/पाखाने भी डकार गए अफसर और एनजीओ चलाने वाले…

पाखाने भी डकार गए अफसर और एनजीओ चलाने वाले…

-कुमार सौवीर||

लखनऊ: यूपी में हुए करोड़ों के पाखाना-घोटाला की गंदगी अब पूरे उत्‍तर प्रदेश में पसरी दिखने लगी है। रामपुर, बरेली और बरेली में शौचालयों के निर्माण के लिए फण्‍ड में हुए भारी गड़बड़घोटाला पर एफआईआर दर्ज कराने के बाद सरकार की नजर अब हरदोई और शाहजहांपुर पर है। जांच शुरू हो गयी है और देर-सबेर यहां भी दर्जनों अफसरों और सुलभ शौचालय समेत कई एनजीओ के कर्ताधर्ताओं के खिलाफ कार्रवाई शुरू की जाएगी। गौरतलब है कि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने घोटालों में शामिल लोगों को किसी भी तरह की राहत नहीं देने का फैसला किया है। इस पाखाना-घोटाले में प्रदेश के सूडा विभाग के पूर्व निदेशक और वरिष्‍ठ नौकरशाह चिंतामणि समेत फिलहाल आधा दर्जन बड़े अफसरों का नाम शामिल है। उधर खबर है कि सुलभ इंटरनेशनल के प्रमुख बिंदेश्‍वरी पाठक ने आज सुबह राहुल गांधी से मुलाकात की। समझा जाता है कि राहुल गांधी से बातचीत में पाठक ने अपने पर चले ताजा मामलों की चर्चा की। गौरतलब है कि यूपी, हरियाणा, पंजाब और उड़ीसा समेत कई राज्‍यों में हुए इस घोटाले पर संबंधित राज्‍य आपराधिक मामला दर्ज करा चुकी हैं। इन शिकायतों में मैला-व्‍यवसाय से जुड़े कर्मचारियों पर श्रम-संबंधी कानून के उल्‍लंघन के गंभीर प्रकरण भी शामिल हैं।

बताते चलें कि शौचालयों के निर्माण की चलायीं गयी योजना में करोड़ों का घोटाला अब तक सामने आ चुका है। यूपी में बदले राजनीतिक हालातों के चलते जब नगर विकास विभाग ने छानबीन की तो पता चला कि अकेले रामपुर जिले के शहरी क्षेत्र में ही तीन करोड़ के घोटाले का खुलासा हुआ। जांच में पता चला था कि अकेले सन 09 में यहां 9140 शौचालयों के निर्माण का काम सुलभ शौचालय समेत अनेक एनजीओ कराने का दायित्‍व सौंपा गया था। इसके लिए नौ करोड़ नौ लाख रूपयों का पैसा भी इन गैरसरकारी संगठनों को जारी किया गया था, लेकिन इस दौरान 2984 शौचालयों का निर्माण केवल कागजों पर हो गया। याने कि अफसर और एन जी ओ मिलकर पाखाने भी खा गए।

पाखाना-घोटाले की कुल लागत प्रदेश के 53 जिलों के लिए लागू थी। लेकिन इन सभी जिलों में इस योजना की खुलेआम धज्जियां उड़ायीं गयीं। बसपा सरकार के गिरने के बाद सपा सरकार ने इस मामले की जांच की तो रामपुर से घोटाले की कड़ी खुलने लगी। बताते हैं कि यह घोटाला अकेले रामपुर के शहरी में पता चला, ग्रामीण में तो इसकी भी और गंभीरता थी। नगर विकास मंत्री आजम खां ने मामले पर फौरन बाद ही सूडा के अफसरों के साथ ही सुलभ इंटरनेशनल के अफसरों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई शुरू करा दी। फिलहाल, सुलभ के राज्‍य प्रतिनिधि एसआर ईमाम लापता हैं, और उनके खिलाफ अदालत ने गैरजमानत वारंट जारी कर दिया है। उधर मेरठ, बरेली में ऐसे ही घोटाले का खुलासा होने के बाद वहां भी एफआईआर करा दी गयी है। सूडा के मौजूदा निदेशक शिवशंकर सिंह के अनुसार शाहजहांपुर और हरदोई में सघन छानबीन शुरू कर दी गयी है, जबकि प्रदेश के अन्‍य जिलों में भी जल्‍दी ही कार्रवाई हो सकती है। सूडा के साथ ही ग्रामीण इलाकों के लिए ऐसी योजना का जिम्‍मा सम्‍भालने वाले उप्र पंचायत राज विभाग में भी घोटालों की शिकायतों की जांच करायी जा रही है।

यूपी में हुए इस पाखाना-घोटाले में धारा 409, 420, 467, 468 और 471 के साथ ही 7-13 के तहत स़डा के पूर्व निदेशक चिंतामणि, वित्‍त नियंत्रक वीके श्रीवास्‍तव, एक वरिष्‍ठ पीसीएस अधिकारी  एके कौशल के साथ ही साथ सुलभ इंटरनेशनल के एसआर ईमाम, अजीत व कंचन ग्रामोध्‍योग विकास संस्‍थान मुरादाबाद के अध्‍यक्ष नंद किशोर सिंह, सहारनपुर के चेतना सेवा सदन के सचिव निकुंज शर्मा, और लखनऊ के रानी मेमोरियल सोसायटी के प्रमुख राजीव कुमार सिंह चौहान आदि शामिल हैं। फिलहाल इनमें शामिल सभी अफसरों में से दो को निलंबित कर दिया गया है। हालांकि एसआर ईमाम इस मामले में घोटाले की बात से इनकार करते हैं। उनका कहना है कि निर्माण के बाद हुए भौतिक सत्‍यापन में किसी भी तरह की गड़बड़ी की बात सामने नहीं आयी थी।

उधर इस मामले में ताजा मोड़ तब आ गया, जब बीती शाम दिल्‍ली में राहुल गांधी से मिलने के लिए बिंदेश्‍वरी पाठक पहुंचे। बताते हैं कि राहुल से भेंट के लिए पाठक ने जल्‍दी ही समय हासिल किया था। समझा जाता है कि पाठक ने दीगर बातों के अलावा हरियाणा, पंजाब, यूपी और उड़ीसा में शौचालयों के निर्माण के लिए चल रही योजना और उसके लेकर चल रहे विवादों पर चर्चा की। जानकारों का कहना है कि राहुल के साथ हुई पाठक की इस भेंट को लेकर इस मसले पर चल रही भड़कती राजनीति का एक नया चेहरा मोड दिया जा सकता है। लेकिन इस भेंट पर चर्चाओं और अफवाहों का दौर तो शुरू हो गयी है।

 

कुमार सौवीर
लो, मैं फिर हो गया बेरोजगार।
अब स्‍वतंत्र पत्रकार हूं और आजादी की एक नयी लेकिन बेहतरीन सुबह का साक्षी भी।
जाहिर है, अब फिर कुछ दिन मौज में गुजरेंगे।
मौका मिले तो आप भी आइये। पता है:-
एमआईजी-3, सेक्‍टर-ई
आंचलिक विज्ञान केंद्र के ठीक पीछे
अलीगंज, लखनऊ-226024
फोन:- 09415302520
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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.