/ताऊ की खरी खरी में गूंजे मनोज तिवारी के सुर

ताऊ की खरी खरी में गूंजे मनोज तिवारी के सुर

सहारा टीवी के लोकप्रिय कार्यक्रम ताऊ की खरी खरी में इस बार भोजपुरी फिल्मों के सुपर स्टार और गायक मनोज तिवारी ताऊ के साथ बैठे. ताऊ ने मनोज के साथ मिलकर उनसे कई मुद्दो पर चर्चा की. मनोज तिवारी इस समय अनुराग कश्यप की फिल्म गैंग्स ऑफ वासेपुर में गाये गाने जिया हो बिहार के लाला…जिया तू हजार साला को गाकर चर्चा में हैं. ये गाना आज देश भर में लोकप्रियता की ऊंचाइयों को छू रहा है.

ताऊ के पूछने पर मनोज ने कहा वो राजनीति से दूर नही हुए हैं… वो अभी भी राजनीति में हैं… गौरतलब है कि मनोज ने समाजवादी पार्टी के टिकट पर गोरखपुर से चुनाव भी लड़ा था. ताऊ के ये पूछने पर कि वो देश की राजनीतिक हालात पर क्या सोचते हैं तो मनोज का कहना था कि जल्दी ही परिवर्तन होगा और अगर ऐसा ही चलता रहा तो वो दिन दूर नही मौजूदा सरकार को जाना पड़ेगा.

ताऊ के पूछने पर की बिहार के मुख्यमंत्री नीतिश कुमार और गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी के बीच विवाद पर उन्हे क्या लगता है… तो मनोज तिवारी ने कहा कि ये दोनो लोग अच्छे हैं और ये अच्छा नही है दोनो में विवाद का होना.

मनोज का कहना था कि वो राजनीति में अच्छे लोगों के साथ हैं…यूपी में वो अखिलेश को पसंद करते हैं… प. बंगाल में वो ममता दीदी का सम्मान करते हैं.

मनोज ने ताऊ को ये भी बताया कि वो अन्ना और रामदेव के मुद्दे पर उनके साथ हैं. अन्ना के वो खास समर्थक हैं. हालांकि उन्होने ये भी इशारा किया कि टीम अन्ना के कुछ सदस्य ठीक नही हैं लेकिन अन्ना बढ़िया हैं.

मनोज ने इस कार्यक्रम में अपने लोकप्रिय गाने भी ताऊ को सुनायें.

मनोज ने ‘ताऊ की खरी खरी’ की तारीफ करते हुए ताऊ को धन्यवाद दिया कि ताऊ ने उन्हे अपने कार्यक्रम में बुलाया.

‘ताऊ की खरी खरी’ सहारा टीवी के यूपी-उत्तराखंड, बिहार-झारखंड और एन सी आर चैनल पर प्रत्येक रविवार दिखाया जाता है.

Facebook Comments

संबंधित खबरें:

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.