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अर्चना की शिकायत पर मुकदमा दर्ज

By   /  July 21, 2012  /  No Comments

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लखनऊ: राजधानी पत्रकारों पर चढ़ा आशिक-मिजाजी का नशा आखिरकार काफूर हो गया है। लखनऊ पुलिस ने अर्चना यादव नामक पत्रकार की शिकायत पर कार्रवाई करते हुए मामले का मुकदमा दर्ज कर लिया है। हुसैनगंज थाना कोतवाली में अभी-अभी दर्ज कराये गये इस मुकदमे में अर्चना ने छत्‍तीसगढ़ के रायपुर से प्रकाशित अनिल त्रिपाठी और नार्थईस्‍ट स्‍टेट्समैन के विशेष संवाददाता पर छेड़खानी, अश्‍लील गति‍विधियों में लिप्‍त करने और अर्चना यादव पर जान से मार देने की धमकी देने का मामले कराया है। पुलिस में दर्ज इस मामले को अपराध संख्‍या 163-12 पर धारा 323, 354 और 506 भारतीय दंड संहिता के तहत लिखा है। खबर है कि पुलिस ने इस मामले में शामिल अभियुक्‍तों की धर-पकड़ के लिए चार टीमें लगायी हैं।

गौरतलब है कि लाइव टूडे नामक किसी समाचार संस्‍थान की पत्रकार अर्चना यादव ने 18 जुलाई-12 को पुलिस को भेजे अपने एक मेल से शिकायत की थी कि अर्चना यादव  को अनिल त्रिपाठी और  सतीश प्रधान नाम के  पत्रकार अपने एक साथी के साथ पिछले कई दिनों से परेशान कर रहे थे। रायपुर छत्‍तीसगढ़ से प्रकाशित दैनिक देशबंधु अखबार के रिपोर्टर  अनिल त्रिपाठी और सतीश प्रधान नॉर्थ ईस्‍ट स्‍टेट्समैन नामक संस्‍थान में विशेष संवाददाता हैं। अनिल त्रिपाठी लखनऊ से युग जागरण नामक एक खबर का संचालन भी करते हैं।

कुमार सौवीर
लो, मैं फिर हो गया बेरोजगार।
अब स्‍वतंत्र पत्रकार हूं और आजादी की एक नयी लेकिन बेहतरीन सुबह का साक्षी भी।
जाहिर है, अब फिर कुछ दिन मौज में गुजरेंगे।
मौका मिले तो आप भी आइये। पता है:-
एमआईजी-3, सेक्‍टर-ई
आंचलिक विज्ञान केंद्र के ठीक पीछे
अलीगंज, लखनऊ-226024
फोन:- 09415302520
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About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक “मुखौटों के पीछे – असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष” में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

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