कृपया अपनी खबरें, सूचनाएं या फिर शिकायतें सीधे [email protected] पर भेजें | इस वेबसाइट पर प्रकाशित लेख लेखकों, ब्लॉगरों और संवाद सूत्रों के निजी विचार हैं। मीडिया के हर पहलू को जनता के दरबार में ला खड़ा करने के लिए यह एक सार्वजनिक मंच है। पाठक चाहे आलेखों से सहमत हों या असहमत, किसी भी लेख पर टिप्पणी करने को स्वतंत्र हैं। हम उन टिप्पणियों को बिना किसी भेद-भाव के निडरता से प्रकाशित भी करते हैं चाहे वह हमारी आलोचना ही क्यों न हो। आपसे अनुरोध है कि टिप्पणियों की भाषा संयत एवं शालीन रखें -मॉडरेटर

शहीदों की चिताओं पर लगेंगे हर वर्ष मेले….

भारत माँ के सच्चे सपूत, क्रांतिकारियों के मसीहा,सच्चे प्रणपालक, स्वतत्रंता को अपना पिता और जेल को अपना घर घोषित करने वाले, शहीद चन्द्रशेखर आजाद जी की 112 वीं जयंती है.

आज ही के दिन एक और महान देशभक्त जिसने उद्घोष किया “स्वतंत्रता मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है” परम आदरणीय, गरमदल के अगुवा पंडित बाल गंगाधर तिलक जी की भी 156 वीं जयंती है माँ भारती के दो अनमोल रतनो को उनकी जयंती  पर शत शत नमन.

कितने दुःख की बात है जिन्होंने देश की स्वतंत्रता के लिए अपने प्राणों का सहर्ष बलिदान कर दिया आज उनका सम्मान नहीं होता और जिन्होंने देश की आजादी को केवल नाम से भुना लिया उनके नाम पर हर तरफ स्मारक बने, पार्क बने  और उनको भारत रत्न घोषित किया गया पर शायद हमारी सरकारे ये भूल गयी कि जिन्हें माँ के चरणों में बलिदान देने का शौक हो वो किसी सरकारी पुरस्कार के मोहताज नहीं होते वो तो सच्चे भारत रत्न थे, है और हमेशा रहेंगे.

 

आज इन भारत माँ के सपूतों की जन्‍मतिथि पर रामप्रसाद बिस्मिल की ये पंक्तियां शायद वर्तमान हालात में नौजवानों को रास्‍ता दिखाये.

नौजवानों, जो तबीयत में तुम्हारी ख़टके
याद कर लेना हमें भी कभी भूले-भटके
आप के जुज़वे बदन होवे जुदा कट-कट के
और सद चाक हो माता का कलेजा फटके
पर न माथे पे शिकन आए क़सम खाने को

नौजवानों यही मौक़ा है उठो खुल खेलो
और सर पर जो बला आए ख़ुशी से झेलो
क़ौम के नाम पे सदक़े पे जवानी दे दो
फिर मिलेंगी न ये माता की दुआएं ले लो
देखें कौन आता है इरशाद बजा लाने को

Facebook Comments

संबंधित खबरें:

  • संबंधित खबरें उपलब्ध नहीं

Shortlink:

One Response to शहीदों की चिताओं पर लगेंगे हर वर्ष मेले….

  1. laldhari_yadav

    हम इअनको बहुँत बहुँत नमस्कार करता हु दिअनिअक प्रणाम करता हु जिअतना य लोअग बलिअदान दिय उअतना ही हमारय दिअस मय लोअग
    गदारिय करतीय इअतना नही सोअचत्य नही है सहिदोअको कितना तक लिअफ़ होअगा लोअग स्रेफ़ अपनय बारे मय सोचातीय है दुअस्रोअ कय बारे मय नही सोचत्य किव किय निअत ठिअक नही है

पाठक चाहे आलेखों से सहमत हों या असहमत, किसी भी लेख पर टिप्पणी करने को स्वतंत्र हैं. हम उन टिप्पणियों को बिना किसी भेद-भाव के निडरता से प्रकाशित भी करते हैं चाहे वह हमारी आलोचना ही क्यों न हो. आपसे अनुरोध है कि टिप्पणियों की भाषा संयत एवं शालीन रखें - मॉडरेटर