/सन्नी लियोन से प्रेरित शर्लिन चोपड़ा भी पोर्न स्टार बन सकती है….

सन्नी लियोन से प्रेरित शर्लिन चोपड़ा भी पोर्न स्टार बन सकती है….

प्लेब्वॉय के कवर पेज पर अपनी नग्न काया का प्रदर्शन करने वाली शर्लिन चोपड़ा अब पोर्न फिल्मों में काम करने को उतावली हो रही है. शर्लिन चोपड़ा के अनुसार ऐसी फिल्मों में अपनी प्रतिभा दिखने के बेहतरीन अवसर होते हैं.

दरअसल देश के युवाओं को पथभ्रष्ट करने के लिए फिल्म उद्योग और इस देश के विज्ञापन जगत ने जैसे कमर ही कस ली है. एक ज़माने से खुद को अपनी माता के अनैतिक पुत्र यानि हराम की औलाद का तमगा देकर बेच रहे महेश भट्ट की पुत्री पूजा भट्ट खुद को “बेटी बाप से बढ़के” सिद्ध करने के चक्कर में अपनी जल्द रिलीज हो रही फिल्म जिस्म-२ में विदेशी पोर्न स्टार सन्नी लियोन को लाती है और खुद को हरामजादे  की औलाद साबित करनें में कोई कोर कसर बाकि नहीं छोड़ना चाहती. और सन्नी लियोन से प्रेरित होकर मोना चोपड़ा से नाम बदल कर बनी शर्लिन चोपड़ा हिंदी फिल्मों और मॉडलिंग की दुनियाँ में नाकामयाबी के बाद प्लेब्वॉय मैगजीन के कवर पेज पर नग्न हो कर इठलाती नजर आने लगी.

इंतिहा तो तब हो गयी जब  शर्लिन चोपड़ा  ने इस नग्न फोटोशूट के बाद मुंबई लौटने पर बयान दिया कि भारतवासियों को गर्व होना चाहिए कि प्लेब्वॉय मैग्जीन के कवर पेज पर आने वाली वह पहली भारतीय है और इसके लिए उसे भारतरत्न का ख़िताब मिलना चाहिए. कोई ताज्जुब नहीं होगा अगर देश के राजनैतिक हालातों और भ्रष्ट शासकों की मेहरबानी से शर्लिन चोपड़ा ऐसा कोई ख़िताब पाने में कामयाब भी हो जाये. वैसे भी पिछले दिनों कुछ नेताओं के सामने आये सेक्स स्कैंडलों से ज़ाहिर है कि कई राजनेताओं की निगाहों में शर्लिन चोपड़ा की कमनीय काया नाच रही होगी.
अब शर्लिन चोपड़ा की महत्वाकांक्षा अब पोर्न फिल्मों में नाम कमाने की है. जिसके चलते पिछले दिनों शर्लिन चोपड़ा ने एक वेब साईट को दिए साक्षात्कार में पूछे गए एक सवाल “क्या वे सन्नी लियोन की तरह व्यस्क फिल्मों में काम करना पसंद करेगीं?” का जवाब देते हुए शर्लिन चोपड़ा ने बेहिचक कहा कि ऐसी फिल्मों में “उत्कृष्ट” “काम” करने के बेहतरीन अवसर होते हैं और इनका बाज़ार भी बहुत बड़ा है. मुझे ऐसे अवसर मिलने पर मैं यह “उत्कृष्ट” कार्य करने को उपलब्ध रहेगीं.
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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.