/गुजरात दंगों का गुनहगार हूं तो फांसी पर लटका दो – मोदी

गुजरात दंगों का गुनहगार हूं तो फांसी पर लटका दो – मोदी

‘अगर मैं गुजरात दंगों का गुनहगार हूं तो मुझे फांसी पर लटका दो’ यह कहना है गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी का। मोदी ने यह बात नई दुनिया नाम के उर्दू साप्ताहिक को दिए इंटरव्यू में कही है। मोदी का यह कवर पेज इंटरव्यू नई दुनिया के संपादक और समाजवादी पार्टी के राज्य सभा सांसद शाहिद सिद्दीकी ने लिया है।

छह पेज के इस इंटरव्यू में गोधरा कांड के बाद गुजरात दंगों, गुजरात में मुस्लिमों की हालत और कई अन्य संवेदनशील मुद्दों पर बात की गई है। शाहिद सिद्दीकी समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता हैं, ऐसे में मोदी का ये इंटरव्यू मुलायम का मोदी को लेकर नरम होने का संकेत तो नहीं है? इस पर सिद्दीकी कहते हैं कि ‘इस इंटरव्यू का नेताजी और समाजवादी पार्टी से कोई मतलब नहीं है। मैं पहले पत्रकार हूं और बाद में राजनीतिक पार्टी का सदस्य।’

‘अगर मैं गुजरात दंगों का गुनहगार हूं तो मुझे फांसी पर लटका दो’ यह कहना है गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी का। मोदी ने यह बात नई दुनिया नाम के उर्दू साप्ताहिक को दिए इंटरव्यू में कही है। मोदी का यह कवर पेज इंटरव्यू नई दुनिया के संपादक और समाजवादी पार्टी के राज्य सभा सांसद शाहिद सिद्दीकी ने लिया है।

छह पेज के इस इंटरव्यू में गोधरा कांड के बाद गुजरात दंगों, गुजरात में मुस्लिमों की हालत और कई अन्य संवेदनशील मुद्दों पर बात की गई है। शाहिद सिद्दीकी समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता हैं, ऐसे में मोदी का ये इंटरव्यू मुलायम का मोदी को लेकर नरम होने का संकेत तो नहीं है? इस पर सिद्दीकी कहते हैं कि ‘इस इंटरव्यू का नेताजी और समाजवादी पार्टी से कोई मतलब नहीं है। मैं पहले पत्रकार हूं और बाद में राजनीतिक पार्टी का सदस्य।’

जानकारों की मानें तो साल 2014 में होने वाले आम चुनाव को लेकर मोदी अपनी छवि सुधारने की मुहिम मे जुटे हुए हैं। इसी कोशिश में वो बीते दिनों सद्भावना उपवास कर चुके हैं। मोदी इससे पहले कभी इतने खुले रूप से दंगों की बात करते दिखाई नहीं दिए। इस इंटरव्यू में मोदी ने दंगों की जिम्मेदारी नहीं ली।

मोदी का इंटरव्यू लेने वाले शाहिद सिद्दीकी से IBN7 ने बात की। सिद्दीकी ने कहा कि मोदी का सपना देश का प्रधानमंत्री बनने का है और उन्हें इस बात का पूरा अंदाजा है कि जब तक उनके चेहरे पर लगा दंगे का दाग साफ नहीं होगा वो वहां तक नहीं पहुंच सकते। शाहिद सिद्दीकी ने मोदी के बयान को ईमानदार माने से इनकार किया। उन्होंने कहा, कि मोदी से जितने भी सवाल पूछे गए उन्होंने कुछ के ही सटीक जवाब दिए। बाकी सब पर वो चालाकी से बचते हुए निकल गए।

क्या नरेंद्र मोदी का ही इंटरव्यू लेने की कोई खास वजह थी? इस सवाल पर शाहिद सिद्दीकी का कहना था कि वो इंदिरा गांधी से लेकर आज तक देश के सभी प्रधानमंत्रियों का इंटरव्यू कर चुके हैं। मनमोहन सिंह ही ऐसे पीएम हैं जिनका इंटरव्यू वो नहीं ले सके हैं। सोनिया गांधी के इंटरव्यू के लिए भी वो काफी वक्त से प्रयास कर रहे हैं।

इंटरव्यू में मोदी ने यह गुनहगार होने पर फांसी देने की बात तो की ही लेकिन यह भी कहा है कि अगर मैं निर्दोष हूं तो देश मुझसे माफी मांगे। बकौल सिद्दीकी, मोदी नेता तो अच्छे हैं लेकिन इंसान भी अच्छा होना जरूरी है।

(आईबीएन)

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.