/अमरनाथ यात्रा के दौरान महिला का एमएमएस बनाया…

अमरनाथ यात्रा के दौरान महिला का एमएमएस बनाया…

अमरनाथ यात्रा पर जा रहीं महिला श्रद्धालु सावधान हो जाएं. अगर वह यात्रा मार्ग पर किसी लंगर समिति के शौचालय अथवा स्नानगृह में जाती हैं तो उसका एमएमएस भी बन सकता है. अमरनाथ यात्रा पर जा रहे श्रद्धालुओं के लिए बने शिविर में एक महिला यात्री का एमएमएस बनाए जाने की खबर ने सबको सकते में डाल दिया है.

पुलिस ने ऐसे ही एक मामले में दो सेवादारों को हिरासत में लिया है, जबकि तीसरा फरार हो गया है. आरोपियों के कब्जे से मोबाइल फोन, चिप व महिला श्रद्धालुओं के बीस अश्लील एमएमएस भी मिले हैं.

यह मामला 11 जुलाई का है। जालंधर की एक महिला ने शिविर बालटाल पुलिस चौकी में एफआइआर दर्ज कराई है. महिला के अनुसार, वह बालटाल में हेलीपैड के पास ही स्थित एक लंगर में गई थी. उसने बताया कि यह लंगर भी जालंधर की एक लंगर समिति श्री अमरनाथ [बी] ट्रस्ट का है. वह जब स्नानगृह में गई तो उसे टीन की चादर के पीछे से कुछ शोर सुनाई दिया. उसने देखा कि स्नानगृह की टीन की चादर में कुछ छेद हैं और वहा से कोई अंदर झाक रहा है. उसने शोर मचाया तो वहा से कुछ लड़के भागे, जिनके हाथ में मोबाइल था. महिला ने बताया कि इसके बाद उसने पुलिस में इसकी शिकायत की. पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए लंगर के दो सेवादारों को हिरासत में ले लिया, जबकि एमएमएस बना रहा उनका तीसरा साथी भाग निकला.

पुलिस ने पकडे़ गए सेवादारों से जब पूछताछ की तो उन्होंने अपना अपराध कबूल कर लिया. उनके पास से मोबाइल के साथ ही करीब 20 अश्लील एमएमएस भी मिले. इनमें शिकायतकर्ता महिला का एमएमएस भी मिला है. महिला ने आरोप लगाया कि प्रमुख आरोपी जो कि अभी फरार है, वह लंगर समिति के प्रमुख का रिश्तेदार है और वह लोग अब उसे इस मामले को वापस लेने के लिए धमका रहे हैं.

(जागरण)

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.