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जन्म दिन मनाने के लिए बियर बार ही जगह मिली थी क्या?

By   /  July 15, 2012  /  5 Comments

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नारी सम्मान की रक्षा को लेकर मीडिया दरबार ने अपने पाठकों से उनके विचार मांगे हैं, जिन्हें श्रंखलाबध्द रूप से बहस श्रेणी में प्रकाशित किया जा रहा है. इसी के तहत फेसबुक से उज्जवल छवि ने अपने विचार भेजें है. जिन्हें जस का तस नीचे प्रकाशित किया जा रहा है. यह लेखक के अपने निजी विचार हैं तथा मीडिया दरबार इनके विरोधाभासों का कत्तई जिम्मेवार नहीं है.

फेसबुक से उज्जवल छवि लिखते हैं….

गुवाहाटी में जो घटना घटी वो बहुत ही बुरा है ! लडको ने हैवानियत की हद पार कर दी है !
शर्मनाक है यह ! मै इसकी घोर निंदा करता हु !
यहाँ तक की कपडे फाड़े गए, विडिओ बनाकर “यू टयूब ” पे डाल दिया गया !
सब कुछ बहुत ही बुरा हुआ , बाकी सब कुछ आपने भी न्यूज़ में देखा ही होगा !
लेकिन, अब दूसरा पहलु ……!!
लड़की को जन्म दिन मनाने के लिए बियर बार ही जगह मिली थी क्या ?? उसने
कपडे भी कैसे पहने थे ये भी सबने देखा ही होगा !
ग्यारहवी में पढने वाली लड़की ने शराब क्यों पी ?
२० लडको ने उसके साथ गुंडागर्दी की…..लेकिन ऐसी नौबत क्यों आई ? क्या वो सभी लड़के पागल थे ??
मीडिया पूरी खबर क्यों नहीं दिखा रही है ?
सभ्य घर की लड़की इस तरह के कपडे में रात के दस बजे बियर बार में जन्म दिन मनाने नहीं जाती है !

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About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक “मुखौटों के पीछे – असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष” में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

5 Comments

  1. hafiz says:

    rupali ji mai aapse sahmat hu

  2. priynka sharma says:

    क्या भारत में कोई ड्रेस कोड लागू है, क्या भारत में लड़कियों के बीयर पीने पर कोई प्रतिबंध है , क्या लड़कियों के रात को बाहर निकलने पर कोई प्रतिबंध है , क्या भारत में जन्म दिन मनाने के लिए कोई ख़ास स्थान कि व्यवस्था है ? अगर लड़के पागल नही थे तो मानसिक दिवालिये जरूर रहे होंगे ? लड़की को दोषी ठहरने से पहले इन सवालों के जवाब भी मिलने चाहिए ?

    • rupali shukla says:

      priyanka ji aapki bat se mai sahmat nahi hu……ye theek hai ki ladkiyo ko bhi unki pasand ke kapde pahnne ki aazadi honi chahiye per har desh ki apni ek sanskrati hoti hai aur ye hamari sanskrati me nahi hai ki der rat ko aise kapde pahan ke pub me parti manaye ….hone ko to bahut khuch hota rahta hai per jab aise koi ghatna ghat jati hai to sawal khade hote hi hai ..ji us bheed ne kiya usse sharmnak khuch nahi ho sakta per ladkiyo ko apni maryada kabhi nahi bhulni chahiye …khuch bate ladkiyo ko ladko se alag karti hai unki sharirik snrachana ke adhar pe yadi aisa nahi hota to …kisi ladke ke sath ye badsaluki hoti to itna hangama na hota ……ye wahi desh hai jahan aaj bhi bharat ki rashtrapati saari pahanti hai….isliye ladkiyo ko bhi apni had me rahna chahiye ya fir itna sahsi hona chahiye ki wo har khatre ka samna kar sake….

      thanks

    • parveen komal says:

      आज शाम 9 बजे १७ साल की मासूम सी अकेली लड़की हाथ में स्कूल बैग लिए बस स्टैंड पटिआला पर घूम रही थी . दो मनचले उसे अपने साथ मोटर साइकल पर बैठा कर ले जाने की कोशिश कर रहे थे , मैंने उस लड़की से पूछ ताछ की तो पता चला की उसे उसके मम्मी डैडी ने मारा पीटा था इस लिए वो घर से भाग आई . मैंने उसे बस स्टैंड की एक दूकान में बैठा कर पूरी जानकारी ली , लड़की सुबह से भूखी थी उसने खाना माँगा , मैंने फ्रूट मंगवाकर दिए और एस एच ओ थाना लाहोरी गेट को इतलाह दे कर लड़की को थाणे ले जाकर एस एच ओ चीमा जिला संगरूर को सूचित किया और लड़की को समझाया की अपने माँ बाप की डांट का बुरा नहीं मनाते , लगभग दो घंटे के बाद लड़की के मौसा जो पंजाब पोलिस में है अपनी धर्म पत्नी के साथ थाणे में आये और धन्यवाद देकर लड़की को सकुशल अपने साथ ले के गए -: अपने माँ बाप की डांट से दुखी होकर घर से भागी यह अकेली असहाए लड़की सहारे की तलाश में रात को किसी भी अनजान के साथ जाने को तैयार थी और उसके साथ आज के जमाने में कुछ भी बुरा घाट सकता था ,
      चेतावनी : टीनेजर बच्चों को मनोवग्यानिक ढंग से संभालना चाहिए , खास कर लड़किओं को

    • sharvan saini dainik prabhat says:

      main आपकी बात से सहमत hu

पाठक चाहे आलेखों से सहमत हों या असहमत, किसी भी लेख पर टिप्पणी करने को स्वतंत्र हैं. हम उन टिप्पणियों को बिना किसी भेद-भाव के निडरता से प्रकाशित भी करते हैं चाहे वह हमारी आलोचना ही क्यों न हो. आपसे अनुरोध है कि टिप्पणियों की भाषा संयत एवं शालीन रखें - मॉडरेटर

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