/मैय्या मोय तो “एनडी” सो ही “पापा” ला के दे

मैय्या मोय तो “एनडी” सो ही “पापा” ला के दे

-संजीव चौहान||
सादर नमन। देश के कानून को। दिल्ली हाईकोर्ट की उस बेंच को, जिसने रोहित शेखर के पापा (नारायण दत्त तिवारी) की पहचान कराने में अहम भूमिका अदा की। इस अदालती निर्णय ने साबित कर दिया, कि देश का अब कोई भी “रोहित शेखर” , बिना “पापा” के नहीं रहेगा। चाहे डीएनए परीक्षण “जबरिया” ही क्यों न कराना पड़े।
एनडी तिवारी, रोहित शेखर के पापा क्या साबित हुए? उनका तो चिंतन करने का नजरिया ही बदल गया। इधर दिल्ली हाईकोर्ट में तिवारी जी की डीएनए रिपोर्ट उजागर हुई। दूसरी ओर एनडी तिवारी का बयान जारी हो गया। “यह मेरा निजी मामला है। मैं विवादों से दूर रहना चाहता हूं। इस मामले को ज्‍यादा तूल नहीं देना चाहता था। मुझे अपनी तरह जीने का हक है। यह मुफ्त में प्रचार पाने की कोशिश है। मेरी सहानुभूति रोहित शेखर के साथ है।” जवानी में मुंह काला किये बैठे एनडी तिवारी, बुढ़ापे में और ज्यादा छीछालेदर से बचने के लिए खुद तो मीडिया के सामने नहीं आ सके। सबकुछ अपने ओएसडी एडी भट्ट के माध्‍यम से कहलवा दिया। तिवारी ने आरोप लगाया कि उन्‍हें अपने ही लोगों ने बदनाम करने के लिए एक सोची-समझी साजिश रची।
तिवारी जी की यह बात आपके गले उतर जाये आसानी से तो उतार लो। मेरे गले में तो बार-बार फंस रही है, कि उनकी डीएनए रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। भला तिवारी जी, आप खुद ही बताओ। इसमें आपको बदनाम करने की क्या साजिश हो सकती है? जब शारीरिक और अनैतिक संबंध आपने बनाये। उज्जवला शर्मा के साथ। उनके गर्भ से जिस रोहित शेखर का जन्म हुआ, वो भी तुम्हारा ही अंश निकला। कई साल तक शादी करने का चकमा आपने दिया, रोहित शेखर की मां को। यह कहकर कि उज्जवला की कोख से तुम्हें संतान मिल जायेगी, तो आप उनके साथ विवाह तो बाद में भी कर लेंगे।
इतना ही नहीं। उज्जवला शर्मा ने डीएनए रिपोर्ट उजागर होने से एक सप्ताह पहले मुझे दिये एक इंटरव्यू में बताया, कि आप सात साल तक उन्हें खुद में उलझाये रहे थे। यह कहकर कि वे आपके अंश से एक बच्चा “जनकर”  (पैदा करके) आपको सौंप दें। उज्जवला शर्मा को घेरने के लिए घंटों आप उज्जवला शर्मा के पिता प्रोफेसर और पूर्व केंद्रीय मंत्री शेर सिंह के दिल्ली स्थित सरकारी आवास 3 कृष्णा मेनन मार्ग पर दिन-रात डटे (पड़े) रहते थे। बकौल डा. उज्जवला शर्मा- उस वक्त आपकी उम्र 53-54 साल थी और उनकी (उज्जवला) उम्र मात्र 33-34 साल थी।
अब बतायें आप कांग्रेस के परम आदरणीय तिवारी जी। इसमें सच क्या और झूठ क्या है? अगर सबकुछ सच है, तो फिर रोहित शेखर के जैविक पिता साबित होने पर अब आप “विधवा-विलाप” क्यों कर रहे हैं? यह कहकर कि आपको रोहित का जैविक पिता साबित कराने में भी “राजनीति” हो रही है। या यह भी आपके दुश्मनों की, आपको बदनाम करने की सोची-समझी राजनीति है। क्या आपने भी जिंदगी भर इसी तरह की राजनीति की थी। अगर “हां” तो फिर इसका मतलब आपके साथ अब जो हो रहा है, वो सही है। आप इसी के हकदार हैं। अगर “नहीं”, तो फिर इसका मतलब अब आप अपने “कर्मों का ठीकरा” दूसरे के सिर फोड़कर, अपना सिर सही-सलामत बचाने पर उतारू हैं। जब रोहित की मां से “निजी” संबंध आपके थे, तो बताओ भला इसमें विरोधियों ने कैसे और क्या साजिश रच डाली?  अगर कोई विरोधी उस समय आपके और उज्जवला शर्मा के रास्ते का रोड़ा बन गया होता, जब आप यह सब करने पर उतारू थे, जो आप जाने-अनजाने कर बैठे हैं। और जिसे लेकर आज इतना बखेड़ा खड़ा हो गया है, तो शायद आज आपको इस बुढ़ापे में यह दिन न देखना पड़ता।

संजीव चौहान

आप समय रहते अगर बचे होते, तो अपने किसी विरोधी की “चाल” के चलते ही बचे होते। मेरे नजरिये से तो जब आप “अपनी” पर उतरे हुए थे, तो किसी विरोधी ने टांग ही नहीं अड़ाई होगी। और आप यह सोचकर वो सबकुछ कर बैठे, जिसे अपने विरोधी के बीच में आने से नहीं कर पाते। उस वक्त भले ही विरोधी आपको कुछ समय के लिए बुरा लगता, लेकिन आपका बुढ़ापा नरक होने से बचा ले जाता।
चलिये छोड़िये। एनडी तिवारी ने जो कुछ चोरी-छिपे किया। वो सब अब दुनिया के सामने है। यह उनका “निजी” मामला है। किसी के फटे में, मैं कौन हूं फच्चर लगाने वाला। हां इतना जरुर है, कि जबसे एनडी तिवारी-रोहित शेखर की डीएनए रिपोर्ट पॉजिटिव आयी है, तब से देश के गली-मुहल्लों से भी आवाज आने लगी है- मैय्या मोये तौ एनडी सो पापा चाहिए। जिधर सुनिये उधर ही एनडी तिवारी-रोहित शेखर के चर्चे हैं।

कहने का मतलब यह है, कि दिल्ली हाईकोर्ट का यह फैसला आने वाले समय में मील का पत्थर भी साबित हो सकता है। उन तमाम उज्जवला शर्मा सी और न जाने कितनी महिलाओं के लिए, जो शर्म-ओ-हया से मुंह बंद किये बैठी थीं। उन तमाम रोहित शेखर के लिए, जिनकी मां चाहकर भी बाप का नाम खोलने में कन्नी काट जाती थीं। क्योंकि उन्हें यही पता होगा, कि अदालत किसी का जबरिया “डीएनए” टेस्ट नहीं करा पाती है।
इस ऐतिहासिक फैसले (खुलासे) के बाद शायद अब वो दिन दूर नहीं होगा, जब देश के कोने-कोने से अदालतों में नये-नये मामले आने शुरु होंगे। जिनमें रोहित शेखर जैसे तमाम नौजवान अपने “जैविक-पिता” की तलाश कर रहे होंगे। इस उम्मीद में, कि शायद उन्हें भी एनडी तिवारी की ही तरह खोया हुआ पिता नसीब हो जाये। लंबी कानूनी लड़ाई और डीएनए की रिपोर्ट “पॉजिटिव” पाये जाने के बाद।

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.