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पिछले चार साल से एटीएम में चोरी कर खेलते थे जुआ…बहन की शादी भी चोरी के पैसे से….

By   /  July 18, 2012  /  1 Comment

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इलाहाबाद पुलिस ने मंगलवार को देर रात एटीएम से पैसा गायब करने वाले 3 शातिर चोरो को  पकड़ा …ये चोर कोई  और नहीं बल्कि एटीएम मशीन में पैसा रखने वाली कंपनी के ही कर्मचारी है..इलाहाबाद के सिविल लाइंस थाने में एक्सिस बैंक की तरफ से 12 जुलाई को 1 करोड़ 70 लाख रुपये की चोरी का मामला दर्ज कराया था.. इस मामले में बैंक की तरफ से एटीएम मशीन में पैसा रखने का काम करने वाली CMS कंपनी के कस्टोडियन के खिलाफ मामला दर्ज कराया था..आज पुलिस ने इस मामले में सीमएस कंपनी के एक कस्टोडियन और कस्टोडियन इंचार्ज समेत ३ लोगो को गिरफ्तार करके 22 लाख 50 हजार रुपये बरामद किये… हाँलाकि पुलिस अभी भी इस मामले के एक आरोपी भूपेश कुशवाहा की तलाश कर रही है..पुलिस को यह भी शक है की इस मामले में  बैंक के किसी कर्मचारी की मिली भगत है… पुलिस इसकी भी जाँच कर रही है…पुलिस के मुताबिक  इस मामले में घपलेबाजी का यह  सिलसिला  पिछले चार सालो से चल रहा था..जिसे यही शातिर लोग कर रहे थे… पुलिस को यह आश्चर्य है की इतने बड़े घपले की जानकारी  बैंक को इतने दिनों बाद क्यों हुई…..

इलाहाबाद के सिविल लाइंस थाने  में 12 जुलाई को एक्सिस बैंक के 8 एटीएम मशीनों से 1 करोड़ 70 लाख रुपये चोरी करने का मामला दर्ज कराया गया था.. और यह एफआईआर बैंक की तरफ से एटीम मशीनों में पैसा रखने का काम करने वाली कंपनी CMS के कस्टोडियन भूपेश कुशवाहा के खिलाफ मामला दर्ज कराया गया था….बैंक का आरोप था की भूपेश ने अपने साथियों के साथ मिलकर 1 करोड़ 70 लाख रुपये शहर के 8 एटीएम मशीनों से गायब किये है… जबकि पुलिस ने इस मामले का राज फाश करते हुए यह बताया की भूपेश और अनूप श्रीवास्तव दोनों मिलकर शहर के एटीएम से पिछले चार सालो से पैसो का हेर फेर कर रहे थे..पहले यह लोग एटीएम से थोड़े बहुत पैसे निकलकर खर्च किया करते थे..धीरे धीरे चार सालो में यह लोग सभी एटीएम से लाखो रुपयों का हेर फेर कर चुके थे…इस दौरान यह दोनों जुआ खेलने अय्याशी करने शराब पीने के लिए भी  एटीएम से पैसे निकालकर खर्च किया करते थे..यही नहीं पिछले साल भूपेश ने अपनी बहन की शादी करने के लिए भी इन्ही एटीएम से दस लाख रुपये गायब कर दिए थे..इस चोरी में अनूप श्रीवास्तव और भूपेश कुशवाहा एक दुसरे का साथ देते थे क्यूकि इन्ही  दोनों के पास इन सभी एटीएम का कोड वर्ड पता था और दोनों एक साथ मिलकर ही एटीएम से पैसा चुराते थे..इसमे अनूप CMS कंपनी का कस्टोडियन इंचार्ज भी था…और समय समय पर मशीन में रक्खे हुए पैसो की जाँच करने का काम भी अनूप का ही था जिस कारण यह घपला इतने दिनों तक छुपा हुआ था…हाँलाकि सभी एटीएम मशीनों का रिकार्ड बैंक के मास्टर कंप्यूटर में भी रहता है लेकिन इतने लम्बे समय तक इसकी भनक बैंक को ना लगना भी अपने आप में एक सवाल उठाता है…..पिछले महीने में इस कम्पनी में आये नए नए आडिट आफिसर ने जब सभी एटीएम को एक साथ चैक करने की बात कही तो यह लोग घबरा गए..और इन लोगो ने यह प्लान बनाया कि एक ही दिन में सभी एटीएम से पैसा लूटकर हम लोग गायब हो जायेंगे..और इसी के मुताबिक इन लोगो ने एक साथ इलाहाबाद शहर के सभी आठ एटीएम से पैसा गायब कर दिया..इस दौरान यह लोग आपस में सिर्फ कोड वर्ड के जरिये ही मोबाइल से बात कर रहे थे..

शैलेश कुमार यादव एसपी सिटी इलाहाबाद का कहना है कि इस पूरे मामले पुलिस अभी भी एक आरोपी की तलाश कर रही है..और पुलिस यह भी जाँच करने में जुटी है की इस पूरे घटना के पीछे बैंक के किसी कर्मचारी का हाथ तो नहीं है क्युकी यह लोग पिछले चार सालो से इस तरह से एटीएम से पैसा निकाल कर खर्च करते थे..और एटीम से ही पैसा निकाल कर अपनी रोज मर्रा की
जरूरते पूरी  करने के साथ ही साथ गलत कामो को करने में भी इसी पैसे का इस्तेमाल किया करते थे….इस मामले में पकडे गए तीन लोगो में एक लोकल चैनल का का पत्रकार भी शामिल है….पकडे गए तीनो के से २२ लाख पचास हजार रुपये बरामद हुए है..पुलिस का कहना है इस मामले में बैंक की तरफ से भी कई खामिया प्रकाश में आई है जिसकी भी पुलिस अलग से जाँच कर रही है..फिलहाल फरार कस्टोडियन भूपेश कुशवाहा की गिरफ्तारी के लिए पुलिस की कई टीमे लगी हुई है…

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  • Published: 5 years ago on July 18, 2012
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  • Last Modified: July 18, 2012 @ 1:05 pm
  • Filed Under: अपराध

About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक “मुखौटों के पीछे – असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष” में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

1 Comment

  1. laldhari_yadav says:

    hamara deas mahan hia buta choaroa sea pary sanhia ean logoa koa kadea sja mialna chahiya

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