Share this on WhatsApp
Subscribe to RSS
कृपया अपनी खबरें, सूचनाएं या फिर शिकायतें सीधे mediadarbar@gmail.com पर भेजें | इस वेबसाइट पर प्रकाशित लेख लेखकों, ब्लॉगरों और संवाद सूत्रों के निजी विचार हैं। मीडिया के हर पहलू को जनता के दरबार में ला खड़ा करने के लिए यह एक सार्वजनिक मंच है। पाठक चाहे आलेखों से सहमत हों या असहमत, किसी भी लेख पर टिप्पणी करने को स्वतंत्र हैं। हम उन टिप्पणियों को बिना किसी भेद-भाव के निडरता से प्रकाशित भी करते हैं चाहे वह हमारी आलोचना ही क्यों न हो। आपसे अनुरोध है कि टिप्पणियों की भाषा संयत एवं शालीन रखें -मॉडरेटर

अबला जीवन हाय तुम्हारी यही कहानी ! आँचल में दूध और आँखों में पानी !!

-अर्चना यादव||

ज़रा सोचिये इंसान की शक्ल में घूमने वाले न जाने कितने भेडियों की शिकार होती है यह नारी, जिसका ज़िक्र तक नहीं होता समाज में, न ही उसके बारे में किसी को जानकारी हो पाती है . बहुत

से लोग तमाम घडियाली आंसू बहते है महिलाओं की स्थिति पर, उनमें महिलाओं की संख्या भी खूब होती है .
महिलाओं के साथ हो रहे अत्याचार एवं अपराध से निपटने के लिए जटिल कानूनी प्रक्रिया भी एक बाधा है, जिससे उन्हें न्याय देरी से मिलते है और बहुत से मामलों में वो न्याय से वंचित रह जाती  है  . आज भी महिलाओं की स्थिति हमारे समाज में दोयज दर्जे की है .
सीओ हजरतगंज द्वारा बुलाये जाने पर मुझे लगातार हो रही मूसलाधार तेज़ बारिश में विवश होकर जाना पड़ा क्योकि मुझे बताया गया की अनिल त्रिपाठी वहां  थाने में मौजूद है और आपसे कुछ वार्ता करनी है और थाने में सात आठ पुरुषो के सम्मुख मुझसे पूछताछ की गयी . थाने पर थानेदार और उनके सहयोगियों को देखकर शेरों के सम्मुख जो स्थिति शिकार की होती है ऐसी ही अनुभूति हुयी . क्या यह उचित है कि अकेली लड़की पर पुलिसिया रौब दिखा कर थाने पर पूछताछ के नाम पर बुलाया जाना और मानसिक दबाव बनाया जाए. बरसात के इस मौसम में भीगते हुए कानून से न्याय मांगते हुए एक पीड़ित महिला को थाने में बुलाकर कौन सी जांच की  जायेगी . वहा थाने में पुलिसकर्मियों के अलावा  कई दूसरे लोग और  एक वरिष्ठ पत्रकार भी मौजूद थे. मेरा सवाल है सबसे कि इस तरह थाने में सबसे सामने बुलाना और पूछताछ करना क्या उचित था . एक बार फिर शर्मिन्दिगी और इस बेज्जती को  सहकर आँखे भर आई मेरी .
आज की  इस न्याय प्रणाली का अवलोकन करने पर ज्ञात हुआ कि शायद मुझे आवाज़ नहीं उठानी थी और न जाने कितनी महिलाओं ने यही सोच कर अनिल त्रिपाठी और सतीश प्रधान जैसे दरिंदों से अपना शोषण करवाया होगा. यहाँ प्रतीकात्मक कार्यवाही किसी भी अपराध की तुलना में अधिक कठिन है . यहाँ तक कि महिलाओं के प्रति अपराध को पारिभाषित करना भी अत्यधिक दुष्कर कार्य है. जांच, प्रमाण और पुलिस व्यवहार मिलकर सम्पूर्ण न्याय प्रक्रिया को हाशिये में ला खड़ा कर देते हैं.
कल के पुलिस के इस व्यवहार को देखकर लगता है कि शारीरिक अपराध के सम्बन्ध में महिलायें पुलिस थाने में जाकर रिपोर्ट लिखवाने में आज भी जिस भय को महसूस करती है वह पूर्णतया सत्य है . समुचित व् प्रभावी कानून न होने के कारण महिलाए न्याय पाने में  खुद को असहाय पाती है .

Facebook Comments

संबंधित खबरें:

कृपया अपनी खबरें, सूचनाएं या फिर शिकायतें सीधे mediadarbar@gmail.com पर भेजें | इस वेबसाइट पर प्रकाशित लेख लेखकों, ब्लॉगरों और संवाद सूत्रों के निजी विचार हैं। मीडिया के हर पहलू को जनता के दरबार में ला खड़ा करने के लिए यह एक सार्वजनिक मंच है। पाठक चाहे आलेखों से सहमत हों या असहमत, किसी भी लेख पर टिप्पणी करने को स्वतंत्र हैं। हम उन टिप्पणियों को बिना किसी भेद-भाव के निडरता से प्रकाशित भी करते हैं चाहे वह हमारी आलोचना ही क्यों न हो। आपसे अनुरोध है कि टिप्पणियों की भाषा संयत एवं शालीन रखें -मॉडरेटर

2 comments

#1Prithvi AroraSeptember 5, 2012, 10:45 AM

tum hamko ed kar lo.

#2satyapal singhJuly 29, 2012, 1:53 PM

में हमेशा तुम्हारे साथ हूँ मेरी जब भी आपको जरुरत पड़े मेरे से कान्टेक्ट कर लेना मेरा फोन ० ०९८३७५१२८५४ 09837122242

Add your comment

Nickname:
E-mail:
Website:
Comment:

Other articlesgo to homepage

साहेब के नाम एक ख़त..

साहेब के नाम एक ख़त..(0)

Share this on WhatsApp -रीमा प्रसाद|| थोड़ी उलझन में हूँ .. अपने खत की शुरूआत किस संबोधन से करूं. सिर्फ शहाबुद्दीन कहूंगी तो ये आपकी महानता पर सवाल होगा. शहाबुद्दीन जी या साहेब कहूंगी तो मेरा जमीर मुझे धिक्कारेगा. सो बिना किसी संबोधन के साथ और बिना किसा लाग लपेट के इस खत की शुरुवात

“मोदी ब्रांड” का मिसयूज कर रहे हैं एलजी, दिल्ली भाजपा नेता और राजनाथ सिंह..

“मोदी ब्रांड” का मिसयूज कर रहे हैं एलजी, दिल्ली भाजपा नेता और राजनाथ सिंह..(0)

Share this on WhatsApp -देवेंद्र शास्त्री॥ दिल्ली में आप सरकार के काम और उसके परिणामों से भाजपा और कांग्रेस की दिल्ली लीडरशिप बोखला गई है। उन्हें समझ ही नहीं आ रहा कि क्या किया जाए। दोनों पार्टियों की लीडरशिप एक बात पर सहमत हैं कि किसी तरह आप सरकार के कामकाज के सिलसिले को रोका

पत्रकारिता के स्तर में होगा व्यापक सुधार..

पत्रकारिता के स्तर में होगा व्यापक सुधार..(0)

Share this on WhatsApp बिना कोर्स किये हुए लोग नहीं बन सकेंगे पत्रकार.. नई दिल्ली। पत्रकारिता के गिरते स्तर तथा पत्रकारिता जगत में असामाजिक तत्वों के प्रवेश से चिंतित केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय द्वारा समाचार पत्रों के पंजीकरण, समाचार पत्र/पत्रिका व टीवी चैनल तथा न्यूज एजेंसी द्वारा जारी प्रैस कार्ड के लिए नियमावली तैयार

देशभक्ति की ओवरडोज़..

देशभक्ति की ओवरडोज़..(0)

Share this on WhatsApp -आरिफा एविस॥ नए भारत में देशभक्ति के मायने औए पैमाने बदल गये हैं. इसीलिए भारतीय संस्कृति की महान परम्परा का जितना प्रचार प्रसार भारत में किया जाता है शायद ही कोई ऐसा देश होगा जो यह सब करता हो. सालभर ईद, होली, दीवाली, न्यू ईयर पर सद्भावना सम्मेलन, मिलन समारोह इत्यादि

पटना के युवा कार्टूनिस्ट गौरव ने बनायी अपनी पहली फिल्म..

पटना के युवा कार्टूनिस्ट गौरव ने बनायी अपनी पहली फिल्म..(0)

Share this on WhatsApp 11 मिनट की शॉर्ट फिल्म है काश…थिंक बीफॉर एक्ट..  युवा मन को झकझोरती है फिल्म की कहानी.. -विवेकानंद सिंह|| आदमी जन्म लेता है. मां की गोद से लुढ़क कर चलना सीखता है, फिसलते-फिसलते जवान हो जाता है, संभलते-संभलते बूढ़ा और फिर लुढ़क कर इस दुनिया को अलविदा कह देता है. लेकिन हमारे

read more

ताज़ा पोस्ट्स

Contacts and information

मीडिया दरबार - जहाँ लगता है दरबार. आप ही राजा हैं इस दरबार के और कटघरे में है मीडिया. हम तो मात्र एक मंच हैं और मीडिया पर अपनी निगाह जमायें हैं, जहाँ भी मीडिया में कुछ गलत होता दिखाई देता है उसे हम आपके सामने रख देते हैं और चलाते हैं मुकद्दमा. जिसपर सुनवाई करते हैं आप, जहाँ न्याय करते हैं आप. जी हाँ, यह एक अलग किस्म का दरबार है. मीडिया दरबार...

Social networks

Most popular categories

© 2014 All rights reserved.
%d bloggers like this: