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यूपी महुआ न्‍यूज में तालाबंदी के आसार पुख्‍ता, ब्‍यूरो प्रमुख रमा सोलंकी का इस्‍तीफा

By   /  July 22, 2012  /  No Comments

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-कुमार सौवीर||

लखनऊ: यूपी महुआ न्‍यूज में तालाबंदी के आसार पुख्‍ता हो गये हैं। संस्‍थान में पसरी आर्थिक बदहाली और जबर्दस्‍त आंतरिक उठापटक के चलते हुई इस हालत में आखिरकार ब्‍यूरो प्रमुख रमा सोलंकी ने महुआ न्‍यूज से अपना पल्‍ला झाड़ लिया है। फिलहाल इस चैनल में भारी अनिश्चितता का माहौल है। संवाददाता और कैमरामैन जैसे कर्मचारियों को वेतन तक के लिए भी पैसा मुहैया नहीं है। जाहिर है, श्रमिक असंतोष खूब है।

खबरें हैं कि इस चैनल का शटर देर-अबेर गिरने ही वाला है। रमा सोलंकी अब महुआ न्‍यूज में नहीं रही हैं। पिछले सवा साल से वे इस पद पर थीं। वे अपने साक्षात्‍कारों के लिए चर्चित शख्शियत के तौर पर पहचानी जाती रही हैं। हालांकि रमा सोलंकी ने चार दिन पहले ही अपना इस्‍तीफा दे दिया था। पता चला है कि अभी तक महुआ न्‍यूज से उनका इस्‍तीफा मंजूर नहीं किया गया है। खबर है कि पिछले एक हफ्ते से वे दिल्‍ली में ही जमी हैं और पुख्‍ता सूचनाओं के अनुसार वे अब वापस लौटने के मूड में नहीं हैं। काफी प्रयास के बाद फोन पर सम्‍पर्क होने पर रमा सोलंकी ने माना कि उन्‍होंने महुआ छोड़ दिया है। रमा का कहना था कि वे एक बड़े वेंचर पर काम कर रही हैं और जल्‍दी ही वे ऐसे बड़े न्‍यूज चैनल से जुड़ेंगी। महुआ चैनल में चल रहे फैले असंतोष और अराजकता की हालत रमा सोलंकी ने पूरी तरह खारिज कर दिया है।

उधर, भरोसेमंद सूत्रों के अनुसार, महुआ महुआ न्‍यूज की माली हालत खस्‍ता है। पिछले दो महीने से कर्मचारियों को उनकी तनख्‍वाह का भुगतान नहीं हो पाया है। सूत्रों के अनुसार जबर्दस्‍त आर्थिक बदहाली के चलते महुआ न्‍यूज प्रबंधन इस चैनल को यूपी में चला पाने की हालत में नहीं है। इस आंतरिक हालत के चलते संस्‍थान से भगदड़ की हालत बतायी जाती है।

 

कुमार सौवीर
लो, मैं फिर हो गया बेरोजगार।
अब स्‍वतंत्र पत्रकार हूं और आजादी की एक नयी लेकिन बेहतरीन सुबह का साक्षी भी।
जाहिर है, अब फिर कुछ दिन मौज में गुजरेंगे।
मौका मिले तो आप भी आइये। पता है:-
एमआईजी-3, सेक्‍टर-ई
आंचलिक विज्ञान केंद्र के ठीक पीछे
अलीगंज, लखनऊ-226024
फोन:- 09415302520
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About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

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