कृपया अपनी खबरें, सूचनाएं या फिर शिकायतें सीधे [email protected] पर भेजें | इस वेबसाइट पर प्रकाशित लेख लेखकों, ब्लॉगरों और संवाद सूत्रों के निजी विचार हैं। मीडिया के हर पहलू को जनता के दरबार में ला खड़ा करने के लिए यह एक सार्वजनिक मंच है। पाठक चाहे आलेखों से सहमत हों या असहमत, किसी भी लेख पर टिप्पणी करने को स्वतंत्र हैं। हम उन टिप्पणियों को बिना किसी भेद-भाव के निडरता से प्रकाशित भी करते हैं चाहे वह हमारी आलोचना ही क्यों न हो। आपसे अनुरोध है कि टिप्पणियों की भाषा संयत एवं शालीन रखें -मॉडरेटर

भारी पड़ा शाहिद सिद्दीकी को मोदी का साक्षात्कार लेना…

1
Want create site? Find Free WordPress Themes and plugins.

उर्दू अखबार नई दुनिया के संपादक और समाजवादी पार्टी के नेता शाहिद सिद्दीकी को गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी का इंटरव्यू लेना भारी पड़ गया. सिद्दीकी को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है. सपा महासचिव रामगोपाल यादव ने शनिवार को पत्रकारों को बताया कि सिद्दीकी पार्टी में नहीं हैं. वह कभी सपा में थे ही नहीं. मीडिया सिद्दीकी को सपा नेता न कहें.

सिद्दीकी को पार्टी ने कोई पद नहीं दिया था. वह टीवी चैनलों के कार्यक्रमों में बतौर प्रवक्ता बोलते थे, लेकिन वे आधिकारिक प्रवक्ता नहीं थे. मुलायम सिंह यादव, अखिलेश यादव व राजेन्द्र चौधरी ही आधिकारिक रूप से पार्टी की ओर से बोलने के लिए अधिकृत हैं.

बताया जा रहा है कि मोदी के इंटरव्यू को लेकर मुस्लिम नेता नाराज थे. 2014 में लोकसभा चुनाव है. ऐसे में सपा मुस्लिम वोट बैंक को खोना नहीं चाहती है. इसलिए सिद्दीकी को पार्टी से बाहर कर दिया गया. सिद्दीकी पत्रकार के साथ साथ राजनेता भी हैं. सिद्दीकी पहले काग्रेस में थे, बाद में बसपा में शामिल हो गए. इस साल 9 जनवरी को वे सपा में शामिल हुए थे.

सिद्दीकी को दिए साक्षात्कार में मोदी ने कहा था कि अगर गुजरात दंगों के लिए वे दोषी हैं तो उन्हें फासी पर लटका दिया जाना चाहिए. अगर वे निर्दोष हैं तो उन्हें बदनाम करने वालों को माफी मागनी चाहिए. मोदी ने कहा था कि गुजरात दंगों के लिए वे माफी नहीं मागेंगे.

Facebook Comments
Did you find apk for android? You can find new Free Android Games and apps.

संबंधित खबरें:

Share.

About Author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

1 Comment

  1. क्या भर्रे पड़ा वोह पार्टी फिर बदल सकते हैं

पाठक चाहे आलेखों से सहमत हों या असहमत, किसी भी लेख पर टिप्पणी करने को स्वतंत्र हैं. हम उन टिप्पणियों को बिना किसी भेद-भाव के निडरता से प्रकाशित भी करते हैं चाहे वह हमारी आलोचना ही क्यों न हो. आपसे अनुरोध है कि टिप्पणियों की भाषा संयत एवं शालीन रखें - मॉडरेटर

%d bloggers like this: