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शहीदों की चिताओं पर लगेंगे हर वर्ष मेले….

By   /  July 23, 2012  /  1 Comment

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भारत माँ के सच्चे सपूत, क्रांतिकारियों के मसीहा,सच्चे प्रणपालक, स्वतत्रंता को अपना पिता और जेल को अपना घर घोषित करने वाले, शहीद चन्द्रशेखर आजाद जी की 112 वीं जयंती है.

आज ही के दिन एक और महान देशभक्त जिसने उद्घोष किया “स्वतंत्रता मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है” परम आदरणीय, गरमदल के अगुवा पंडित बाल गंगाधर तिलक जी की भी 156 वीं जयंती है माँ भारती के दो अनमोल रतनो को उनकी जयंती  पर शत शत नमन.

कितने दुःख की बात है जिन्होंने देश की स्वतंत्रता के लिए अपने प्राणों का सहर्ष बलिदान कर दिया आज उनका सम्मान नहीं होता और जिन्होंने देश की आजादी को केवल नाम से भुना लिया उनके नाम पर हर तरफ स्मारक बने, पार्क बने  और उनको भारत रत्न घोषित किया गया पर शायद हमारी सरकारे ये भूल गयी कि जिन्हें माँ के चरणों में बलिदान देने का शौक हो वो किसी सरकारी पुरस्कार के मोहताज नहीं होते वो तो सच्चे भारत रत्न थे, है और हमेशा रहेंगे.

 

आज इन भारत माँ के सपूतों की जन्‍मतिथि पर रामप्रसाद बिस्मिल की ये पंक्तियां शायद वर्तमान हालात में नौजवानों को रास्‍ता दिखाये.

नौजवानों, जो तबीयत में तुम्हारी ख़टके
याद कर लेना हमें भी कभी भूले-भटके
आप के जुज़वे बदन होवे जुदा कट-कट के
और सद चाक हो माता का कलेजा फटके
पर न माथे पे शिकन आए क़सम खाने को

नौजवानों यही मौक़ा है उठो खुल खेलो
और सर पर जो बला आए ख़ुशी से झेलो
क़ौम के नाम पे सदक़े पे जवानी दे दो
फिर मिलेंगी न ये माता की दुआएं ले लो
देखें कौन आता है इरशाद बजा लाने को

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  • Published: 5 years ago on July 23, 2012
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  • Last Modified: July 23, 2012 @ 12:01 pm
  • Filed Under: देश

About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक “मुखौटों के पीछे – असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष” में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

1 Comment

  1. laldhari_yadav says:

    हम इअनको बहुँत बहुँत नमस्कार करता हु दिअनिअक प्रणाम करता हु जिअतना य लोअग बलिअदान दिय उअतना ही हमारय दिअस मय लोअग
    गदारिय करतीय इअतना नही सोअचत्य नही है सहिदोअको कितना तक लिअफ़ होअगा लोअग स्रेफ़ अपनय बारे मय सोचातीय है दुअस्रोअ कय बारे मय नही सोचत्य किव किय निअत ठिअक नही है

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