्यों नहीं दिखा रही है ?
सभ्य घर की लड़की इस तरह के कपडे में रात के दस बजे बियर बार में जन्म दिन मनाने नहीं जाती है !

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.