कृपया अपनी खबरें, सूचनाएं या फिर शिकायतें सीधे [email protected] पर भेजें | इस वेबसाइट पर प्रकाशित लेख लेखकों, ब्लॉगरों और संवाद सूत्रों के निजी विचार हैं। मीडिया के हर पहलू को जनता के दरबार में ला खड़ा करने के लिए यह एक सार्वजनिक मंच है। पाठक चाहे आलेखों से सहमत हों या असहमत, किसी भी लेख पर टिप्पणी करने को स्वतंत्र हैं। हम उन टिप्पणियों को बिना किसी भेद-भाव के निडरता से प्रकाशित भी करते हैं चाहे वह हमारी आलोचना ही क्यों न हो। आपसे अनुरोध है कि टिप्पणियों की भाषा संयत एवं शालीन रखें -मॉडरेटर

सावधान सोशल नेटवर्किंग आपकी नौकरी खा सकती है….

4
Want create site? Find Free WordPress Themes and plugins.

-कनुप्रिया गुप्ता||

फेसबुक और ट्विटर  जैसी सोशल नेट वर्किंग साइटस ने हम सभी की जिंदगी बदल दी है चलते-फिरते खाते – पीते हर बात हम लोग अपने स्टेटस पर लिख देते है. ऐसा करना सही या गलत इस पर सबकी अपनी राय हो सकती है पर ये आजकल हमारी जिंदगी का हिस्सा है.

 कही घूमने गए फोटो  फेसबुक पर, घर में उत्सव हुआ फोटो फेसबुक पर , बारिश हुई ट्विट कर दिया,  नहीं हुई ट्विट कर दिया, किसी पर गुस्सा आया तो ट्विट कर दिया या किसी पर नाराज़ हैं, स्टेटस अपडेट किया. यहाँ तक की घर में जलेबी बनी, नए कपडे लिए, शॉपिंग गए, तबियत ख़राब हुई ठीक हुई हर बात हम फेसबुक पर अपडेट कर देते हैं….और नहीं तो ट्विट का चटका लगा देते है.
बात तब तक ठीक है सोशल नेटवर्क पर अपडेट हैं मेरी नज़र में इस बात में बुराई भी नहीं क्यूंकि में स्वयं उसी जनरेशन  का हिस्सा हूँ और लोगो से जुड़े रहने में अच्छा महसूस करती हूँ.खैर बात मेरी आपकी नहीं. जुड़े रहना, ट्विट करना ,अपडेट करना इसकी भी नहीं बात ये भी नहीं की हम क्या और कितना और किसके साथ शेयर कर रहे हैं, ये हमारा विवेक है. पर हमारे विवेक को और हमारी सोच को प्रभावित करने करने के लिए घटनाएँ हो रही हैं, जो हमें प्रभावित कर सकती हैं.
हाल ही में किए गए एक शोध के अनुसार आजकल कंपनिया चुने जाने वाले केंडीडेट्स के बैकग्राऊंड चैक के लिए सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर उनके अकाउंट की पड़ताल करने लगी है और विदेशों में इसे आधिकारिक रूप से स्वीकृति भी मिल चुकी है.भारत में इसे अभी कानूनी मान्यता नहीं मिली है पर कई कंपनियों ने अपने कर्मचारियों के बैकग्राऊंड चैक के लिए  ये तिकड़म  भिड़ानी शुरू कर दी है .
आम भारतीयों को (वैसे आम जो कुछ फोटो डाल देते है, खाया पिया हसे गाए के स्टेटस डालते हैं या एसे ही आम काम करते हैं ) इससे ज्यादा समस्या नहीं होने वाली, समस्या उन लोगो को होगी जो आम से कुछ अलग है यानि अपने स्टेटस पर गाली गलोच का प्रयोग करते है, या जातिगत कमेन्ट  ज्यादा करते हैं, या घटिया भाषा, रंगभेद, लिंगभेद को बढ़ावा देते स्टेटस डालते हैं. इसी  के साथ उन लोगो पर भी इन कंपनियों की नज़र है जो रात की पार्टी में टुन्न होकर फोटो खिचवा लेते हैं और वैसी ही मदहोशी की हालत वाली फोटो फेसबुक या ट्विटर या पर फैला देते हैं . तो सावधान रहिये हो सकता है कल को जब आप अच्छा दमदार रिज्यूमे तैयार करके साक्षात्कार दे और जवाब में आए की आप हमारी कम्पनी में काम नहीं कर सकते क्यूंकि आपके फेसबुक के फोटो आपत्तिजनक हैं .
इतना ही नहीं ये कम्पनियां आपके साथ साथ आपकी फ्रेंड लिस्ट में जुड़े लोगो पर भी नज़र रखेंगी  और अगर आपकी फ्रेंड लिस्ट में आपराधिक प्रवृति या रिकॉर्ड वाले लोग पाए गए तो आप पर खतरा मंडरा  सकता है, सावधान हो जाइये क्यूंकि आप ऑफिस के बाहर क्या कर रहे है, किन लोगो में आपका उठना बैठना है हर बात पर आपके नियोक्ता की नज़र है .
यहाँ एक मुद्दा व्यक्तिगत अधिकारों के हनन का भी है और अमेरिका में इसे लेकर बहस जारी है कि क्या इस तरह का बैकग्राऊंड चैक निजी जीवन में घुसपैठ  नहीं है ? क्योंकि वहा पारित कानून के अनुसार एक बार इस तरह का बैकग्राऊंड चैक होने के बाद अगर व्यक्ति उचित नहीं पाया गया तो ७ वर्षों के लिए इसी बैकग्राऊंड चैक को आधार मानकर  कम्पनी  आपकी नियुक्ति पर रोक लगा सकती है .
निजता का हनन तो ये है ही क्यूंकि प्रत्येक व्यक्ति अपनी प्रोफेशनल लाइफ और पर्सनल लाइफ में अलग हो सकता है वो अपने काम में माहिर हो सकता है पर सामाजिक रूप से आक्रामक या कुछ असामाजिक हो सकता है ,देखा जाए तो कंपनियों को ये अधिकार नहीं दिया जाना चाहिए पर दूसरा पहलु ये भी है की हर कम्पनी अपने यहाँ काम करने वाले लोगो के बारे जानकारी रखने की अधिकारी है क्योंकि कल को वो किसी असामाजिक काम को करते हुए पकड़ा गया तो सवाल कम्पनी से भी होंगे .
निजता और निजी जीवन में घुसपेंठ की बहस काफी लम्बी है और अलग अलग परिस्थितियों में इसके प्रभाव अलग हो सकते हैं,पर हम कोशिश कर सकते हैं की हमारी जिंदगी इससे ज्यादा प्रभवित ना हो तो एक बार अपने प्रोफाइल को चेक अवश्य कर लें :-
-लोग आपको घटियाँ गंदे या अश्लील चित्रों  में टैग  तो नहीं कर रहे..
-आपकी फ्रेंड लिस्ट में अनजाने या बुरे लोग तो शामिल नहीं हो गए ..
-कोई आपके प्रोफाइल का गलत इस्तेमाल तो नहीं कर रहा..  (हेकिंग  से बचिए )
-ट्विटर पर आप गलत लोगो को फॉलो तो नहीं कर रहे..
-आपकी भाषा अश्लील या भावनाएं भड़काने वाली ना हो..  ( ये सामाजिक रूप से भी जरुरी है)

सावधान रहे हो सकता है गलती आपकी ना हो या अनजाने में किसी फोटो को शेयर या लाईक किया हो और वो आपकी नौकरी खा जाए. और अगर आप सच में इसी तरह के इंसान है जो भड़काऊ बयान देना, शराब पीकर किए गए धमाल को लोगो से शेयर करना या आपतिजनक सामग्री को शेयर करना पसंद करते है  तो ज़रा ज्यादा सावधानी की जरुरत होगी क्यूंकि आप जैसे लोगो के कारण बिचारे दुसरे लोगो की नौकरी खतरे में आ सकती है ..

 

(कनुप्रिया गुप्ता मशहूर ब्लॉगर हैं)
Facebook Comments
Did you find apk for android? You can find new Free Android Games and apps.

संबंधित खबरें:

Share.

About Author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

4 Comments

  1. Pradeep Kumar Gupta on

    कनु जी. बहुत अच्छा आर्टिकल लिखा है आपने . बहुत बहुत धन्यवाद्

  2. निजता का दायरा खत्‍म कर रहे हैं सोशल साईट……..

    स्थिति यह है कि हम इनमें अपनी एक एक छोटी छोटी दिनचर्या को शेयर कर देश दुनिया तक पहुंचा रहे हैं, पर अपने पडौस से अंजान होते जा रहे हैं…….

    बहरहाल, चिंतनपरक लेख।

पाठक चाहे आलेखों से सहमत हों या असहमत, किसी भी लेख पर टिप्पणी करने को स्वतंत्र हैं. हम उन टिप्पणियों को बिना किसी भेद-भाव के निडरता से प्रकाशित भी करते हैं चाहे वह हमारी आलोचना ही क्यों न हो. आपसे अनुरोध है कि टिप्पणियों की भाषा संयत एवं शालीन रखें - मॉडरेटर

%d bloggers like this: